अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना...

SHARE:

अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना... क्या आपने अपनी मृत्योपरांत के लिए कोई वसीयतनामा कर लिया है? यदि हाँ, तो उसे बदलने के लिए, और यदि नहीं तो एक ल...

अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना...

क्या आपने अपनी मृत्योपरांत के लिए कोई वसीयतनामा कर लिया है? यदि हाँ, तो उसे बदलने के लिए, और यदि नहीं तो एक लिख डालने के लिए आपके सामने प्रस्तुत है एक उत्तम विचार.

उज्जैन के श्री महावीर प्रसाद लोहिया ने मृत्योपरांत का एक वसीयतनामा लिखा है, जो कई मामलों में अनुकरणीय है. उन्होंने अपने मृत देह का दान चिकित्सा महाविद्यालय को तो सौंपा ही है, कुरीतियों को भी सिरे से नकारा है.

vasiyat nama

कुछ प्रेरणा मुझे भी मिली है. और मैं अपना यह वसीयत नामा इंटरनेट पर, अपने ब्लॉग पर टांगता हूँ. इससे महफ़ूज जगह और क्या हो सकती है भला?

  1. मृत्यु पर कोई भी क्रियाकर्म, पिंडदान, ब्राह्मण-भोज, गरूड़पुराण पाठ, बारहवां, तेरहवां, पगड़ी आदि रूढ़िवादी रीतिरिवाज कतई नहीं किया जाए. मेरे मृत देह को चिकित्सा महाविद्यालय को दान में दे दिया जाए.
  2. पत्नी को विधवा नहीं माना जाए. (मैं सिर्फ शरीर छोड़ूंगा, पत्नी को नहीं. मेरी आत्मा पत्नी के इर्द-गिर्द सदैव भटकेगी,)
  3. बच्चों के सिर नहीं मुंडवाए जाएं. (इसी बहाने डैंड्रफ़ से छुटकारा पाना हो तो बात अलग है,)
  4. घर में अथवा कहीं भी बैठक नहीं की जाए. मातमपुर्सी करने किसी को भी घर नहीं आना है. (वैसे भी, लोग मातमपुर्सी करने जाते हैं तो बात अंततः लालू, क्रिकेट और बुश-ओसामा पर ही आ टिकती है,)
  5. कम से कम लोगों को सूचना दी जाए. (वैसे भी, जितनों को पता चलेगा, बोलेंगे – अच्छा हुआ साला चल बसा धरती पर भार था,)
  6. किसी तरह की शोक-सभा आयोजित न की जाए. (जिसने परसाईं लिखित शोक-सभा पर व्यंग्य पढ़ लिया हो, वो जिंदा या मुर्दा, कभी भी अपनी शोकसभा आयोजित नहीं करवाना चाहेगा,)

रतलाम दिनांक 26-11-07

हस्ताक्षर: रविशंकर श्रीवास्तव गवाह: रेखा श्रीवास्तव

(टीप- लाल रंग से लिखा पाठ टिप्पणी स्वरूप है, जो मेरे मूल वसीयत का भाग नहीं है.)

COMMENTS

BLOGGER: 12
  1. बिल्कुल अनोखी वसीयत…।
    ज्याद दर्शन है इसमें जिसे लोग समझते कहां हैं…।
    कुछ तो गहरी वास्तविकता है…जिससे हम लगातार भागते रहे हैं…।

    जवाब देंहटाएं
  2. रवि जी
    अब अनुभव हो रहा है कि मेरा बेटा अलग नहीं है...
    रवि जी और दिव्यभ जी , समय निकाल कर मेरी यह पोस्ट ज़रूर पढिएगा.

    http://meenakshi-meenu.blogspot.com/2007/11/blog-post_05.html

    जवाब देंहटाएं
  3. लोहिया जी की वसीयत तो अनुकरणीय ही है वाकई!!
    और आपने तो अद्भुत वसीयत लिख डाली है!!

    जवाब देंहटाएं
  4. वसीयत अच्छी है । मेरी भी बनी पड़ी है किन्तु इतनी नाटकीय नहीं । कारण यह है कि घर में कोई भी पूजा पाठ, ब्राह्मण भोग , यहाँ तक कि यदि बिजली का क्रिमेटोरिअम हो तो लकड़ी से जलाने में विश्वास नहीं करता । कुछ वर्ष पूर्व माँ के घर में एक मृत्यु हुई थी , तभी बिटिया ने पूछ लिया था कि क्या हमारे घर में भी ऐसा सब होगा। मैंने कहा था नहीं और हम सब ने यही निर्णय लिया था कि शरीर के अधिक से अधिक भाग किसी और के उपयोग में आ सकें तो अवश्य दिये जाएँ । यह सब और मेरी थोड़ी बहुत जो सम्पत्ति है उसके विषय में भी मैंने बता रखा है ।
    एक बात और , मैं भी रोने आदि में विश्वास नहीं करती थी । किन्तु जब अकाल मृत्यु आती है तो ये संस्कार आदि करने में मनुष्य इतना व्यस्त हो जाता है कि यंत्र की तरह दौड़ भाग करता रहता है । यदि यह सब ना हो तो शायद मनुष्य इस सदमे से उबर ही न पाए । पहले १३ दिन किस तरह दौड़ते भागते निकल गये पता ही नहीं चला ।
    घुघूती बासूती

