शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2006

मरफ़ी के व्यापारिक नियम...

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मरफ़ी के वाणिज्य-व्यापार के नियम

• किसी भी परियोजना के प्रथम 90% चरण पूरे होने में उसका 90% समय लगता है तथा बाकी के 10% में अतिरिक्त 90% समय लगता है.
• यदि आप अपना काम 24 घंटों में भी नहीं कर पाते हैं तो रात में भी काम करें.
• पीठ पर शाबासी की थपकी और कूल्हे पर लात पड़ने में सिर्फ कुछ इंच का ही अंतर होता है.
• अपनी स्थिति को विकल्प हीन न बनने दें. क्योंकि जब आपका कोई विकल्प नहीं होगा तो आपकी पदोन्नति भी नहीं होगी.

• इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं. फर्क इससे पड़ता है कि आप कहते फिरते हैं कि आपने क्या-क्या किया है और क्या-क्या करने वाले हैं.
• किसी भी वेतन वृद्धि के उपरांत, महीने के आखिर में आपके पास पहले की अपेक्षा पैसे कम ही बच रह पाते हैं.
• जितनी ज्यादा अशिष्टता आप दिखाएँगे उतनी ज्यादा अशिष्टता आपको मिलेगी.
• अपने आपको गंभीर बना कर और हाथों में फ़ाइल पकड़ कर शान से आप कहीं भी जा सकते हैं.

• सुबह-सुबह एक जीवित केकड़े को समूचा निगल लीजिए. फिर यकीन मानिए, पूरे दिन आपके साथ इससे बुरा कुछ हो ही नहीं सकता.
• अपने व्यापारिक पत्र में कभी भी दो प्रश्न एक साथ नहीं पूछें. जवाब उस प्रश्न का आएगा जिसके बगैर आपका काम चल सकता होता है, और दूसरे महत्वपूर्ण प्रश्न के बारे में कोई बात नहीं कही गई होती है.
• जब आपका बॉस उत्पादकता के बारे में बात करता है तो वह अपने स्वयं के बारे में कतई नहीं बोल रहा होता है.

• यदि आप पहली दफा में सफल नहीं होते हैं तो कम से कम एक बार फिर कोशिश करिए, फिर भले ही छोड़ दीजिए. मूर्ख बने रहने में कोई तुक नहीं.
• जब कभी भी आपका बॉस ऑफिस से घर छोड़ देने के लिए कहता है, तो प्रायः हर हमेशा आपके कार में बीयर की बोतलें लुढ़की पड़ी हुई होती हैं.
• बॉस हमेशा सही होता है. तब भी, जब वह खुद जानता होता है कि वह सही नहीं है.

• मां हमेशा कहती थी कि ऐसे कठिन दिन तो जीवन में आएंगे ही. परंतु उन्होंने यह नहीं बताया था कि इतने सारे आएंगे.
• बॉस के आगे और गधे के पीछे न चलें.
• विविध (मिसलेनियस) खाते में तो सारे ब्रह्मांड का आंकड़ा घुसाया जा सकता है.
• किसी भी मींटिग के समापन में तथा चाय-पानी के समय में कभी भी देरी नहीं करें.

• गलतियाँ मनुष्य से होती ही हैं, क्षमा कंपनी के नियमों में नहीं होता.
• कोई भी व्यक्ति कितना ही सारा काम कर सकता है बशर्ते वह कार्य उसे आबंटित न किया गया हो.
• महत्वपूर्ण पत्र जिनमें कोई त्रुटियाँ नहीं होती हैं, उनमें डाक में हस्तांतरण के दौरान त्रुटियाँ उत्पन्न हो जाती हैं.
• वह अंतिम व्यक्ति जिसने नौकरी छोड़ी या जिसे निकाल दिया गया वही हर गलत चीज के लिए जिम्मेदार माना जाता रहता है - जब तक कि आगे कोई नौकरी न छोड़ दे या नौकरी से न निकाल दिया जाए.

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• पहली दफा काम करने के लिए कभी भी पर्याप्त समय नहीं होता, परंतु उसे दुबारा करने के लिए हमेशा पर्याप्त से अधिक समय रहता है.
• उप-प्रमेय - किसी भी दिए गए काम को करने के लिए कार्यकर्ता के पास कभी भी पर्याप्त समय नहीं होता, जबकि पर्यवेक्षक के पास पर्याप्त से अधिक समय होता है.
• किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान का नाम जितना ज्यादा महात्वाकांक्षी प्रतीत होगा, उत्पादकता में वह उतना ही छोटा होगा.
• यदि आप अच्छे कार्यकर्ता हैं तो आपको सारे काम दे दिए जाएंगे. यदि आप सचमुच अच्छे हैं तो आप स्वयं ही वहां से बाहर चले जाएंगे.

