रविवार, 15 जून 2008

पितृ दिवस पर मियाँ मरफ़ी

मरफ़ी के पिताओं के नियम

  • आप चाहें कितने बड़े हो जाएँ, आप अपने पिता के लिए हमेशा वही नाक सुड़कते हुए बच्चे ही होते हैं.
  • जब आपके पिता आपसे कहते हैं ‘नहीं’, तो इसका अर्थ होता है – अपनी मम्मी से जाकर पूछो.
  • पिता जो कहते हैं, वही नियम होता है, परंतु सिर्फ बच्चों के वोट देने लायक उम्र होने तक.
  • पिता परिपूर्ण होते हैं, समस्याएँ बच्चों के साथ होती हैं.
  • वैसे तो बहुत से विकल्प होते हैं, परंतु पिता का कहा ही अंतिम होता है.
  • यदि आपके पिता खामोश रहते हैं – तो इसका अर्थ है कि वे कोई प्लान कर रहे होते हैं. यदि वे खर्राटे भर रहे होते हैं तो समझें वह प्लान कामयाब हो गया है.
  • अपने पिता से हमेशा सहमत रहें. फिर देखें वे यह कैसे कहते हैं – मैंने तुम्हें पहले ही कहा था!
  • यदि आपको अपने पिता की पूर्ण सहमति हासिल हो गई है तो इसका मतलब है कि वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं.
  • आप अपनी माता को उल्लू बनाने की कोशिश कर सकते हैं, परंतु पिता को नहीं – वो तो ऐसे स्टंट दसियों बार पहले ही आजमा कर फेल हो चुके होते हैं.
  • बहस में जीत पिताओं की ही होती है – दूसरे तरीके से भी तर्क उनके ही होते हैं.
  • पिताओं द्वारा तय किए गए नियम-कानूनों के कुछ अपवाद भी होते हैं, परंतु वे भी पिताओं द्वारा बनाए गए होते हैं.
  • आप अपने पिता से ज्यादा अनुभवी कभी भी नहीं हो सकते हैं.
  • आपके पिता आपकी गलतियों को माफ कर सकते हैं परंतु इसका ये मतलब नहीं कि आप उन्हें दोहराएं.
  • पिता ऐसे न्यायाधीश हैं जो बिना सबूत के सज़ा सुना सकते हैं.
  • आप भले ही अपने पिता के दिशा-निर्देशों के बगैर चलने लायक बड़े हो गए हों, परंतु यह बात उन्हें भूले से भी न बताएं.
  • अपने पिता को आप किसी भी समय डिस्टर्ब कर सकते हैं – परंतु यह संतुष्टि कर लें कि कहीं क्रिकेट मैच तो नहीं चल रहा.
  • घर पर टीवी सब देख सकते हैं, परंतु उसके रिमोट पर अधिकार पिता का होता है.
  • आप कुछ लोगों को हमेशा के लिए उल्लू बना सकते हैं, कुछ लोगों को कुछ समय के लिए, परंतु अपने पिता को कभी नहीं. वे इस तरह की सफल-असफल कोशिशें अपने जमाने में कर परिपक्व हो चुके होते हैं.
  • आप अपने पिता से कभी ये न कहें कि करने के लिए कुछ नहीं है. वे कुछ न कुछ नया काम आपको पकड़ा ही देंगे.
  • उपलब्धि हमेशा आपके पिता के सौजन्य से हासिल होती है, असफलता में आपका और सिर्फ आपका योगदान होता है.
  • पिता द्वारा सुझाया तरीका ही सर्वश्रेष्ठ होता है. यदि आपको विश्वास नहीं होता तो  जरा उन्हें पूछ देखें.
  • जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे आप अपने आपको अपने पिता का ज्यादा प्यारा, दुलारा बच्चा समझने लगते हैं.
  • यदि आप समझते हैं कि आप अपने पिता से कुछ छुपा सकते हैं, तो याद कीजिए, किसने आपके पोतड़े बदलने में मदद की है.
  • आप चाहे जो भी करें उसे आपके पिता की आलोचना मिल सकती है – कुछ भी नहीं करने पर भी.
  • पिता की वे सलाहें जो आपने अनदेखा की हुई होती हैं, वे हमेशा ही सर्वोत्तम सलाहें होती हैं.

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मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ पढ़ें-

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मरफ़ी के नए साल के नियम

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5 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. वाह! वाह!! वाह!!
    जय पिता, जय मरफी।

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  2. पिता दिवस पर शानदार नियम। पिता दिवस मुबारक हो।

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  3. मैं तो मर्फी का एक ही नियम जानता था,
    यदि किसी काम करने में गलती हो सकती है तो वह हो कर रहेगी। If a thing can go wrong then it will go wrong.

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  4. मार्फी के नियम सद ही मजेदार रहे है.

    घर पर टीवी सब देख सकते हैं, परंतु उसके रिमोट पर अधिकार पिता का होता है.

    क्या सचमुच? :)

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  5. आह! वाह-क्या नियम लाये हैं ऐन पितृ दिवस पर. :)

    उत्तर देंहटाएं

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