    जवाब देंहटाएं
  5. बढ़िया है..
    बस मातमपुर्सी वाले बिन्दु पर पुनर्विचार कीजिये.. मृत्यु के समय परिवार को एक सामाजिकता की ज़रूरत होती है.. कोई बैठक न होने पर वे आप के अभाव को और अधिक तीव्रता से महसूस करेंगे.. उनका दुख बढ़ेगा..

    जवाब देंहटाएं
  6. कानपुर मालरोड पर करंट बुक डिपो के संचालक श्री खेतान ने वर्षों पहले ऐसी ही वसीयत की थी। मेरी जानकारी में वह पहली थी और आदर्श भी। अनेक लोगों ने उसका अनुसरण भी किया था। मैं उसे तलाश करने का प्रयत्न करता हूँ। इस की अनूप शुक्ल अधिक जानकारी दे सकते हैं।

    जवाब देंहटाएं
  7. कपया फ़जीहत से बचने के लिये वसीहत पूरी करे और बताये चल अचल संपत्ती का क्या किया...? हम तो इसी उम्मीद से यहा आये थे की चलो कुछ तो हमारे नाम भी कर छोड कर जा रहे होगे ..अगर आप उसमे से कुछ नही देने वाले तो हम तो वैसे ही नही आने वाले थे जी....:)
    सच मे शानदार वसीहत है जी इसी को मेरी भी मान लिया जाये

    जवाब देंहटाएं
  8. रवी जी,
    मैंने अपनी आखें बहुत साल पहले ही दान कर दी थी फिर कई साल पहले अपनी वसीयत लिखी है। जिसमें बहुत कुछ ऐसा ही है।
    शरीर मेडिकल कॉलेज को और जो पैसे खर्चा होते हैं वे अन्धों के स्कूल को दे दिये जांय। यह भी है कि न कोई शोक सभा न की जाय न कहीं काम की जगह बन्द की जाय।
    यदि मैं कॉमा में चला जाऊं या ऐसी दशा हो जाय कि अपनी बात न बता पाऊं तब मुझे हमेशा के लिये सुला दिया जाय। मैं ऐसे जिन्दगी नहीं जीना चाहता जिसमें दूसरों पर निर्भर रहूं।

    जवाब देंहटाएं
  9. बेनामी9:49 am

    टिप्पणी में लिखना ठीक नहीं, कई लोग ऐसे है जिन्होने कुछ कुछ ऐसा ही किया है.

    देह दान अनुकरणीय है.

    जवाब देंहटाएं
  10. जबरदस्त वसीयत की है आपने. किंतु कठिनाइयों से भरपूर. आप तो चले जायेंगे. पीछे वसीयत पुरी करने वालों को पापड़ बेलना पड़ जायेगा. सब अगड़म-बगड़म है.

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह रतलामी जी बहुत ही रोचक वसीयत है।

    जवाब देंहटाएं
  12. अपने ब्लॉग को किसके पास फेकोगे ? मैं भी और हिन्दी ब्लागरों के साथ कैच करने के लिए नीचे लेन में लग जाऊ

    जवाब देंहटाएं
आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

नाम

तकनीकी ,1,अनूप शुक्ल,1,आलेख,6,आसपास की कहानियाँ,127,एलो,1,ऐलो,1,कहानी,1,गूगल,1,गूगल एल्लो,1,चोरी,4,छींटे और बौछारें,148,छींटें और बौछारें,341,जियो सिम,1,जुगलबंदी,49,तकनीक,54,तकनीकी,707,फ़िशिंग,1,मंजीत ठाकुर,1,मोबाइल,1,रिलायंस जियो,2,रेंसमवेयर,1,विंडोज रेस्क्यू,1,विविध,382,व्यंग्य,515,संस्मरण,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,स्पैम,10,स्प्लॉग,2,हास्य,2,हिंदी,5,हिन्दी,510,hindi,1,
ltr
item
छींटे और बौछारें: अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना...
अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना...
http://lh6.google.com/raviratlami/R0rWKHeLtLI/AAAAAAAACJQ/v11jsX9SsZo/vasiyat%20nama_thumb%5B4%5D
http://lh6.google.com/raviratlami/R0rWKHeLtLI/AAAAAAAACJQ/v11jsX9SsZo/s72-c/vasiyat%20nama_thumb%5B4%5D
छींटे और बौछारें
https://raviratlami.blogspot.com/2007/11/blog-post_26.html
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/2007/11/blog-post_26.html
true
7370482
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content