व्यंग्य जुगलबंदी 27 : आपने कभी गरमी खाई है?

SHARE:

  (कार्टून - साभार काजल कुमार )   गरमी अभी ठीक से आई नहीं है, और लोगों को गरमी चढ़ रही है. एक नेता इतनी गरमी खा बैठे कि सीधे हवाई जहाज से ...

  image

(कार्टून - साभार काजल कुमार )

 

गरमी अभी ठीक से आई नहीं है, और लोगों को गरमी चढ़ रही है. एक नेता इतनी गरमी खा बैठे कि सीधे हवाई जहाज से गिरे और ट्रेन में अटके. एक रोस्टिया कॉमेडियन सफलता की गरमी से इतने स्व-रोस्ट हुए कि उनके इनकम टैक्स में करोड़ों की कमी होने का अंदेशा है.

गरमी केवल लोग नहीं खाते. अपने आसपास की तमाम चीजों, उपकरणों पर गरमी चढ़ जाती है. पिछले साल सेमसुंग गैलेक्सी नोट 7 को अपने नए-पन की इतनी गर्मी चढ़ी कि वो जहाँ तहाँ ही फटने ही लगी. पंखे में लगे कैपेसिटर का इलेक्ट्रोलाइट गरमी खाकर सूख जाता है तो पंखा मरियल चाल चलने लग जाता है. आपके कंप्यूटिंग उपकरणों में लगे इलेक्ट्रानिक कलपुर्जे गरमी खा जाते हैं तो वे उपकरण को बेकार कर देते हैं और फिर उन्हें रिपेयर या रीप्लेस करना पड़ता है. वाहन का इंजन गरमी खाकर ब्लॉक हो जाता है तो टायर गरमी खाकर बर्स्ट हो जाता है.

[ads-post]

साहित्यकारों, खासकर व्यंग्यकारों में गरमी खाने की अच्छी खासी परंपरा रही है. वैसे भी, बिना गरमी खाए कोई सरोकारी, चर्चित, लोकप्रिय, पसंदीदा आदि-आदि किस्म का व्यंग्यकार नहीं बना जा सकता. बिना गरमी खाए, कहीं से, किसी कोने से, किसी भी तरतीब से व्यंग्य निकल ही नहीं सकता. कुंजीपट से (हें, आजकल कोई कलम-दवात से लिखता भी है क्या?) सही, मारक व्यंग्य टाइप करने के लिए गरमी खाना जरूरी है. गरमी कहाँ से, किधर से, किस विषय पर खाएँ यह एक बड़ी समस्या है. वैसे आजकल लोग टुंडे के कबाब खाने-नहीं-खाने के नाम पर गरमी खा रहे हैं, और अच्छी खासी खा रहे हैं, और उनमें साहित्यकारों की भी अच्छी खासी संख्या है.  हर एक साहित्यकार हर दूसरे साहित्यकार पर इसलिए गरमी खाता है कि सामने वाला लिखता तो कूड़ा है, पर हर कहीं छपता है, प्रशंसित होता है. लेखन में पठनीयता, सरोकार, मौलिकता तो घेले भर की नहीं, मगर मजमा जमाए फिरता है. और, जो बचे खुचे साहित्यकार सार्वजनिक गरमी नहीं दिखाते हैं वे ठीक इसी किस्म की अंदरूनी गरमी से त्रस्त रहते हैं.

गरमी खाकर रिश्ते परिपक्व होते हैं तो टूटते-फूटते भी हैं. तीन तलाक का मामला चहुँओर गरमी खा खिला रहा है, इतना कि स्थापित राजकुमारों की कुर्सियाँ तक हिल गईं और नए योगी सत्तानशीं हो गए. रोमियो जूलियट के रिश्तों में भारतीय संस्कृति के तथाकथित रक्षक भाले त्रिशूल लेकर और पुलिसिये डंडे लेकर गर्मी पैदा करने की कोशिशों में आदि काल से लगे हैं तो भारतीय जनमानस के जातीय और सामाजिक रिश्तों में जातीय गणित के समीकरण बिठाने वाले नेता. मंदिर मस्जिद का मसला लेकर तो लोग जब तब गरमी खाने लगते हैं.

