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मरफ़ी के नियम - किश्त 4: भारतीय घरेलू महिला

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भारतीय घरेलू महिला के लिए मरफ़ी के कुछ नियम

1. जिस हसीन शाम को आप अपने पति के लिए नाश्ता व चाय पहले से तैयार कर रखती हैं, उस दिन वे बेसाख्ता देरी से आते हैं.

उपप्रमेय 1 : जिस हसीन शाम को आप नाश्ता तैयार नहीं कर पाती हैं, उस दिन आपके पति जल्दी घर आ धमकते हैं और इतने भूखे होते हैं कि पूरा का पूरा डाइनिंग टेबल मय फर्नीचर व मर्तबान खा जाने को तत्पर होते हैं.
उपप्रमेय 2 : जिस हसीन शाम के लिए आपके पतिदेव आपसे वादा कर रखते हैं कि वे जल्दी घर लौटकर आपको बाजार लेकर चलेंगे, उस दिन आप ऐसी कोई तैयारी मत रखिए. चूंकि वे बेसाख्ता देरी से आने वाले होते हैं.

2. जब आप खाना खाने बैठती हैं, आपका दो वर्ष का बच्चा तभी सूसू या पॉटी करने के लिए अजीब चेहरे बनाता है, या दूध वाला जल्दी (या देरी से) आकर आवाज लगाता है या कोई अजनबी दरवाजा खटखटा कर किसी चीज की मार्केटिंग करने का असफल प्रयास करता है या कोई वह पता पूछता है जो कि आपकी कॉलोनी का नहीं होता है.

3. जब आप अपनी किसी महत्वपूर्ण सहेली के फोन काल का इंतजार करते बैठी होती हैं, तो पता चलता है कि आपके कार्डलेस फ़ोन की बैटरी पूरी तरह डिसचार्ज हो गई है या लैंडलाइन फ़ोन के केबल में खराबी आ गई है या मोबाइल फ़ोन की बैटरी को आपका नन्हा उस पर गेम खेलकर खत्म कर चुका है.

उपप्रमेय 1: यदि फोन काल किसी टेलिमार्केटिंग कंपनी से आया होता है तो आपका बंद फ़ोन अचानक बढ़िया काम करने लगता है.

4. जिस दिन आप स्विमिंग पूल जाने का प्लान बनाती हैं, उसी दिन आपका बच्चा तेज सर्दी-बुखार से ग्रस्त हो जाता है.

उपप्रमेय: जिस दिन आप स्विमिंग पूल जाने का विचार करती हैं, और आपका बच्चा भी स्वस्थ रहता है, तो फिर उस दिन बारिश हो जाती है.

5. आपका कचरा उठाने वाला, आपके गैस पर रखे दूध के उबलने के ठीक 10 सेकण्ड पहले आता है. आप दूध को उबलते तक रुक नहीं सकतीं क्योंकि तब तक कचरा उठाने वाला अगली सड़क नाप चुका होता है. आप गैस बन्द कर कचरा डालने जाती हैं, तब भी पाती हैं कि अंततः दूध गैस की बची गर्मी से ही उबल कर बिखर गया.

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6. जिस दिन आप सोचती हैं कि आप आज हर हाल में रात्रि दस बजे से पहले सब काम खत्म कर आराम फरमाएँगी, और आप ऐसा कर भी लेती हैं - तो पाती हैं कि उस दिन रात भर बिजली गुल रही.

7. जिस दिन आपकी काम वाली बाई काम पर नहीं आती है, उसी दिन आपके घर में मेहमानों का तांता लगता है.

8. जब आप ढेर सारे कपड़े पानी में भिगो देती हैं, तब आपकी काम वाली बाई का संदेश मिलता है कि वह आज छुट्टी पर रहेगी.

9. जब घर में आलू-प्याज खत्म हो जाता है, और उसकी बहुत जरूरत होती है तो गली-गली सब्जी बेचने वाला हॉकर नहीं आता और फिर जब आप बाजार जाकर ये सब ले आती हैं तो पता चलता है कि वह हॉकर तमाम मुहल्ले में बार-बार हांक लगा रहा है.

10. जिस दिन आप अपने पति की गंदी-फटी-बदबूदार जीन्स धोकर बाहर धूप में सूखने डालती हैं, तो मौसम के अनुमान के विपरीत बरसात हो जाती है और जीन्स में फंगस लगकर वह और गंदा-बदबूदार हो जाता है.

उपप्रमेय: आपके पति को उस जीन्स के अलावा कुछ और पहनना भाता ही नहीं.

11. किसी आवश्यक खरीदारी के लिए आप अपने पतिदेव को बाजार भेजती हैं तो पाती हैं कि आपके पतिदेव तमाम दूसरे कार्य निपटा आते हैं और वही आवश्यक खरीदारी भूल आते हैं. और अंततः वह आवश्यक खरीदारी आपको ही करनी होती है.
उपप्रमेय: यदि आपके पति आवश्यक खरीदारी कर आते हैं तो या तो सामान खराब होता है या भाव उचित नहीं होता लिहाजा आपको स्वयं जाकर वह सामान वापस कर सही सामान उचित भाव में लाना होता है.

साभार - लक्ष्मी का चिट्ठा http://www.arunn.net/personalblog/2006/08/27/murphys-laws-for-the-home-maker/

मरफ़ी के कुछ और नियम यहाँ पढ़ें - किश्त 1 किश्त 2 किश्त 3

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

मज़ेदार लिस्ट। ये लीजिये एक मेरी तरफ़ से :

किसी दिन, फुर्सत के समय जब आप चेहरे पर काला-पीला सा कोई फ़ेस-पैक लगा के बैठी ही होती हैं, उसी समय कोई कुरियर, डाक या अनापेक्षित आगंतुक ज़रूर आता है।

उपप्रमेय: यदि पैक सूखने की कगा़र पर है और आप अपना मुँह खोलने में असमर्थ हैं तो फ़ोन का आना भी स्वाभाविक है।

क्या बात है !

मजा आ गया,
क्या हिन्दी चिटठाकारों के लिये भी मरफ़ी के कोई नियम आपकी जानकारी में है?

बहुत खुब, मजा आया.
सागर भाई की बात पर गौर किया जाये.

क्लास है गुरु जी।
एकदम क्लास। मजा आ गया। यार ये सीरीज तो लगातार जारी रहनी चाहिए।

बहुत खूब!!

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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