व्यंग्य जुगलबंदी : मेरी तेरी उसकी दीवाली

SHARE:

मेरी तेरी उसकी दीवाली औरों की तरह इस बार मैं भी, स्वतःस्फूर्त, भरा बैठा था. जम के दीपावली मनाऊँगा. पर, पूरी तरह देसी, राष्ट्रीय किस्म की...

मेरी तेरी उसकी दीवाली

औरों की तरह इस बार मैं भी, स्वतःस्फूर्त, भरा बैठा था. जम के दीपावली मनाऊँगा. पर, पूरी तरह देसी, राष्ट्रीय किस्म की, पर्यावरण-प्रिय दीपावली.

महीने भर पहले से ही तमाम सोशल-प्रिंट-दृश्य-श्रव्य मीडिया में मैंने विविध रूप रंग धर कर चीनी माल, खासकर चीनी दियों, चीनी लड़ियों, और चीनी पटाखों का बहिष्कार कर शानदार देसी दीवाली मनाने का आग्रह-पूर्वग्रह, अनुरोध-चेतावनी सबकुछ देता रहा था. चहुँ ओर से आ रहे ऐसे संदेशों को आगे रह कर फारवर्ड पे फारवर्ड मार कर, और जरूरत पड़ने पर नया रंग रोगन लगा कर फिर से फारवर्ड मार कर यह सुनिश्चित करता रहा कि कोई ऐसा कोई संदेश व्यर्थ, अपठित, अफारवर्डित न जाए.

मेरे आग्रह-पूर्वग्रह, अनुरोध-चेतावनी में पर्यावरण-प्रेम भी सम्मिलित था, जिसमें आतिशबाज़ी, पटाखों से दूर रहने और अनावश्यक रौशनी करने, बिजली की लड़ियां लगा कर बिजली की कमी से जूझ रहे देश के सामने संकट को और बढ़ाने के कार्य से दूर रहने का आग्रह भी सम्मिलित था.

यही नहीं, मैंने तो अपने मुहल्ले में और अपनी सोसाइटी में भी पूरा दम लगा दिया था कि इस बार की दीपावली पूरी तरह देसी, राष्ट्रीय और पर्यावरण प्रिय मनाई जाएगी. इसके लिए हमने एक घोषणापत्र भी छपवाया था और बाकायदा हस्ताक्षर अभियान चलाकर उस पर अपने स्टाइलिश हस्ताक्षर भी किए थे.

पिछले पखवाड़े भर से सोशल मीडिया में चहुँओर से आ-जा रहे तमाम संदेशों, स्टेटसों से यह लग रहा था कि अपना यह प्रयास, यह अभियान बेहद सफल रहा है और इस बार की दीपावली बड़ी अच्छी, राष्ट्र प्रिय, शांति प्रिय, पर्यावरण प्रिय रहेगी और एक मिसाल के रूप में मनाई जाएगी.

दीपावली की शाम आ चुकी थी, और सोशल मीडिया स्टेटस अपडेट, ट्वटिर ट्वीट आदि पर परिपूर्ण शांति छाई थी जो यह इंगित कर रही थी कि इस दफा दीपावली सचमुच अलग किस्म की, राष्ट्रीय, पर्यावरण प्रिय होने वाली है. मन में एक अजीब किस्म की खुशी और गर्व का अहसास हो रहा था.

मोहल्ले में भी कहीं कोई धूम-धड़ाका नहीं हो रहा था जो यह इंगित कर रहा था कि जनता सचमुच जागृत हो गई है और पर्यावरण के प्रति उसका प्रेम, उसकी चिंता जाग चुकी है और वो समाज और प्रकृति को संरक्षित करने की ओर अपना कदम बढ़ा चुका है. बच्चे-बच्चे में जागृति छा चुकी है.

सूरज डूब रहा था, थोड़ा अँधेरा हो रहा था और आसमान में रौशनी भी आम दिनों की तरह ही नजर आ रही थी, उजाला ज्यादा नहीं हो रहा था इसका अर्थ था कि जनता चीनी लड़ियों से मुक्त हो चुकी है और राष्ट्रीय संपत्ति, महंगी बिजली बचाने की खातिर अपने घर को रौशन करने के बजाए अपने मन-मंदिर को रौशन करने के लिए प्रतिबद्ध हो चुकी है. एक शिक्षित, समृद्ध राष्ट्र की ओर हम आज बढ़ चुके थे. विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनने से बस हम चंद कदम ही दूर थे. यूँ भी जनसंख्या के लिहाज से तो यह कदम और भी कम है. बहरहाल.

अचानक कहीं पड़ोस में एक पिद्दी सा फटाका फूटा. सोचा, इतना तो चलेगा. शायद पिछले साल का बचा खुचा पटाखा होगा, किसी ने चला लिया होगा. उधर थोड़ा अँधेरा और बढ़ा तो दूर रौशनी की कतारें थोड़ी दिखने लगी थीं. सोचा, किसी अज्ञानी ने, किसी प्रकृति-अप्रेमी ने बिजली की लड़ लगा ली होगी, और लगाई होगी भी तो देसी – चीनी नहीं.

