स्टीफ़न हाकिंस ने अपनी अंतिम किताब में कहा है कि ईश्वर नहीं है. शायद ईश्वर नहीं ही है, और शायद इसीलिये हमारी दुनिया बड़ी बेतरतीब है. मगर, ईश...
![दरà¥à¤¦ दिल का: जीवन से अदà¥à¤à¥à¤¤ पà¥à¤°à¥‡à¤® की असल कहानी (Hindi Edition) by [रतलामी, रवि]](https://images-eu.ssl-images-amazon.com/images/I/51jkbY2503L.jpg)
स्टीफ़न हाकिंस ने अपनी अंतिम किताब में कहा है कि ईश्वर नहीं है. शायद ईश्वर नहीं ही है, और शायद इसीलिये हमारी दुनिया बड़ी बेतरतीब है. मगर, ईश्वर, अगर कहीं सचमुच है, तो वो बहुत ही अनाड़ी है. उसने अपने बंदों को बनाने में घोर अनाड़ी पन दिखाया है. कम से कम मेरे मामले में तो. जब ईश्वर ने मुझे बनाया तो उसने बाकी सबकुछ तो सही बनाया, बस मेरे दिल को बनाने में उससे भूल हो गई. मेरे दिल को बनाते समय उसे झपकी लग गई शायद और उसने कुछ का कुछ कर दिया. कहीं का ईंट और कहीं का रोड़ा लगा दिया. मेरे दिल को सामान्य तौर पर छाती में बाईं ओर लगाने की जगह दाईँ ओर लगा दिया और इस गड़बड़ी में नसें भी इधर की उधर लगा दीं. डॉक्टर लोग कहते हैं कि लाखों व्यक्तियों में से एक में ऐसा हो जाता है. तो मैं भी अपने आप को, विशिष्ट, लाखों में एक मान लूं?
बात यहीं तक होती तो भी ठीक था, ईश्वर ने और भी गलतियाँ कर दीं. मेरे दिल के बनने में दो बड़े से छेद भी रह गए. दिल के पास थायमस ग्रंथि भी नहीं बनाया! वो महत्वपूर्ण ग्रंथि जो मनुष्य के शरीर में इम्यून सिस्टम को बनाए रखने में अच्छा खासा दखल रखती है. और, इसीलिए मुझे सर्दी-खांसी भी बारंबार होती रही है और वो भी गंभीर किस्म की – क्योंकि थायमस ग्रंथि के अभाव में मेरा इम्यून तंत्र पूरी तरह काम नहीं कर पाता है. पूरा इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट आगे है जिसे पढ़कर आप भी चकरा जाएंगे और कह उठेंगे – यह क्या मिरेकल है! ठीक यही बात कार्डियोलाजिस्ट डॉ. कार्थिगेशन ने कही थी जब हाल ही में मेरा केस उनके सामने आया था – यू आर अ मिरेकल मैन उनके मुंह से बेसाख्ता निकल गया था. इतनी सारी गड़बड़ियों के बाद भी आप अभी भी सामने खड़े हैं – यह तो मिरेकल है
समस्त विरोधों के बावजूद जीवन जीने वाले व्यक्ति की जीवन से प्रेम की अद्भुत, असल कहानी.
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