मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

आपने अपना आधार कार्ड बनवाया क्या?

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नंदन नीलेकनी, मैं आपसे पूरी तरह निराश हूँ...

आखिर वही हुआ जिसकी न चाहते हुए भी मुझे प्रत्याशा थी.

कोई तीन साल पहले भारत में आधार कार्ड बनने की शुरूआत हुई. तब कहा गया कि यह गरीब का पहचान पत्र गरीबों का भाग्य बदल देगा. मगर बीच में यह राजनीति का शिकार होता दिखाई दिया जब बांग्लादेशी घुसपैठियों के भाग्य भी बदलने लगा. खैर, वह तो राजनीति की बात हुई. हम यहां तकनीकी समस्याओं की बात करेंगे.

जब नंदन नीलेकनी को आधार कार्ड तैयार करने के प्रकल्प का मुखिया चुना गया तो उनसे बड़ी उम्मीदें थीं. लगा था कि कंप्यूटरी चपलता से आनन-फानन में सालेक भर में सभी भारतीयों के हाथों में आधार कार्ड होगा.

मगर हम हमेशा की तरह, गलत थे.

मेरे शहर में भी आधार कार्ड बनने का काम पिछले दो वर्षों से चल रहा है. कभी गति पकड़ता है तो कभी बन्द हो जाता है. सितम्बर 2012 में एक ऐसे ही आधार कार्ड बनाने वाले केंद्र में मैं भी परिवार समेत चला गया. यह सोचकर कि सरकारी योजना है, इसमें हम सब को सहयोग करना ही चाहिए.

केंद्र में कोई भीड़-भाड़ नहीं थी. बमुश्किल पंद्रह बीस लोग थे. और तीन कंप्यूटर सिस्टम लगे थे जिसके जरिए फ़ोटो-पहचान और निवासी प्रमाण-पत्र के साथ साथ व्यक्ति के उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों के निशान की जानकारी दर्ज की जा रही थी, जिसके आधार पर आधार कार्ड बनना था.

 

इस कार्य में एक व्यक्ति के डेटा संग्रहण के लिेए बमुश्किल 5 से 10 मिनट का समय लगना चाहिए था, मगर पाया गया कि एक-एक व्यक्ति के लिए आधा से पौन घंटे का समय लग रहा था. जैसे तैसे यह काम पूरा हुआ, और हमें बताया गया कि 90 दिनों के भीतर आधार कार्ड मिल जाएगा. पर यह समय गुजर जाने के बाद भी अपना आधार कार्ड लापता है. तात्कालिक कोई आवश्यकता नहीं थी तो इस ओर ध्यान ही नहीं दिया.

कल हमारे मोहल्ले में आधार कार्ड बनाने वालों ने शिविर लगाया. चूंकि मुझे मेरा आधार कार्ड नहीं मिला था तो आधार कार्ड के साइट पर स्टेटस की दरियाफ्त की. स्टेटस से पता चला कि हम चार के परिवार में तीन के कार्ड तो तैयार हैं, जिसे भेजा जाने वाला है - जी हाँ, भेजा जाने वाला है. ये बात जुदा है कि कब भेजा जाएगा और कब मिलेगा. मेरे बारे में साइट पर बताया गया कि मेरा आधार कार्ड का डाटा अपलोड करते समय फेल हो गया और साइट पर ही मुझे सलाह दी गई कि फिर से रजिस्ट्रेशन करवाएं. टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर है कि अप्रैल 1 से पहले यदि आपने आधार कार्ड बनवाया हो और यदि आपको वो नहीं मिला हो तो आपको फिर से यह कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी!

 

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चूंकि मोहल्ले की बात थी तो हम भी पहुंच गए एक बार फिर से लाइन में. इस बार भी वही स्थिति. तीन कंप्यूटर सिस्टम लगाए गए थे 100 परिवार की कॉलोनी में आधार कार्ड बनाने के लिए. तय समय सुबह 11 बजे से मैं पहुँच गया. मेरा नंबर दूसरा था. मैं सोच रहा था कि बहुत हुआ तो 11.30 तक मेरा काम हो जाएगा. मगर मैं इस बार भी गलत था. और जब तक मेरी बारी आई, तीन बज चुके थे!

अब मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूँ कि क्या तकनीकी खराबियाँ / खामियाँ हैं और इसकी वजह से आधार कार्ड का यह काम आने वाले पांच वर्षों में भी पूरा नहीं होने वाला है -

मेरे पहले जो सज्जन थे उनका फोटो कंप्यूटर में संलग्न कैमरे से लिया जाना था. परंतु कैमरा फ़ोटो ही नहीं ले रहा था. दल के साथ आए तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि बैकग्राउण्ड में ज्यादा चमक है (पीछे की खिड़की के कारण) इसीलिए सॉफ़्टवेयर फोटो नहीं ले रहा है. तो सिस्टम नए सिरे से अरेंज करना पड़ा. फिर जब फ़ोटो खींच लिया गया तो उन सज्जन का फिंगर प्रिंट लेना था. उनका फिंगर प्रिंट लेने वाला डिवाइस फिंगर का प्रिंट ही नहीं ले रहा था. उन सज्जन को अपनी उंगलियाँ उस उपकरण पर दबाकर कोई दस-दस मिनट रखने पड़े. मुझे आश्चर्य हुआ तो मैंने ऑपरेटर से पूछा - ये इतना देर से प्रिंट क्यों लेता है? फिंगर प्रिंट तो एक क्षण में लिया जाना चाहिए. मेरे लैपटॉप में तो फिंगर प्रिंट से लॉगइन करने की सुविधा है. एक सेकंड में हो जाता है. पर उसने बड़ा विचित्र सा जवाब दिया - उम्र दराज लोगों का प्रिंट यह देर से लेता है. हम जैसे जवानों का प्रिंट यह एक मिनट में ले लेता है. बड़ी अजीब दलील थी यह.

