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ब्लॉगिंग का झुमरी तलैया बनाम थू थू चौकड़ी से बचने का #1 सॉलिड उपाय.

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  यूं तो (यहाँ हिन्दी माना जाए) ब्लॉग पोस्टों में 80 प्रतिशत कूड़ा कबाड़ा सदैव सर्वदा मिलते रहने की थ्योरी और वाद-विवाद हिन्दी ब्लॉगिंग के...

 

यूं तो (यहाँ हिन्दी माना जाए) ब्लॉग पोस्टों में 80 प्रतिशत कूड़ा कबाड़ा सदैव सर्वदा मिलते रहने की थ्योरी और वाद-विवाद हिन्दी ब्लॉगिंग के पुरातन समय http://hindini.com/fursatiya/?p=119 से ही जारी है, मगर ये बात भी तय है कि कूड़े के कूड़ा-पन की ग्रेविटी दिनोंदिन बढ़नी ही है, भले ही प्रतिशत वहीं पर झूलता रहे.

हाल ही में जे पी नारायण http://behaya.blogspot.com/2008/01/blog-post_2134.html ने इस बात को फिर http://behaya.blogspot.com/2008/01/blog-post_20.html गहराई से उठाया. कुछ इसी तरह की समस्या अशोक पाण्डेय http://kabaadkhaana.blogspot.com/2007/12/blog-post_27.html#c3007857872533696971 के साथ भी हुई थी. तब अशोक पाण्डेय व जेपी नारायण की बातों पर मेरा कहना था कि आप ब्लॉगिंग के कूड़े फैलने से किसी क़िस्म की रोक नहीं लगा सकते. हाँ, कूड़े-कबाड़ से आप कल्टी मार सकते हैं. आप इस बात पर स्वतंत्र हैं कि आप अपनी नाक कहाँ घुसाएँ – ताकि गंध अपने पसंद, अपने विचारों के अनुरूप हो. और हिन्दी के हर चिट्ठाकार से मेरा यही कहना है. इंटरनेट पर तमाम तरह की तकनीक उपलब्ध है जिससे यह काम किया जा सकता है, और आसानी से किया जा सकता है.

तो, आइए, कूड़ा कबाड़ों को अपने पठन-पाठन से दूर करने के कुछ ठोस उपाय ढूंढें. कुछ ऐसे उपाय ढूंढें जो हमें ये अहसास दिलाएँ कि जैसे इन कूड़ा पोस्टों का वजूद ही न हो. ये हमारी आंखों के सामने ही न आ सकें.

वैसे भी, जब दिन में 100-150 पोस्टें आने लगी हैं और जिनकी संख्या दिन ब दिन बढ़ेंगी तब ऐसे उपाय ही काम आएंगे क्योंकि किसी भी दिए गए दिन, शर्तिया आप 10-15 बेहतरीन पोस्टें ही पढ़ पाएँगे और बेहतर पोस्टों में से और बेहतर पोस्ट ही पढ़ पाएंगे.

तो, लीजिए पेश है आपके लिए #1 सॉलिड उपाय.

