नारद के आगे जहाँ और भी हैं

SHARE:

जी हाँ, नारद के आगे जहाँ और भी हैं... यूं मैंने तो अपनी बात अपरोक्ष और व्यंग्यात्मक लहज़े में पहले ही कह दी थी, परंतु जब ई-पंडित की ये...

जी हाँ, नारद के आगे जहाँ और भी हैं...

यूं मैंने तो अपनी बात अपरोक्ष और व्यंग्यात्मक लहज़े में पहले ही कह दी थी, परंतु जब ई-पंडित की ये भयंकर चेतावनी मिली -

"...नारद के इस कदम के प्रति अपना समर्थन (या विरोध) जाहिर करें। यदि आज भी उन्होंने ऐसा न किया तो यह बहुत बड़ा नैतिक अपराध होगा जैसा कि कहा भी गया है, "जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके अपराध"।..."

तो फिर से कुंजीपट को गंदा करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.

अब, पहली बात पहले.

कल ही मैं किसी एक वेब अनुप्रयोग में पंजीकृत हो रहा था तो उसमें सेवा-शर्तों में से एक यह भी था -

"...upload, post or otherwise transmit any content that is unlawful, harmful, threatening, abusive, harassing, tortious, defamatory, vulgar, obscene, libelous, invasive of another's privacy, hateful, or racially, ethnically or otherwise objectionable;... will be removed immediately and user will be banned..."

आपके गूगल ब्लॉगर खाते के ऊपर नेविगेशन बार में ये लिंक भी रहता है - रिपोर्ट एब्यूज. यह लिंक भी ऐसी ही सामग्री की रपट ब्लॉगर को देने के लिए ही होता है ताकि उचित कार्यवाही की जा सके. गूगल ने तो एक स्पैम चिट्ठा जिसने मेरे अंग्रेज़ी चिट्ठे की सामग्री को लेकर एडसेंस रेवेन्यू कमाने के लिए स्पैम ब्लॉग बनाया था - उसका एडसेंस खाता मेरे कहने पर ही प्रतिबंधित किया था. वर्डप्रेस पर आधारित वह चिट्ठा स्वयं के डोमेन पर था, अतः वर्डप्रेस वाले तो कुछ नहीं कर पाए, मगर डोमेन रजिस्ट्रार को रपट करने पर वह चिट्ठा इंटरनेट से ग़ायब हो गया. औरों के भी ऐसे कुछ अनुभव होगें ही. :)

श्रीश ने कई चिट्ठों पर अपनी टिप्पणियों के जरिए पहले ही कई मर्तबा तथा अपने इस पोस्ट में इस बार फिर से लिखा है - नारद पर पंजीकृत चिट्ठों में भाषा और सामग्री को लेकर न्यूनतम मानक हैं, और, नारद की सेवा शर्तों के अनुसार उन मानकों का पालन करना हर पंजीकृत चिट्ठे को अनिवार्य है अन्यथा उसे नारद से निकाल बाहर किया जाएगा.

क्या मैं नारद के इस प्रतिबंध वाले कदम का समर्थन करता हूँ?

जी हाँ.

हर संस्था को अपने नियम कायदे कानून पालन करवाने का हक है. हर पालक को अपने बच्चों को चपतियाने का हक है यदि वे गलती करते हैं और, दूसरी ओर, हर बच्चे को अपने पालक को उनकी गलती बताने का भी उतना ही हक है - यदि वे मानते हैं कि उनके पालक गलती पर हैं. तो, नारद ही क्या - नारद जैसी किसी भी संस्था को ऐसी सामग्री को हटाने का पूरा अधिकार है. डिग ने भी ऐसी सामग्री को हटा दिया था व उन उपयोक्ताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था. अब ये जुदा बात है कि हजारों लोगों के दबाव के आगे डिग को अपना वो कदम पीछे खींचना पडा था.

परंतु यह प्रतिबंध क्या फलदायी है?

नहीं.