खैर, फिंगर प्रिंट लेने के बाद आंखों के आइरिस के इमेज लेने की कोशिश हुई. तीन मर्तबा कोशिश हुई और डिवाइस फेल हो गया, तो दोबारा बूट किया गया और फिर चौथी कोशिश में यह सफल रहा. इस बीच लैपटॉप दोबारा बूट करने के कारण सारा सिलसिला फिर से दोहराना पड़ा. देखते हैं कि इस बार भी आधार कार्ड बन पाता है या नहीं!

 

और, अब तो आधार कार्ड का आधार ही खिसकता जा रहा है!

 

सवाल ये है कि आपने अपना आधार कार्ड बनवाया क्या?

14 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. "उम्र दराज लोगों का प्रिंट यह देर से लेता है. हम जैसे जवानों का प्रिंट यह एक मिनट में ले लेता है"
    हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

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  2. उपरोक्त प्रक्रिया से मैं भी गुज़री
    पर इत्तेफ़ाक से मेरा कार्ड मेरे ही
    फोटो सहित मुझे मिल गया
    सादर

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  3. चक्कर यह है कि सरकार ने तो कान्ट्रेक्ट दे दिया, पर वे इसकी निगरानी नहीं कर रहे हैं कि नई मशीनों का उपयोग हो रहा है या बाबा आदम के जमाने की मशीनों का या फ़िर सस्ती मशीनों का ।

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  4. कोई तीन सप्‍ताह पहले मैं भी इस प्रक्रिया से गुजर लिया हूँ। आपके मुकाबले मैं अधिक भाग्‍यशाली रहा कि मैं एक झटके में ही निपट गया और उतनी देर भी नहीं लगी जितनी कि आपको लगी।

    हॉं, मुझ से पहलेवाले असंख्‍य लोगों के अनुभवों से सीख ले ली है कि मैं अपने आधार कार्ड की प्रतीक्षा व्‍यग्रता से न करूँ। जब आना होगा, आ जाएगा। न आए और उससे पहले जरूरत पड जाए तो मौके के अनुसार 'एडजस्‍ट' करने की नेक सलाह मुझे मिल गई है।

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (13-02-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  6. लग रहा है कि आधार कार्ड का ही आधार खिसक रहा है।

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  7. 'मगर हम हमेशा की तरह, गलत थे.'
    यह सूत्र-वाक्य हर सरकारी काम-काज की पोल खोल देता है!

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  8. पता नहीं आधार कार्ड कब हर भारतीय के पहचान का आधार बनेगा

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    उत्तर
    1. बिल्कुल सही कह रहे है, आप अभी भी आधार कार्ड को कुछ सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे है,

      अभी कुछ दिनों पूर्व मैं अपने भाई का _______ बैंक में खाता खुलवाने के लिए गया था...
      मेरे भाई ने अड्रेस प्रूफ और फोटो प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड की फोटोकॉपी लगायी थी....
      बैंक वालो ने खाता खोलने से मना कर दिया... कहा की आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में हम नहीं मानते है, फिर मेरे भाई ने राशन कार्ड की कॉपी दी तो ही उन्होंने बैंक में खाता खोला...

      यह तो कुछ भी नहीं अभी कुछ दिन पूर्व मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया की वह अपना पेन कार्ड बनवाने UTI के ऑफिस गया था, वहा पर उसने पेन कार्ड के लिए एक फॉर्म भरा और फोटो पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड की फोटोकॉपी लगा दी... लेकिन जब वह फॉर्म जमा करवाने के लिए काउंटर पर गया तो काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने फॉर्म को वापिस लौटा दिया और कहा की आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में नहीं ले सकते है... तब मेरे दोस्त ने ड्राइविंग लाईसेंस की फोटो कॉपी दी तो उसने फॉर्म को जमा कर लिया....

      अब देखने वाली बात यह है की इस आधार को कई क्षेत्र पहचान पत्र के रूप में मानने को तैयार नहीं है...
      सरकार को चाहिए की सब जगह नोटिस भेज कर इसको पहचान पत्र के रूप में लागू करे नहीं अगर वह ऐसा नहीं कर सकती है तो इसे बनाना बंद करदे.....

      क्योंकि अभी भी कई क्षेत्रो में आधार कार्ड को पहचान के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे है उपर मैंने आपको उदाहरण भी दी है....

      हटाएं
  9. एक कोकिला से दूसरी कोकिला तक - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  10. अब तक तो नहीं...लेकिन इस रविवार फ़ार्म जमा करने का सोचा है .... :-)मतदाता परिचय-पत्र बनवाने का खराब अनुभव हो चुका है ..:-(

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  11. मेरे ख्याल से नन्दन नीलेकणि आधार कार्ड परियोजना के नहीं बल्कि अब रद्द कर दी गयी UID परियोजना के कर्ताधर्ता थे।

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  12. ईश्वर की कृपा से मेरा आधार कार्ड तो छप कर आ गया है। पर उसमें एक ओर लिखा है - आधार - आम आदमी का अधिकार। दूसरी ओर लिखा है - आधार पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। तीसरी जगह लिखा है - आधार देश भर में मान्य है। इन सबका अर्थ समझ में नहीं आया। जब नागरिकता है ही नहीं तो केवल देश भर में मान्य क्यों? दुनिया भर में क्यों नहीं? केवल पहचान का ही प्रमाण है, न।

    उत्तर देंहटाएं
  13. हर जगह गोलमाल.बनाने वाले ,कैमरा आदि अपने ढंग से काम कर रहे हैं - सब सरकारी हैं न !

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