व्यंग्य जुगलबंदी - बापू की लखटकिया लंगोटी

व्यंग्य 15 लाख रुपए की बापू की लँगोटी (चित्र - 2009 में मो ब्लॉ नामक कंपनी ने गांधी कलम बाजार में उतारा था जिसकी कीमत 14 लाख रुपए थी उस समा...

व्यंग्य

15 लाख रुपए की बापू की लँगोटी

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(चित्र - 2009 में मो ब्लॉ नामक कंपनी ने गांधी कलम बाजार में उतारा था जिसकी कीमत 14 लाख रुपए थी उस समाचार की कतरन)

हमारी नामी कंपनी 'सो फ्लां' ने एक लिमिटेड एडीशन बापू लँगोटी बाजार में पेश किया है. लिमिटेड एडीशन की सिर्फ 3000 लँगोटियाँ तैयार की गई हैं. इन लँगोटियों की ढेरों ख़ासियतें हैं जो इन्हें व इनके खरीदारों और प्रयोगकर्ताओं को विशिष्ट बनाती हैं. पहली खासियत तो ये है कि इन्हें अति विशिष्ट किस्म के खद्दर से बनाया गया है. वही खद्दर, जो देश के नेताओं को आजादी के पहले और आजादी के बाद बहुत ही मुफीद बैठता आ रहा है अब तक. खद्दर के लिए कच्चा माल खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के वर्जिन जंगलों से आयातित किया गया है. इसकी रुई प्राकृतिक रूप से उगे पौधों से तैयार की गई है और पूर्णतः जैविक पैदावार है, न कि रासायनिक और कृत्रिम रूप से उगी. इसे खास तौर पर डिजाइन किए गए हीरा मोती माणिक्य मढ़े करघे की सहायता से हाथ से बुना गया है. लँगोटी का डिजाइन प्रसिद्ध फ्रेंच फ़ैशन डिजाइनर 'विव सेंट फोरें' द्वारा रीडिजाइन कर बनाया गया है.
इसके बॉर्डर में विशेष किस्म के प्लेटिनम अलॉय का प्रयोग किया गया है जिससे लँगोटी सुन्दर, आकर्षक तो दिखती ही है, इस्तेमाल में नर्म और मुलायम भी होती है. इसकी ड्यूरेबिलिटी के लिए विशेष ट्रीटमेंट दिया गया है जिससे कि इसका प्रयोग एक बार में लगातार पाँच साल तक एक ही कुर्सी पर बैठकर किया जा सकता है.


बापू लँगोटी की एक और महत्वपूर्ण खासियत ये है कि आप नेता हों या अफसर, बापू लँगोटी डालकर बेशक भ्रष्टाचार के नए-नए, विशाल कारनामे कर सकते हैं. आपके ऊपर कोई आँच नहीं आएगी. आपने जो बापू लँगोटी का कैमोफ्लॉज पहना हुआ होगा. बापू लँगोटी आपको हर किस्म के चुनाव में (पूरे भारत में इसकी गारंटी है) जितवाने में सहायक होगा. आप लँगोटी की आड़ में आप चाहे कितने मतदाता खुले आम खरीद सकते हैं – कोई चुनाव आयोग आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा – क्योंकि उसे तो आपकी बापू लँगोटी ही दिखाई देगी. बापू लँगोटी की ये भी खासियत है कि ये अपने मालिक के लिए अच्छे और मलाईदार पद वाली कुर्सियों की व्यवस्था खुद करेगा.
चूंकि बापू लँगोटी को लिमिटेड एडीशन के रूप में सीमित संख्या में जारी किया गया है, अतः इसके मालिक और प्रयोगकर्ता समाज में विशेष इज्जत और मान सम्मान के हकदार होंगे. वे समाज के एलीट क्लास और श्रेष्ठी वर्ग के लोग होंगे जो बापू लँगोटी को अफोर्ड कर सकेंगे. जाहिरा तौर पर ऐसे में चंद बड़े नेताओं, उद्योगपतियों और बड़े अफसरों के हाथ में ही बापू लँगोटी पहुँच पाएगी. और ऐसे में बापू लँगोटी धारकों को हर कहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में माना जाएगा और उनका स्वागत सत्कार किया जाता रहेगा.


इन लँगोटियों की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इन्हें सर्वसिद्धि यंत्र के रूप में प्रयोग में लिया जा सकता है. आपका काम कहीं रुक रहा हो, अड़ रहा हो, कहीं फंस रहा हो, बस एक अदद बापू लँगोटी की दरकार है आपको. एक अदद बापू लँगोटी सामने वाले अफसर/नेता/मंत्री को गिफ़्ट कर दें. बापू लँगोटी का असर चौबीस घंटे के भीतर होगा और आपका रुका हुआ काम बन जाएगा. वैसे भी बापू लँगोटी को खास इन्हीं कामों को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है.


इन लँगोटियों की वैसे तो और भी ढेरों खासियतें हैं जिन्हें गिनाया नहीं जा सकता और इन्हीं खासियतों के चलते लिमिटेड एडीशन बापू लँगोटी बाजार में जारी होते ही सोल्ड आउट हो गई और सुना है कि अब उसकी ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. एक शीर्ष के वित्तीय सलाहकार के मुताबिक इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी बापू लँगोटी पर निवेश करना एक समझदारी भरा निर्णय होगा. इसीलिए बापू लँगोटी चाहे जितनी खरीद सकें खरीद लें.
बापू लँगोटी के बाजार से उत्साहित हमारी कंपनी जल्द ही बापू लाठी, बापू घड़ी, बापू खड़ाऊँ, बापू धोती के लिमिटेड एडीशन जारी करने जा रही है. इनमें भी एक से बढ़कर एक खासियतें होंगी. अग्रिम बुकिंग चालू है. इससे पहले कि आप पीछे रह जाएँ, बापू को लपक लें. बापू की लँगोटी ही सही!


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व्यंज़ल

यहाँ कहीं दिखती नहीं लँगोटियाँ
क्या हमने पहनी भी हैं लँगोटियाँ


यथा राजा तथा प्रजा के तर्ज पर
लोगों ने कब से तज दी लँगोटियाँ


मेरे शहर की सूरत यूँ बदल गई
यहाँ सरे आम धुलती है लँगोटियाँ


वक्त ने सब उलट कर रख दिया
पैंट के ऊपर पहनते हैं लँगोटियाँ


अपने को छुपाने में लगा है रवि
पहन कर लँगोटियों पे लँगोटियाँ

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छींटे और बौछारें: व्यंग्य जुगलबंदी - बापू की लखटकिया लंगोटी
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