चूंकि नारद का कार्य सिर्फ चिट्ठों की उपस्थिति बताना है और उसकी कड़ी देना है, अतः यह प्रतिबंध किसी काम का नहीं है. जब तक कि वह चिट्ठा इंटरनेट से उसके उपयोक्ता द्वारा खुद या वेब-सेवा प्रदाता द्वारा नहीं मिटा दिया जाता, उसका वजूद इंटरनेट पर रहेगा अतः ऐसे किसी भी प्रतिबंध के कोई मायने नहीं है. लोग-बाग़ ऐसी सामग्री के लिंक झपट्टा मारकर लेते-देते हैं और ऐसी सामग्री के पाठक नियमित पाठकों से दसियों गुना ज्यादा होते हैं.

नारद पर हो हल्ले के पीछे क्या कारण हैं?

दरअसल, एक नए चिट्ठे को, जिसमें सामग्री कम होती है, उसे पाठक प्रदान करने का कार्य नारद करता है. नारद के कारण चिट्ठों को पाठक, क्लिक और पेज-लोड मिलते हैं. परंतु आपका चिट्ठा जब सामग्री से भरपूर हो जाता है, तो नारद के जरिए आने वाले पाठकों की संख्या दूसरे जरिए - मसलन नियमित सब्सक्राइब किए व गूगल खोज इत्यादि के जरिए आने वाले पाठकों की संख्या से बहुत कम हो जाती है. और, यकीन मानिए, जिस दिन आपके चिट्ठे में एक हजार से ऊपर सार्थक सामग्री युक्त पोस्ट होगी तो आपको नारद की आवश्यकता ही नहीं होगी.

उदाहरण के लिए, रचनाकार का हालिया 500 पृष्ठ-लोड का स्टेटकाउंटर एनॉलिसिस देखें. इसमें आप पाएंगे कि 500 पृष्ठ लोड में से सिर्फ 14 नारद के जरिए आए हैं. रचनाकार पर आज की वर्तमान स्थिति में प्रतिदिन 200 के आसपास पृष्ठलोड हो रहे हैं. जाहिर है, यदि आपके चिट्ठे में सामग्री है, प्रासंगिक सामग्री है तो आपके चिट्ठे को नारद की उतनी आवश्यकता नहीं है. परंतु नए चिट्ठों को अनिवार्य रूप से नारद की आवश्यकता है. उन्हें अपना पाठक आधार बनाने में सामग्री जोड़ने में समय लगेगा. और, शायद इसीलिए नारद पर जब एक नए चिट्ठे को उसकी असंयत, अशिष्ट भाषा के कारण प्रतिबंधित किया गया तो तमाम तरफ़ से विरोध और विरोध के विरोध में सुर उठे.

इस बीच, एक अच्छी बात ये हुई कि उस तथाकथित अशिष्ट भाषा युक्त चिट्ठा-पोस्ट को उसके लेखक ने अपने चिट्ठास्थल से हटा दिया. और, संभवतः प्रतिबंध लगाने का यही उद्देश्य भी था. उम्मीद है, भविष्य में वह चिट्ठा नारद पर पुनः शामिल हो जाएगा. प्रतिबंध कहीं पर भी कोई जन्म-जन्मांतर के लिए नहीं लगाया जाता है.