जिस तरह से कार्बन-पुनर्चक्रण होता है, ठीक उसी तरह से गरमी खाने का पुनर्चक्रण होता है. उदाहरण के लिए, पसंदीदा ठेकेदार को टेंडर नहीं मिलने से गरमी खाकर नेता अफ़सर को ठांसता है, तो अफ़सर कुछ गरमी अपने मातहत पर निकाल देता है. मातहत घर जाकर वह गरमी अपनी पत्नी पर निकालता है तो पत्नी या तो अधिक नमक की पतली बेस्वाद दाल बना कर गरमी निकालती है या फिर बच्चे को होमवर्क करने के बाद भी टीवी नहीं देखने देती और बच्चा हुक्मउदूली कर गरमी निकालता है. यह गरमी भुगतकर मातहत दूसरे दिन कार्यालय में आकस्मिक अवकाश का आवेदन भेज देता है, अफ़सर, नेता के गोटी बिठाए टेंडर पर कोई नेगेटिव टीप ठोंक मारता है और इससे आहत नेता फिर किसी दूसरे अफ़सर या विरोधी पार्टी के नेता पर गर्मी उतारता है अथवा अपने ट्रांसफर पोस्टिंग के रेट बढ़ा देता है. यह चक्र अक्षुण्ण होता है, और सेल्फ प्रोपेल्ड होता है, और इसे किसी बाहरी ऊर्जा की जरूरत नहीं होती है.

मामला कुछ ज्यादा ही गरमाने लगा है? इससे पहले कि आप यह पढ़ते पढ़ते गरमी खा जाएँ और आइंदा इन पंक्तियों के लेखक को हमेशा के लिए पढ़ने से मना कर दें, किस्सा यहीं तमाम करते हैं. मगर, फिर, इतनी गरमी आपको किन्हीं और दूसरे लेखकों में से किसी से कभी मिली भी है भला?

COMMENTS

BLOGGER: 5
  1. यह चक्र अक्षुण्ण होता है, और सेल्फ प्रोपेल्ड होता है, और इसे किसी बाहरी ऊर्जा की जरूरत नहीं होती है.....वाह!! गजब!!

    आप फेसबुक में टैग नही हो पाते..क्या वजह है?

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. फ़ेसबुक की शैतानियों से ऊबकर मैंने अपना फ़ेसबुक खाता व्यक्तिगत से बदल कर पेज बना दिया, तब से टैगादि हो नहीं पाता है. केवल पसंद और फालो का विकल्प है :(
      अलबत्ता "उल्लेख" कर सकते हैं! (जैसे अनूप शुक्ल करते हैं)

      हटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (28-03-2017) को

    "राम-रहमान के लिए तो छोड़ दो मंदिर-मस्जिद" (चर्चा अंक-2611)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (28-03-2017) को

    "राम-रहमान के लिए तो छोड़ दो मंदिर-मस्जिद" (चर्चा अंक-2611)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खूब रही ....यानी सब अपनी हैसियत के हिसाब से अपनी-अपनी गर्मी निकालने में महारथी बन ही जाते हैं

    जवाब देंहटाएं
आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

नाम

तकनीकी ,1,अनूप शुक्ल,1,आलेख,6,आसपास की कहानियाँ,127,एलो,1,ऐलो,1,कहानी,1,गूगल,1,गूगल एल्लो,1,चोरी,4,छींटे और बौछारें,146,छींटें और बौछारें,340,जियो सिम,1,जुगलबंदी,49,तकनीक,52,तकनीकी,701,फ़िशिंग,1,मंजीत ठाकुर,1,मोबाइल,1,रिलायंस जियो,2,रेंसमवेयर,1,विंडोज रेस्क्यू,1,विविध,380,व्यंग्य,513,संस्मरण,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,स्पैम,10,स्प्लॉग,2,हास्य,2,हिंदी,2,हिन्दी,508,hindi,1,
ltr
item
छींटे और बौछारें: व्यंग्य जुगलबंदी 27 : आपने कभी गरमी खाई है?
व्यंग्य जुगलबंदी 27 : आपने कभी गरमी खाई है?
https://lh3.googleusercontent.com/-QI_W6Awb3Ys/WNe7hcQppGI/AAAAAAAA3ng/__CIhKkizpI/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-QI_W6Awb3Ys/WNe7hcQppGI/AAAAAAAA3ng/__CIhKkizpI/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
छींटे और बौछारें
https://raviratlami.blogspot.com/2017/03/blog-post_26.html
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/2017/03/blog-post_26.html
true
7370482
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content