छींटे और बौछारें

व्यंग्य जुगलबंदी - 86 : व्यंग्यकार के मन के भीतर का आंधी-तूफ़ान

एक व्यंग्यकार जब काग़ज़-कलम लेकर बैठता है – सॉरी, कंप्यूटर कुंजीपट लेकर बैठता है (आजकल कौन निगोड़ा काग़ज़ कलम लेकर बैठता है? और, यदि बैठता भ...

साहित्य जगत् के कास्टिंग काउच

जब मैंने कोई पाव दर्जन से अधिक पांडुलिपियाँ लिख मारीं तो लगा कि इन्हें पूरी दुनिया के पाठकों तक पहुँचाने का अप्रतिम कार्य तो कर ही देना चाहि...

सुरेन्द्र मोहन पाठक का लेखन अच्छा कि वेद प्रकाश काम्बोज का?

टंटा ही खत्म. मार्केट में नया लेखक आया है. एआई. उसके सामने डान ब्राउन भी फेल. जेके रॉलिंग को भी कोई नहीं पूछेगा. शर्तिया.

जिंदगानी बस है यही, फ़ारवर्ड किए जा...

स्मार्टफ़ोन माने वाट्सएप्प, और, बहुत हुआ तो फ़ेसबुक.

मैं तो तेरी रग रग से वाकिफ़ हूँ प्यारे!

तकनीकी उन्नतता का एक और धमाल. अब तो, सचमुच, जबान संभाल के!

किंडल ईबुक संबंधी आम प्रश्नों के उत्तर kindle FAQ Hindi

( किंडल ईबुक - पेपर व्हाइट एडीशन) किंडल क्या है? किंडल, बड़े स्क्रीन वाला, स्मार्टफ़ोन जैसा दिखने वाला एक हार्डवेयर है, जिसे केवल किताब जैस...

बेहतर लिखना तो ठीक है साहब, बेहतर पढ़ने वालों में असली बुद्धिमत्ता कहाँ से लाएँगे?

... पत्थर का एक टुकड़ा भी! कृत्रिम बुद्धिमत्ता से अब उच्चकोटि का साहित्य लिखा जाएगा. कविताई-शविताई, ग़ज़ल-शज़ल, व्यंग्य-श्यंग्य  सब. एक बात ...