यहाँ यह बताना भी समीचीन होगा कि जिस चिट्ठाप्रविष्टि को लेकर विवाद हुआ वह असग़र वजाहत की कहानी शाह आलम कैम्प की रूहें को लेकर हुई, जो कि वास्तव में दुखद है. वास्तव में शाह आलम कैम्प की रूहें नाम की कहानी में कोई दर्जन भर छोटे-छोटे वर्णन हैं, जिन्हें किसी चिट्ठे पर अलग-अलग कर शरातरपूर्ण ढंग से प्रकाशित किया गया, और एकांगी पठन-पाठन में निश्चित ही वे किसी खास वर्ग को अप्रिय लगेंगे. और उस चिट्ठा प्रविष्टि का शायद उद्देश्य भी यही था. शाह आलम कैम्प की रूहें रचनाकार में पहले ही प्रकाशित हो चुकी है. यह कहानी असगर वजाहत के कहानी संग्रह - मैं हिन्दू हूं की अंतिम व अत्यंत मार्मिक कहानी है. अकसर रचनाकार अपनी कहानी कह देते हैं और पाठक को ये सोचने के लिए छोड़ देते हैं कि वह क्या समझता है. पर इसके लिए पाठक को संपूर्ण कहानी, संपूर्ण रचना को पढ़ना जरूरी है. मात्र कुछ हिस्से पढ़ने पढ़वाने से पाठक भ्रमित हो जाता है. जैसा कि इस प्रकरण में हुआ था. साथ ही, रचनाकार - असग़र वजाहत ने आगे की भी बातें कहने की कोशिश की है यदि आप समझ सकें. शाह आलम का नाम दिल्ली के नानक गुरुद्वारे कैम्प या छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गांव के कैम्प का नाम के प्रतीक रूप में रख कर और पात्रों के नाम अपने स्थान-रूप-और-धर्म के नाम रख देखें. वे आपके ही मोहल्ले के, आपके साथ हुए हादसे की सच्ची कहानी होंगे. इसमें किसी खास वर्ग या समुदाय का उल्लेख तो बस इशारा मात्र है. यह कहानी हर समुदाय, हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है. प्रियंकर ने जब इस कहानी को अपने पूरे रूप में पढ़ा - तो उनका कहना है कि उनकी आंखों में आँसू आ गए. आपकी सुविधा के लिए इस कहानी को रचनाकार पर यहाँ पर अपने संपूर्ण रूप में पुनः प्रकाशित किया जा रहा है. वैसे, यह कहानी अपने संपूर्ण रूप में रचनाकार में इस संग्रह पर उपलब्ध है. जिस सलेक्टिव तरीके से इस रचना को आधे अधूरे रूप में शरारत पूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया, और प्रतिरोध स्वरूप अजगर ... नाम से घटिया लघुकथा पैरोडी पोस्ट की गई ये सब दुःखद और शर्मसार है. परंतु ये भी मान लें कि ऐसी घटनाएँ दिन ब दिन बढ़ेंगी हीं. दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ेंगी. चार समझदार होते हैं तो चालीस और चार सौ ना-समझ. आप हर किसी को समझाने का ठेका नहीं ले सकते. हिन्दी इंटरनेट पर नासमझों की अपनी अलग दुनिया होगी. ये बात जुदा है कि शुरूआती चर्चाओं के बाद इन्हें कोई नहीं - जी हाँ, कोई भी नहीं पूछेगा.

अब वापस अपने धंधे पर आते हैं. नारद अपने कलेवर, अपनी सुविधा के कारण खासा लोकप्रिय है. नारद से पहले देबाशीष का बनाया चिट्ठा-विश्व था - हिन्दी का पहला ब्लॉग एग्रीगेटर जो कि वर्तमान नारद से भी ज्यादा बेहतर, ज्यादा सुविधाओं युक्त था, बहुभाषी था, और अपने समय में वह नारद से ज्यादा लोकप्रिय था और रहता. परंतु चूंकि मुफ़्त की सुविधा पर होस्टेड था और सेवा-प्रदाता के बिजनेस मॉडल पर नहीं होने से वह वित्तीय कठिनाइयों से जूझता अपनी 500 - सर्वलेट एक्सेप्शन की बेमौत मौत मर रहा है. नारद की आरंभिक संरचना के समय मैंने साथियों को नारद के बिजनेस मॉडल की ओर इंगित भी किया था. :) और, साथी इसे स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना से लें - क्या यह चिट्ठा-विश्व को पुनर्जीवित करने का उचित समय नहीं है?