  1. चिट्ठाजगत् http://www.chitthajagat.in/ में आप अपना खाता बना लें – यानी अपने को पंजीकृत कर लें यदि आप अभी तक नहीं हुए हैं तो. यदि कोई समस्या है तो सबसे ऊपरी दाएँ कोने पर प्रक्रिया – step-by-step पर क्लिक करें, और बताए अनुसार पंजीकरण करें.
  2. चिट्ठाजगत् में अपने खाते में सत्रारंभ (लॉगइन) कर लें.
  3. चिट्ठाजगत् में सारे टैब पर क्लिक करें. यहाँ आपको पिछले दिनों में प्रकाशित हुए हिन्दी चिट्ठों की सारी प्रविष्टियाँ दिखाई देंगीं. बाजू में दो गुलाबी दिल दिखाई देंगे. आपको बीच वाले दिल को चुनना है जिसमें माउस रखने पर दिखाई देता है – चिट्ठा पसंद करें. वह भी तब, जब कोई चिट्ठा आपकी पसंद का, आपके विचारों का हो. तो अपने पसंदीदा तमाम चिट्ठों के सामने दिए गए बीच वाले दिल पर क्लिक करते जाएँ और इस तरह चिट्ठाजगत में पीछे के पृष्ठों पर जाते जाएँ (शायद चिट्ठाजगत् 10 पिछले पृष्ठों तक की सामग्री दिखाता है.) और एक एक कर अपने पसंदीदा चिट्ठों को पसंद करते जाएँ.
  4. जब आप अपनी पसंद पूरी कर लें (जिसमें आप बाद में और जोड़ सकते हैं) तो फिर बाद में चिट्ठाजगत् में मेरा टैब पर (पृष्ठ में सबसे ऊपरी बाएँ कोने पर) क्लिक करें और अपने पसंदीदा चिट्ठों को पढ़ें – जिन्हें आपने अपनी रूचि के अनुरूप चुना है. अब चिट्ठाजगत् आपके चुने गए चिट्ठों के अलावा कोई दूसरा चिट्ठा आज के बाद से आपको आपके इस विशिष्ट पन्ने पर नहीं दिखाएगा. अब आप ये शिकायत मत कीजिएगा कि हिन्दी ब्लॉगों में कितना कूड़ा फैला है. कूड़ा सदा सर्वदा रहेगा – सड़क पर भी गड्ढे और गंदगी रहती है. इसका ये अर्थ तो नहीं कि गड्ढों पर से और गंदगी को समेटते हुए जाया जाए. गड्ढे से बचकर और गंदगी से दूर रहकर ही हम सब सड़क पर चलते हैं.
  5. चलिए, हमने चिट्ठाजगत् पर अपने पसंदीदा चिट्ठों का एक पसंदीदा पृष्ठ तैयार कर लिया. अब यदि पसंदीदा चिट्ठा दो पोस्ट के बाद कूड़ा फैलाने लगे तब? मैंने पाया कि चिट्ठाजगत् में एक बग है – वो ये कि वहाँ मेरा पृष्ठ में से चिट्ठों को निकाल बाहर करने की सुविधा अभी नहीं है. जहाँ चिट्ठा पसंद करें लिखा आता है, वहां पर पहले से पसंद किए चिट्ठे में भी चिट्ठा पसंद करें लिखा आता है. उसे चिट्ठा निकाल फेंके होना चाहिए. वैसे, वे ये वादा कर रहे हैं कि शीघ्र ही इसमें और भी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी. तब, उम्मीद करें कि हमें यह बहुत ही आवश्यक, उपयोगी सुविधा मिल जाएगी. चिट्ठाजगत में मेरा चिट्ठाजगत की फ़ीड नहीं है, बल्कि चिट्ठाजगत की मुख्य फ़ीड ही मिलती है. इसे भी सही किया जाना चाहिए. मैं चाहता हूँ कि मुझे मेरे पसंदीदा चिट्ठों की ही फ़ीड मिले – कूड़ा कबाड़ा की नहीं! साथ ही, मेरे जैसे कुछ आराम पसंदों के लिए, यह कार्य कुकी आधारित भी होना चाहिए, पंजीकरण की जरूरत ही न हो. और, यदि जोड़ें के बजाए निकाल बाहर करें विकल्प हो, जो मेरे कूड़ा खण्ड में संकलित होता रहे (छटे चौमासे तिर्यक निगाह डालने के लिए कि क्या पता कुछ अच्छी बातें लिखी जा रही हों, और साथ ही नए नए शामिल किए जा रहे चिट्ठे इवेल्यूएशन के लिए छूटें नहीं) जिसमें दो विकल्प हर विषय वार चिट्ठों में उपलब्ध हो - 'मेरा' व 'कूड़ा' हो, तो और उत्तम!
  6. व्यक्तिगत तौर पर मैं ब्लॉगवाणी http://www.blogvani.com  पसंद करता हूँ – उसके साफसुथरे, आंखों को सुकून देने वाले रूप (अनक्लटर्ड एंड आई कैण्डी) के कारण. परंतु अभी उसमें यह सुविधा नहीं है. मेरी सार्वजनिक मांग है कि यह सुविधा उसमें जोड़ी जाए. और, नारद http://narad.akshargram.com/  जी के क्या कहने – जब वे धमाका करेंगे तो जरूर ही वे ये सुविधा साथ में जोड़ेंगे – क्योंकि जब 5-10 हजार चिट्ठे होंगे तब तो उनमें एक साथ निगाह डालना भी असंभव होगा!

तो, अब हिन्दी चिट्ठों में फैल रहे कूड़े आपकी नजरें इनायत न हों, गैंग वार करने वाले, ग्रुपिज्म फैलाने वाले चिट्ठे आपकी निगाहों में न आएँ तो, फ़ूहड़ विक्षिप्तिया आत्मालापों में रत ‘रविरतलामी के हिन्दी चिट्ठे’ जैसे चिट्ठों को निकाल फेंकिए अपने मेरा चिट्ठाजगत http://mera.chitthajagat.in/ से! आज ही, अभी ही!

और हाँ, अब जबकि हमने आपको हिन्दी चिट्ठों को सलीके से, बिना गंध लिए, पढ़ना सिखा दिया है, आप भविष्य में हमें न गरियाइयेगा कि यहाँ कितना कूड़ा कबाड़ा फैला रहे हो मियाँ!

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