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सोमवार, 21 अप्रैल 2014

पुस्तक समीक्षा – तकनीकी सुलझनें

समीक्षक – अरविंद कुमार

पंदरह अप्रैल 2014 को मैं ने एक किताब की पाँच प्रतियां ख़रीदीं. एक अपने लिए, चार बाँटने के लिए. यह किताब थी बालेंदु शर्मा दाधीच की तकनीकी सुलझनें.

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किताब के प्रकाशक हैं –
ईप्रकाशक.कॉंम, 504, पार्क रॉयल, जीएच-80, सैक्टर-56, गुड़गाँव 122011
क़ीमत है रु. 235.00.
ईमेल-
reach@eprakashak.com


हम सब कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं. कई बार उस की समस्याओँ से, उलझनोँ से जूझते हैं, पर उन्हेँ सुलझाना नहीँ जानते. यहां काम आती है यह किताब. ऐसे ऐसे सुझाव ऐसी आसान भाषा में बालेंदु ने दिए हैं कि मुझ जैसा अतकनीकी बंदा भी आत्मनिर्भर हो सकता है.
(बीस से साल से - 1993 से –कंप्यूटर पर अपना कोशों को द्विभाषी डाटा बनाते रहने के बावजूद, मैं किसी भी तकनीकी उलझन की सुलझन से अनजान हूं. अगर बेटा सुमीत आसपास हो तो समस्या सुलझाता ही देता है, और दूर हो तो मैँ उसे फ़ोन करता हूं और वहीं दूर से वह मेरे कंप्यूटर को अपने क़ब्ज़े में ले लेता है और मेरी मुश्किल रफ़ा कर देता है. - इस के भी कई प्रोग्राम मिलते हैं, जो उसे यह क्षमता प्रदान करते हैं. एक प्रोग्राम जो हम आजकल काम में लाते हैं, उस का नाम है – teamviewer.)
अब बालेंदु की किताब मेरे पास है. इस की मदद से मैं काफ़ी कुछ अपने आप कर पाऊंगा.
मैं उन्हें लगभग दस साल से जानता हूं. नई से नई तकनीक का ईजाद करते आ रहे हैं और उन की सहायता से देश विदेश में हिंदी के विकास में लगे हैं.
यही कारण है कि अमेरिका में हिंदी सिखाने वाले प्रोफ़ेसर डाक्टर सुरेंद्र गंभीर उन्हें विकास पुरुष कहते हैं. जब कि बालेंदु अपने आप को भाषायी पृष्ठभूमि जन्य प्रौद्योगिकीय वंचितता (technology deprivation due to linguistic background) और आंकिक विभाजन (digital divide) जैसी अन्यायपूर्ण स्थितियों के विरुद्ध अभियान के स्वयंसेवक के रूप में देखते हैं.
बालेंदु के बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है. उन के बारे काफ़ी कुछ जानकारी इस पोस्ट में आप बाद मेँ पढ़ पाएँगे. उन्हें स्वयं देखने और जानने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए--
https://www.youtube.com/watch?v=zKZZtLiRh8M <https://www.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fwww.youtube.com%2Fwatch%3Fv%3DzKZZtLiRh8M&h=2AQFH6kgf&enc=AZOqi_-DlMxLOcCSW58W9gELRgWiJcnbjBxkFDIgGLGut4dJPjg-FVNc6-6pa1XHK0h-C1TW7PNUzdwsx7_lWWgGuOiasZ-jAwTpOKi65r2dx6O5XwyIZas1p89Oj4lTlpVvJGoVFlDVF6E_cjbBoQzy&s=1>
बालेंदु का आपना वैब पोर्टल है प्रभासाक्षी डाट काम. उन्हों ने न केवल समाचार पत्र पत्रिकाओं में तकनीकी विषयों पर लिख कर सभी का ज्ञान बढ़ाया है, बल्कि साफ्टवेयर कंपनियों के एप्लीकेशंस के हिंदीकरण अभियानों (लोकलाइजेशन) में सक्रिय योगदान और केंद्र तथा राज्य सरकारों के तकनीकी विभागों और संस्थानों की योजनाओं-परियोजनाओं में भूमिका निभाई है.


हिंदी से जुड़े उनके प्रमुख अनुप्रयोग/तकनीकी कार्य इस तरह हैं:


हिंदी समाचार पोर्टल 'प्रभासाक्षी डॉट कॉम'
यूनिकोड हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम यूनिकोड प्रो'
हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (ड्युअल फॉरमैट) TTF-UNICODE
हिंदी वर्ड प्रोसेसर 'माध्यम' (अयूनिकोडित) Classic
मानक इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड आधारित यूनिकोड हिंदी टाइपिंग ट्यूटर 'स्पर्श'
हिंदी इंटरफ़ेस युक्त फाइल संपीड़न (ज़िप) साफ्टवेयर- 'हिंदीज़िप'
हिंदी यूनिकोड इनपुट युक्त चित्र संपादन साफ्टवेयर- 'छाया'
दोतरफा हिंदी फॉन्ट परिवर्तक 'सटीक'
विकृत यूनिकोड पाठ संशोधक (ऑनलाइन)
यूनिकोड पर जागरूकता के प्रसार हेतु वेबसाइट लोकलाइजेशनलैब्स.कॉम
हिंदी ईबुक प्रोत्साहन परियोजना 'ई-प्रकाशक.कॉम' की मेन्टरिंग
विंडोज एक्सपी लोकलाइजेशन तथा हेल्प परियोजना में योगदान.
माइक्रोसाफ्ट विज़ुअल स्टूडियो 2008 लोकलाइजेशन (क्लिप) में योगदान आदि

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