बुधवार, 27 सितंबर 2006

ये मरफ़ी महोदय कौन हैं?

ये मरफ़ी महोदय कौन हैं? और इनके नियम इतने विचित्र किन्तु सत्य क्यों हैं?
(नियमों की पूरी सूची के लिए इस पृष्ठ के सबसे नीचे स्क्रॉल करें. नए नियम यथा समय जोड़े जाएंगे व सूची अद्यतन की जाती रहेगी. अंतिम परिवर्धन - 13 अक्तूबर 2006)
मरफ़ी का ज्ञात (या अब तक अज्ञात, मरफ़ी के हिसाब से कहें तो,) सबसे पहला नियम है - "यदि कुछ गलत हो सकता है, तो वह होगा ही". कुछ का कयास है कि यह नियम एडवर्ड एयरफ़ोर्स के नॉर्थ बेस में सन् 1949 में अस्तित्व में आया. यह नियम वहाँ पदस्थ कैप्टन एडवर्ड ए मरफ़ी के नाम पर प्रसिद्ध हुआ. दरअसल, कैप्टन इंजीनियर मरफ़ी महोदय को एयर फ़ोर्स में एक परियोजना के तहत यह शोध करना था कि क्रैश की स्थिति में मनुष्य अधिकतम कितना ऋणात्मक त्वरण झेल सकता है. जाँच प्रणाली में ही आरंभिक खराबी का पता लगाने के दौरान मरफ़ी ने पाया कि एक ट्रांसड्यूसर की वायरिंग गलत तरीके से की गई थी. उसे देखते ही मरफ़ी महोदय के मुँह से बेसाख्ता निकला - "यदि किसी काम को गलत करने के तरीके होते हैं, तो लोग उसे ढूंढ ही लेते हैं." वहां का परियोजना प्रबंधक ऐसे ही और तमाम अन्य नियमों का शौकिया संकलन करता था. उसने यह बात भी संकलित कर ली और उसे मरफ़ी के नियम का नाम दिया.
बाद में, परियोजना से संबद्ध डॉक्टर जॉन पाल स्टाप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मरफ़ी के इस नियम को उद्भृत करते हुए कहा कि परियोजना की सफलता में इस नियम का बहुत बड़ा हाथ है, चूंकि फिर बहुत सी बातों पर विशेष ध्यान दिया गया - गलतियाँ हो सकने की तमाम संभावनाओं को पहले ही पता लगाया गया और उन्हें दूर किया गया या उससे बचा गया.
हवाई जहाज निर्माण कंपनी ने इस नियम को पकड़ लिया और विज्ञापनों में जम कर प्रचार किया. और देखते ही देखते यह नियम बहुत से समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में खासा चर्चित हो गया.
इस तरह, मरफ़ी के पहले नियम का जन्म हुआ. फिर तो इस तरह के नियमों का संकलन होता रहा, और मरफ़ी का नाम दिया जाता रहा.
मरफ़ी के पहले नियम के बारे में कुछ मरफ़ियाना खयाल -
• मरफ़ी के पहले नियम की खास बात यह है कि इसे मरफ़ी ने नहीं बनाया, बल्कि मरफ़ी नाम के ही किसी दूसरे आदमी ने बनाया.
• क्या कोई व्यक्ति नियम बना सकता है? नहीं. नियम तो पहले से ही बने होते हैं. बस हमें पता बाद में चलता है, जब कोई उसे खोज लेता है, और दुनिया को बताता है.
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मरफ़ी के नियम के जन्म की एक दूसरी कहानी -

सन् 1930 में यूएस नेवी में पदस्थ कमांडर जे. मरफ़ी को हवाई जहाजों के रखरखाव का दायित्व सौंपा गया था. एक दिन किसी फ़िटर ने हवाई जहाज पर कोई पुरजा उलटा लगा दिया. जाहिर है, वह पुरजा ऐसे डिज़ाइन का था जो उलटा भी लग सकता था. इसे देख कर मरफ़ी ने कहा - "यदि कोई फ़िटर हवाई जहाज के पुरजे को उलटा लगा सकता है तो अंततः वह एक दिन उलटा लगा ही देगा."
धीरे से यह नियम संशोधित होता गया और मरफ़ी के बहुचर्चित नियम का जन्म हुआ.
मरफ़ी के नियम की जन्म की कहानी में मत भिन्नता से यह तो सिद्ध होता है कि नियम आपके इर्द गिर्द सदा सर्वदा रहते है. बात सिर्फ उनके खोजने-बताने की रह जाती है.

और, मरफ़ी के नियम कुछ ऐसे बनते हैं:

मरफ़ी के नियमों के जन्म की तीसरी, असली कहानी!

मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ पढ़ें:
मरफ़ी का भारतीय घरेलू महिलाओं हेतु नियम
मरफ़ी के कुछ प्यारे नियम
मरफ़ी के कुछ सामान्य नियम
मरफ़ी के घरेलू व कंप्यूटरी नियम
मरफ़ी के अध्ययन-अध्यापन नियम
नन्हें मुन्नों के लिए मरफ़ी के नियम
मरफ़ी के वाणिज्यिक व्यापारिक नियम
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मरफ़ी के नए साल के नियम
मरफ़ी के चौपहिया नियम
मरफ़ी के बस अड्डे के नियम

3 blogger-facebook:

  1. यानी जितने नियम मर्फि के नियम के नाम से हम पढ़ रहे हैं वे जरूरी नहीं की मर्फि मोहदय ने खोजे हो.
    इन्हे खोजने वाले हममे से ही कोई हो सकता हैं बस नियमो का प्रकार मर्फि होता हैं.
    या फिर मर्फि के नियम तभी मर्फि के नियम हो सक्ते हैं जब वे मर्फि प्रकार के हो.

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  2. हां, संजय, सही कहा आपने.

    मरफ़ियाना खयालात हों, बस. वे ही मरफ़ी के नियम बन जाते हैं. परंतु वे चाहे जितने अजीब हों, जीवन के सत्य के बहुत करीब होते हैं. :)

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  3. नीरज दीवान3:36 pm

    मरफ़ियाना कैफ़ियत से देखते तो संजय भाई उक्त तबादला ए ख़्याल ना करते.. ही ही. क्योंकि मरफ़ी की आत्मा रवि जी के शरीर में प्रवेश करे महीने हो चुके हैं. अब तो जो रवि जी का ख़्याल होगा वो भी मरफ़ी के खाते में जाएगा. वाह उस्ताद वाह मरफ़ी

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