गुरुवार, 7 सितंबर 2006

मरफ़ी के अध्ययन-अध्यापन नियम


(शिक्षक दिवस पर समर्पित - मरफ़ी के नियम को सत्य करता हुआ - दो दिन बाद!)

मरफ़ी के कुछ विद्यार्थीय - शिक्षकीय नियम...

• कक्षा में लगी घड़ी हमेशा गलत समय बताती है.
• स्कूल लगने का घंटा जल्दी बजता है, छुट्टी की घंटी देर से बजती है.
• स्कूल की घंटी दोपहर के खाने की छुट्टी के समय तीव्र गति से चलने लगती है.
• जब विद्यार्थी कमरे में होते हैं तभी महाविपदा आती है


• शिक्षकों के लिए हर मजेदार विषय विद्यार्थियों के लिए उबाऊ होता है.
• विद्यार्थियों द्वारा किसी विषय को समझे जाने की संभावना उस विषय की व्याख्या के लिए शिक्षक द्वारा लिए गए समय व किए गए श्रम के उलटे अनुपात में होती है.
• कक्षा की लंबाई (समय), उबाऊ शिक्षक व उबाऊ विषय के सीधे अनुपात में होती है.
• विद्यार्थी अच्छे परिणाम लाते हैं तो उन्हें प्रशंसा व पुरस्कार मिलते हैं. विद्यार्थी जब फेल होते हैं तो उन्हें उनके शिक्षक घटिया पढ़ाते हैं.
• स्कूल का सबसे शरारती बच्चा स्कूल के प्राचार्य का बेटा होता है.


• जिस दिन शिक्षक के स्कूल पहुँचने में देरी हो जाती है, उसकी मुलाकात गेट पर प्राचार्य से अवश्य होती है.
उपप्रमेय - जिस दिन विद्यार्थी देर से स्कूल पहुँचता है, उस दिन उपस्थिति पहले दर्ज कर ली जाती है.
• यदि शिक्षक स्कूल समय पर पहुँच जाता है और प्राचार्य से उसकी मुलाकात नहीं होती है तो फिर उसे संकाय समिति की मीटिंग में देर हो जाती है.
• किसी स्कूल में नए विद्यार्थी उन स्कूलों से आते हैं जहाँ पढ़ाई नहीं होती.
• अच्छे विद्यार्थी दूसरे स्कूलों में चले जाते हैं.
• अच्छे विद्यार्थी/अध्यापक दूसरे स्कूलों के होते हैं.


• जाँच परीक्षा के दिन पंद्रह प्रतिशत विद्यार्थी अति आवश्यक कारणों से अनुपस्थित होते हैं.
• यदि शिक्षक कला विषय पढ़ाता है तो प्राचार्य फ़िजिकल ट्रेनिंग संकाय का होता है और वह कला विषय से घोर नफरत करता है. और यदि शिक्षक फ़िजिकल ट्रेनिंग संकाय का होता है तो प्राचार्य भी उसी संकाय का होता है और उसके जमाने में वह अपने विद्यार्थियों को कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मैच जितवा चुका होता है.
• कोई परीक्षक जब कोई कॉपी जाँचना प्रारंभ करता है तो मरफ़ी के तमाम नियम प्रभावशील हो जाते है.
• पुस्तकालय के लिए वेइनर का नियम - यहाँ कोई समाधान नहीं मिलता है सिवाय क्रॉस रेफ़रेंस के!


• यदि आप किसी कक्षा में किसी विषय में प्रवेश पाना चाहते हैं तो अगर उसमें "क" विद्यार्थियों के लायक सीट होती है तो प्रवेश सूची में आपका क्रमांक "क+1" होता है.
• कक्षा के समय की रूपरेखा इस तरह बनाई जाती है कि उससे प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकतम समय बरबाद होता है.
• उप-प्रमेय - दो कक्षा के समय की रूपरेखा अगर बढ़िया बन पड़ती है तो वे कक्षाएँ परिसर के विपरीत कोने में एक के बाद एक लगातार लगती हैं.
• वांछित कोर्स के लिए प्राथमिक आवश्यकता वाला कोर्स वांछित कोर्स के पूरा होने के बाद के सेमेस्टर में पढ़ाया जाता है.
• जब आप परीक्षा के ठीक पहले अपने नोट्स पर एक निगाह मारते हैं तो जो अंश सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं, उनकी लिखावटें समझ में नहीं आतीं.


• किसी परीक्षा के लिए आप जितना ज्यादा पढ़ते हैं, आपको उतना ही सन्देह होता है कि उत्तर कौन सा, किस तरह लिखना है.
• मुख्य (फाइनल) परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों में से अस्सी प्रतिशत उस पुस्तक से आते हैं जिन्हें आपने नहीं पढ़ा तथा जिनके लैक्चर आपसे छूट चुके होते हैं.
• अंग्रेज़ी के अर्धवार्षिक परीक्षा के एक दिन पहले शरीरविज्ञान का शिक्षक आपको पचास पृष्ठों का एक प्रोजेक्ट रातों रात कर लाने का गृहकार्य देता है.
• उप-प्रमेय- प्रत्येक शिक्षक यह सोचता है कि विद्यार्थी के पास उसके द्वारा दिए गए गृहकार्य को करने के अलावा अन्य कोई कार्य नहीं होता है.