अभी बढ़िया काम कर रहे ब्लॉग एग्रीगेटरों में पीयूष प्रतीक का हिन्दीब्लॉग्स डॉट कॉम भी है, जिसे मैंने सब्सक्राइब किया हुआ है, और जिसमें किसी चिट्ठे पर कोई प्रतिबंध नहीं है - सेक्स-क्या जैसे चिट्ठों पर भी - क्योंकि ऐसा हिन्दीब्लॉग्स डॉट कॉम की सेवा शर्तों में शामिल ही नहीं है. हिन्दी चिट्ठे एवं पॉडकास्ट नाम का ब्लॉगर आधारित हस्तचालित एग्रीगेटर भी है - जिसमें भी प्रतिबंध इत्यादि की समस्या नहीं है. एक नया, स्वचालित चिट्ठा एकत्रक जाल पर उपलब्ध कुछ मुफ़्त वेब सेवाओं का इस्तेमाल कर बनाया गया है जिसका विस्तृत जिक्र यहाँ पर किया गया है - वह भी ठीक-ठाक ही काम कर रहा है - और उसमें ऐसी तकनीक है ही नहीं कि किसी चिट्ठे को प्रतिबंधित किया जा सके. कुछेक हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर - चिट्ठा एकत्रक बीच में उभरे थे, परंतु वे चूंकि वे दूसरी सेवाओं के साथ जुड़े थे अतः अधिक ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उतने प्रचलित नहीं हो पाए.

सार यह कि प्रतिबंध लगाने व हटाए जाने का जो अनावश्यक हो हल्ला तमाम ओर से किया जा रहा है वह ग़ैर जरूरी तो है ही, उसमें कोई दम नहीं है. नारद को हर चिट्ठे को जिसे वह अपने तईं आपत्तिजनक समझता है, प्रतिबंध का अधिकार है. उसकी अपनी सेवा शर्तें हैं. परंतु यह भी, कि नारद के प्रतिबंधित किए जाने से किसी चिट्ठे के स्वास्थ्य में कुछ असर पड़ेगा - तो यह भी बहुत बड़ी भ्रांति है. सिर्फ और सिर्फ उस विशिष्ट चिट्ठे के चिट्ठापाठकों की संख्या भर में कमी आएगी - या शायद नहीं आएगी - सेक्स क्या के स्टैट्स किसी ने देखे हैं क्या? वह भी तो नारद पर प्रतिबंधित है. और, यकीन मानिए, जनता प्रतिबंधित वस्तुओं के पीछे जरा ज्यादा ही दीवानी होती है!

Technorati tags: , , , , , , , , , , , ,

COMMENTS

नाम

तकनीकी ,1,अनूप शुक्ल,1,आलेख,6,आसपास की कहानियाँ,127,एलो,1,ऐलो,1,कहानी,1,गूगल,1,गूगल एल्लो,1,चोरी,4,छींटे और बौछारें,146,छींटें और बौछारें,340,जियो सिम,1,जुगलबंदी,49,तकनीक,52,तकनीकी,701,फ़िशिंग,1,मंजीत ठाकुर,1,मोबाइल,1,रिलायंस जियो,2,रेंसमवेयर,1,विंडोज रेस्क्यू,1,विविध,379,व्यंग्य,513,संस्मरण,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,स्पैम,10,स्प्लॉग,2,हास्य,2,हिंदी,2,हिन्दी,508,hindi,1,
ltr
item
छींटे और बौछारें: नारद के आगे जहाँ और भी हैं
नारद के आगे जहाँ और भी हैं
http://2.bp.blogspot.com/_t-eJZb6SGWU/RnOwUm92W_I/AAAAAAAAA9U/5IgngIdTsFM/s400/narad+se+aage+jahan+aur+bhi+hai.JPG
http://2.bp.blogspot.com/_t-eJZb6SGWU/RnOwUm92W_I/AAAAAAAAA9U/5IgngIdTsFM/s72-c/narad+se+aage+jahan+aur+bhi+hai.JPG
छींटे और बौछारें
https://raviratlami.blogspot.com/2007/06/there-is-life-beyond-narad.html
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/
https://raviratlami.blogspot.com/2007/06/there-is-life-beyond-narad.html
true
7370482
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content