• जब भी आपका बॉस आपके डेस्क पर आता है, तो हमेशा ही आप कोई बेकार सा कार्य कर रहे होते हैं.
• यदि कोई यह कहता है कि वह ‘बिला-नागा' उस काम को अवश्य ही कर देगा तो फिर तो वह नहीं ही करेगा.
• कॉन्फ्रेंसों में वही लोग जाते हैं जिन्हें असल में वहाँ जाना नहीं चाहिए होता है.
• भूतकाल में हमेशा किसी काम के लिए पर्याप्त बल मौजूद रहता है.

• उसी गलती को लोग दुबारा नहीं दोहराते, वे बार-बार दोहराते हैं.
• यदि किसी कार्य का अंतिम समय (लास्ट मिनट या डेड लाइन) नहीं होता है तो वह कार्य कभी भी पूरा नहीं होता है.
• किसी ऑफ़िस में किसी अफ़सर का अधिकार उसके द्वारा रखे जाने वाले पेनों की संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
• यदि आपको समझ नहीं आ रहा है कि क्या करना चाहिए, या आज करने को कोई काम नहीं है तो जल्दी-जल्दी चलें और व्यस्त दिखें.

• आपके सर्वाधिक अरुचिकर कार्य के लिए आपको सर्वाधिक प्रशंसा मिलती है.
• सप्ताहांत में कोई बीमार नहीं होता.
• किसी कार्य को पूरा कर लेने के लिए नियमों पर न चलना कोई बहाना नहीं है.
• उप-प्रमेय - नियमों पर चलकर कभी भी कोई काम पूरा नहीं किया जा सकता.
• जब आप किसी कठिन समस्या में उलझ जाते हैं तो आप उसे आसान बना सकते हैं - यह प्रश्न पूछ कर - आपका प्रतिद्वंद्वी इसे कैसे करता?

• आप चाहे जैसे और जितना काम कर लें, संगठन के लिए आपका काम कभी भी पर्याप्त नहीं होता.
• पदनाम जितना लंबा और आकर्षक होगा उतना ही महत्वहीन कार्य होगा.
• मशीनें जो चलते चलते खराब हो जाती हैं, मेकेनिक के आने पर स्वयमेव ठीक हो जाती हैं.
• प्रगति तो हर दूसरे मंगलवार को ही मिल सकती है, और वह मंगलवार वर्तमान वाला कभी नहीं होता.

• जब किसी काम में गलती हो जाती है तो उसे ठीक करने में लगाए गए प्रयास उसे और ज्यादा गलत कर देते हैं.
• हर तरह की छुट्टी और अवकाश स्वयं को छोड़कर बाकी सबके लिए तमाम समस्याएँ पैदा करता है.
• सफलता भाग्य पर ही निर्भर है, किसी भी असफल से पूछ लें.
• किसी भी कार्य का मूल्य उसके लिए तय किए गए समय सीमा (डेडलाइन) की अवधि के व्युत्क्रमानुपाती होता है.

मरफी के नियमों की अब तक प्रकाशित पूरी सूची यहाँ देखें :

मरफी के नियमों की सूची

4 blogger-facebook:

  1. इस मरफी को इतने सारे ब्रहृम सत्‍यों का पता कहां से चल गया ?

    HindiBlogs.com

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  2. "विविध (मिसलेनियस) खाते में तो सारे ब्रह्मांड का आंकड़ा घुसाया जा सकता है."

    -यह बात हम एकाउंटेन्टों से ज्यादा कौन समझ सकता है. बहुत सही नियम दिये जा रहे हैं.

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  3. नमस्ते रवि जी, न तो हमारा वाणिज्य से कोई लेना देना है और ना ही व्यापार से..लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ये सारे नियम आम जीवन मे भी लागू होते हैं..ये विशेष रूप से पसॅंद आये.
    //यदि आप अपना काम 24 घंटों में भी नहीं कर पाते हैं तो रात में भी काम करें.//
    //यदि आप पहली दफा में सफल नहीं होते हैं तो कम से कम एक बार फिर कोशिश करिए, फिर भले ही छोड़ दीजिए. मूर्ख बने रहने में कोई तुक नहीं.//
    //मां हमेशा कहती थी कि ऐसे कठिन दिन तो जीवन में आएंगे ही. परंतु उन्होंने यह नहीं बताया था कि इतने सारे आएंगे.//
    //कोई भी व्यक्ति कितना ही सारा काम कर सकता है बशर्ते वह कार्य उसे आबंटित न किया गया हो.//
    // सफलता भाग्य पर ही निर्भर है, किसी भी असफल से पूछ लें.//

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेनामी9:24 pm

    • अपनी स्थिति को विकल्प हीन न बनने दें. क्योंकि जब आपका कोई विकल्प नहीं होगा तो आपकी पदोन्नति भी नहीं होगी.

    मरफ़ी सचमुच रहस्यदर्शी हैं. इनके नियम पथप्रदर्शन करेंगे. पेशेवर होने की राह में इनका परिपालन महत्वपूर्ण और लाभकारी सिद्ध होगा. रवि भैया को लख लख बधाई.

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