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• यदि आपको पुस्तक खोलकर परीक्षा देने को कहा जाता है तो आप पुस्तक लाना भूल जाते हैं.
• उप-प्रमेय - यदि आपको जांच परीक्षा कार्य घर से पूरा कर लाने को कहा जाता है तो आप यह भूल जाते हैं कि आप कहाँ रहते हैं.
• सेमेस्टर के अंत में आपको पता चलता है कि आपने किसी ऐसे कोर्स के लिए दाखिला लिया था जिसकी एक भी कक्षा में आपने हाजिरी नहीं दी या नहीं लगी या लगी तो शिक्षक छुट्टी पर रहे.
• मुख्य परीक्षा का प्रथम नियम : गणित के मुख्य परीक्षा के दौरान ही आपके साइंटिफ़िक कैल्कुलेटर की बैटरी खराब हो जाती है.
उप-प्रमेय - यदि आपके पास अतिरिक्त बैटरी होते हैं तो वे खराब निकलते हैं.


• अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा में आपका सबसे प्यारा दोस्त दूसरे कमरे में परीक्षा देता है तथा आपकी बगल की कुर्सी पर वह विद्यार्थी बैठता है जिससे आपको सबसे ज्यादा चिढ़ होती है.
• सीगर का नियम - जो कुछ भी कोष्ठकों में दिया गया होता है उसे अनदेखा किया जा सकता है.
• नताली का कैल्कुलस का नियम : कोई भी पाठ, परीक्षा के बाद ही समझ में आता है.
• सेइत का उच्च शिक्षा का नियम : उपाधि प्राप्त करने के लिए जो परीक्षा आप पास करना चाहते हैं, वह आपको अगले सेमेस्टर से पहले नहीं मिलती.
• टर्म पेपर का नियम - आपके प्रोजेक्ट या टर्म पेपर के लिए अति आवश्यक पुस्तक / पत्रिका / जर्नल के पृष्ठ लाइब्रेरी से अवश्य गायब मिलते हैं.


• उप-प्रमेय - यदि उपलब्ध भी होते हैं, तो वे कटे-फटे या अपठनीय होते हैं.
• डुग्गन का शोघ का नियम : - अत्यंत महत्वपूर्ण उद्धरण का स्रोत पता नहीं पड़ता.
• विद्यार्थियों के लिए रोमिंगर का नियम- किसी पाठ्यक्रम का शीर्षक जितना ही साधारण सा होगा, आप उससे उतना ही साधारण सीख पाएंगे.
• किसी पाठ्यक्रम का शीर्षक जितना ज्यादा विशिष्ट होगा, उसमें दाखिला लेने के लिए योग्यता विद्यार्थियों में उतनी ही कम होती है.
• हैनसेन का लाइब्रेरी का नियम - आपके पड़ोस की लाइब्रेरी में काम लायक कोई भी किताब कभी भी नहीं मिलती.


• लंदन का लाइब्रेरी का नियम - इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको कौन सी किताब चाहिए. वह हमेशा ही आलमारी के अ-पहुँचयोग्य सबसे निचले खंड में होता है.
• रोमिंगर का शिक्षकों के लिए नियम - किसी परीक्षा में बैठने के लिए यदि कक्षा में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाती है तो अनुपस्थितों की संख्या में इजाफ़ा हो जाता है. यदि किसी परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा में उपस्थिति वैकल्पिक होती है तो सारी कक्षा सारे समय मौजूद रहती है.
• गणित की कक्षा पर पेंजा का नियम - किसी पाठ के अति महत्वपूर्ण चरण पर दरवाजे पर कोई न कोई दस्तक दे देता है.

मरफ़ी के कुछ और नियम यहाँ पढ़ें

4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. पाठ्यक्रम के जिस कठिन हिस्से को आप यह सोच कर छोड देते है कि वो नही पूछा जायेगा. पहला अनिवार्य प्रश्न उसी हिस्से से आता है.

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  2. एक सवाल:ये नियम अध्यापिका पत्नी को पढ़ायें तथा बतायें कि वे कितने से सहमत हैं?
    एक सुझाव:यह बतायें कि मर्फी के नियम कौन बनाता है? क्या है यह मर्फी?

    उत्तर देंहटाएं
  3. रवि भाई , लगता है, आपके प्रिय मरफ़ी जी को कोई और काम नहीं था, कि जो सामने आया बना ड़ाला नियम,.....आपकी एक और पोस्ट भी पढ़ी थी, मरफ़ी के महिलाओं के लिए नियम.....भई सीधी सी बात है, suit करे तो नियम वरना वो तो सुना ही होगा... Promises and rules are made to be broken...
    -रेणू आहूजा.

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