दीपावली पर आपके लिए कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ!

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दीपावली आता है और हमारे आपके लिए तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ले आता है. और मैं घर की रँगाई-पुताई से लेकर नए लिबास-जूतों या इसी तरह के दीगर ख...



दीपावली आता है और हमारे आपके लिए तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ले आता है. और मैं घर की रँगाई-पुताई से लेकर नए लिबास-जूतों या इसी तरह के दीगर खर्चों की बात नहीं कर रहा. मैं तो बधाईयों की बात कर रहा हूँ!
अब देखिए ना, अपना मेल बॉक्स दीपावली के सप्ताह भर पहले से जेनुइन क़िस्म के (कतई स्पैम नहीं!) ईमेलों से भरने लग जाता है. और नित्य कोई तीन-चार गुना ज्यादा ईमेल चला आता है इन दिनों. सबमें घुमा-फिरा कर एक ही बात कही जाती है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! लफ़्जों के खेल, चित्रों के अखाड़ों, मल्टीमीडिया ऑडियो-वीडियो संलग्नकों के सर्कसों - सबका सार यही होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ!

एक भारी मुसीबत और है. वो है अलादीन के जिन्न की तरह आपके आगे पीछे लगा हुआ आपका मोबाइल फोन. अभी पता नहीं किसने और किसलिए यह अजीब तुलनात्मक गिनती कर डाली कि भारत में जितने तो शौचालय नहीं हैं उससे कई गुना मोबाइल फ़ोन हैं – नंबर डायल करो और बात करने के लिए, सॉरी – बधाई देने के लिए जिन्न की तरह बंदा हाजिर! बहरहाल, बात बधाईयों की हो रही थी. तो आपका मोबाइल भी हर दूसरे मिनट कालर ट्यून बजा कर टां टूं करता है और इसका इनबॉक्स पीं पीं करते हुए हर घंटे फुल हो जाता है. यानी बधाईंयाँ सुनते भी रहें और दुबले पर दो आषाढ़ की तरह एक और अतिरिक्त झंझट कि एसएमएस पढ़ते रहें और खाली करते रहें नहीं तो यह हर एसएमएस पर अतिरिक्त रूप से आगाह करता है कि बक्सा खाली करो! बक्सा खाली करो! – उलटी-सीधी किस्म की भाषाओं, बोलियों और मल्टीमीडिया युक्त इन एसएमएसों का अंततः यही संदेश होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयां!

समस्या यहीं समाप्त नहीं होती कि आपको बधाईयाँ मिलती हैं. आप तो गर्व कर सकते हैं कि आपको संसार में सबसे ज्यादा दीपावली की बधाईयाँ मिल रही हैं. असल समस्या आगे होती है. अब आपको भी हर एक को प्रत्युत्तर में धन्यवाद देना होगा, बदले में हार्दिक बधाईयाँ टिकाने ही होंगे अन्यथा क्या पता अगला बुरा मान जाए. भई, मुझे तो लगता है, पर, प्रत्याशित-अप्रत्याशित बधाईयों का प्रत्युत्तर देना मुसीबत से कम अगर किसी को लगता हो तो वो व्यक्ति सचमुच वंदनीय है.

इधर ट्विटरियों और फेसबुकियों की हालत तो और खराब है. आप फ़ेसबुकिये हैं तो आपकी वाल पे आपके पूरे पाँच हजार मित्रों, उनके मित्रों, उनके मित्रों के मित्रों के बधाई संदेश कोई सप्ताह भर पहले से चिपकने चालू हो जाते हैं तो सिलसिला छोटी-दीपावली के आगे दो सप्ताह तक भी थमता नजर नहीं आता. अब सवाल ये है कि इतनी सारी बधाईयाँ आदमी ले के कहाँ जाए, और यदि वो प्रत्युत्तर में हरेक के वाल पर अपनी बधाईयाँ व धन्यवाद चिपकाने लगे तो इसमें लगने वाले समय की गिनती के लिए स्टीफ़न हाकिंग को हायर करना पड़े!
इसीलिए सोचता हूँ कि प्रत्येक बधाई संदेशों के अलग-अलग प्रत्युत्तर देने (व मेरे अपने कोटे के, आप सभी पाठकों को मेरे प्रत्यक्ष बधाई संदेशों को देने) के बजाए अपने इस लेख के माध्यम से कुछ अ-हार्दिक क़िस्म की अ-बधाईयाँ (कु-बधाईयाँ नहीं,) आपको दे देता हूँ. वैसे भी, इस क़िस्म के अ-हार्दिक, अ-बधाईयों की दरकार आजकल हर किसी को है. अब यह आप पर निर्भर है कि आप इसे स्वीकारते हैं या नहीं. अलबत्ता आपकी इसी किस्म की अहार्दिक अबधाईयों को मैं तहे दिल से स्वीकार करूंगा. तो पेश है आपके लिए मेरी तरफ से कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ –

•    दीपावली पर आपके क्षेत्र-शहर का ट्रांसफ़ॉर्मर का फ़्यूज उड़ जाए/ जनरेशन बैठ जाए और इस कारण बिजली गुल हो जाए ताकि सजावट के लिए लगाए गए हजारों-लाखों झालरों में बिजली का अपव्यय न हो (और, यदि कंटिया नहीं लगी हो तो आपका बिल भी कम आवे,) और नतीजतन, कुछ ग्लोबल वार्मिंग कम हो, पर्यावरण को थोड़ा कम नुकसान हो, मानवता का भला हो.

•    दीपावली पर ईश्वर करे कि पटाखों पर पेट्रोल व सातवें एलपीजी सिलेंडर की तरह महंगाई की मार कुछ यूँ हो कि आप उन्हें खरीद न सकें, सिर्फ प्रतीकात्मक ही इक्का दुक्का फ़ोड़ सकें – ताकि आपके कानों की सुरक्षा हो और आपके पास-पड़ोस के पर्यावरण का संरक्षण हो.

•    आपके लिए ईश्वर से कामना है कि दीपावली (या ऐसे ही वार-त्यौहारों पर) में सप्ताह भर के लिए इंटरनेट, मोबाइल, टेलीफोन के नेटवर्क जाम हो जाएँ, बैठ जाएँ ताकि आप प्रत्यक्ष रूप आ-जाकर एक दूसरे के गले लगकर बधाईयों का आदान प्रदान कर सकें.

तो, आपके लिए ये थीं मेरी कुछ अहार्दिक, अबधाईयाँ. मेरे लिए आपकी भी ऐसी ही कुछ होंगी. ऐसी तमाम अहार्दिक, अबधाईयों का हार्दिक स्वागत है.

  
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छींटे और बौछारें: दीपावली पर आपके लिए कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ!
दीपावली पर आपके लिए कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ!
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