इधर सोशल मीडिया में भी यही हाल था. मामला बेहद ही शालीन. बहुत ही अच्छा लग रहा था. बस, पटाखे फ़ोड़ने के, दिए जलाने के और बिजली की लड़ियाँ लगाने के, कहीं कहीं इक्का-दुक्का अपडेट आने लगे थे – इन बेशर्मों ने सचमुच देश का कबाड़ा किया हुआ है. न इन्हें राष्ट्र की चिंता है और न ही पर्यावरण की.

पर, ये क्या! आधा घंटा बीतते न बीतते माहौल गरमाने लगा. दीपावली के स्टेटसों की बाढ़ आ गई. कोई फुलझड़ी के चित्र लगा रहा था तो कोई रॉकेट के तो कोई रौशनी के. मुहल्ले में इक्का दुक्का चलने वाले पटाखे अब आगे बढ़कर सौ और हजार, पाँच हजार लड़ियों वाले लगातार दस-बीस मिनट चलने वाले पटाखों के रूप में तबदील हो चुके थे. इधर सूरज पूरी तरह डूब चुका था और पूरा मुहल्ला, पूरा शहर, पूरा देश जगमग रौशनी में नहाया हुआ था. चहुँ और तेज, और तेज आवाजों वाले पटाखे चल रहे थे. जहाँ रॉकेट ऊपर आसमान में जाकर रौशनी कर रहे थे आवाज कर फूट रहे थे, वहाँ नीचे अनार और चकरी जुगलबंदी से समां बाँध रहे थे. देश के हर शहर हर गांव के हर घर में बिजली की लड़ से रौशनी हो रही थी – गोया बिजली इस बार मुफ़्त थी और बिजली के लड़ चीन से मुफ़्त में मिल गए थे.

और, बचा हुआ तो केवल मैं और केवला मेरा ही घर था. परंतु मैं क्या कोई कच्चा खिलाड़ी था? बिलकुल नहीं. मैंने भी स्विच ऑन कर दिया. और मेरा घर भी रौशनी से जगमग कर उठा. पिछले वर्ष की सहेजी लड़ियों को मैंने पहले ही टाँग दिया था, और तीन-चार दर्जन चीनी लड़ियाँ और उठा लाया था. चीनी सामानों के बहिष्कार के कारण डर्ट-चीप दाम में मिल रही थीं. जस्ट इन केस, यू नो! सही समय पर बड़ी काम आ गई थीं वे. कुल मिलाकर मेरा घर पूरे मुहल्ले में, पूरे शहर में सर्वाधिक रौशनीयुक्त, सर्वाधिक प्रकाशित घर हो गया था.

साथ ही, मैंने अपना सीक्रेट भी बक्सा खोल ही लिया. क्लायंट दीपावली गिफ्ट कर गए थे, और उनका उपयोग नहीं करना वैसे भी उनका अनादर होता. अंदर एक से बढ़कर एक रौशनी वाले, आवाज वाले, स्टाइलिश चीनी पटाखे थे जिनकी बराबरी अपने इंडियन, शिवकाशी वाले पटाखे क्या खा-पी के करते! कसम से, इस बार तो मोहल्ले में अपनी पूरी धाक जम जाएगी. दो घंटे से कम का नजारा नहीं होगा, और वो भी पूरे धूम धड़ाके सहित!

तो ये थी हमारी दीवाली. आपकी अपनी दीपावली कैसी रही पार्टनर?

COMMENTS

नाम

तकनीकी ,1,अनूप शुक्ल,1,आलेख,6,आसपास की कहानियाँ,127,एलो,1,ऐलो,1,कहानी,1,गूगल,1,गूगल एल्लो,1,चोरी,4,छींटे और बौछारें,146,छींटें और बौछारें,340,जियो सिम,1,जुगलबंदी,49,तकनीक,52,तकनीकी,701,फ़िशिंग,1,मंजीत ठाकुर,1,मोबाइल,1,रिलायंस जियो,2,रेंसमवेयर,1,विंडोज रेस्क्यू,1,विविध,379,व्यंग्य,513,संस्मरण,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,स्पैम,10,स्प्लॉग,2,हास्य,2,हिंदी,2,हिन्दी,508,hindi,1,
ltr
item
छींटे और बौछारें: व्यंग्य जुगलबंदी : मेरी तेरी उसकी दीवाली
व्यंग्य जुगलबंदी : मेरी तेरी उसकी दीवाली
https://lh3.googleusercontent.com/-jYvkrY7C-qc/WBMyKKHeGVI/AAAAAAAAwwQ/fjBYL65SZEs/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-jYvkrY7C-qc/WBMyKKHeGVI/AAAAAAAAwwQ/fjBYL65SZEs/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
छींटे और बौछारें
https://raviratlami.blogspot.com/2016/10/blog-post_62.html
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/2016/10/blog-post_62.html
true
7370482
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content