बजट : मोहल्ले के धोबी की विलंबित प्रतिक्रिया...

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बजट पर त्वरित प्रतिक्रियाओं का दौर गरमाया हुआ था. हर कोई त्वरित प्रतिक्रिया लेने देने में लगा हुआ था. मगर हमारा ध्यान उस दूसरे मोहल्ले पर चल...

बजट पर त्वरित प्रतिक्रियाओं का दौर गरमाया हुआ था. हर कोई त्वरित प्रतिक्रिया लेने देने में लगा हुआ था. मगर हमारा ध्यान उस दूसरे मोहल्ले पर चल रही सांप्रदायिक चर्चाओं में उलझा हुआ था. ख़ैरियत यह रही चर्चाओं का रूख़ बदल दिया गया. हमने भी राहत की सांस ली और चले हमारे अपने मोहल्ले के धोबी से उसकी बजट संबंधी प्रतिक्रिया जानने. उसकी त्वरित प्रतिक्रिया थी- अभी तो हम बजट का अध्ययन कर रहा हूँ. अध्ययन करने के बाद ही प्रतिक्रिया-वतिक्रिया हो सकेगी. बारंबार प्रयास करने के बाद हॉट चैनल के वुई मेक द टॉक रीयल हॉट प्रोग्राम के लिए उनसे बजट पर प्रतिक्रियात्मक, गर्मा-गर्म बातचीत हुई. बातचीत के कुछ अंश-

प्र. वुई मेक द टॉक रीयल हॉट में आपका स्वागत है. सबसे पहले आप एक लाइन में ये बताएँ कि इस वर्ष का बजट कैसा रहा - अच्छा या बुरा?
उ. बजट कभी अच्छा भी हो सकता है? बजट तो बजट ही रहता है. बजट माने बुरा. हमारे घर का बजट हो या दुकान का सभे बुरा रहता है.

प्र. हमारा मतलब है - इस वर्ष का देश का वित्तीय बजट. वह कैसा रहा?
उ. तो ऐइसन कहिए ना. देस के बजट का क्या है. हर साल जब बजट आता है तो उसके बाद बिजली का बिल बढ़ जाता है और बिजली कटौती भी. हमारा बिजली का प्रेस ज्यादा देर तक बंद रहता है. कोयला वाला इस्तरी इस्तेमाल करना पड़ता है. कोयला में भी कालाबाजारी है उसका भी भाव हर बजट में बढ़ जाता है. अब तो इस्तरी को गरम करने के लिए आल्टरनेटिव इनर्जी - जैसे कि रीसायकल पॉलीथीन जलाने की बातें हो रही हैं - कोई सरकारी अफसर आया था वो ही बता रहा था. हमारा काम करवा दूंगा करके एगो नोट ले गया है. हर बजट के बाद डिटरजेंट थिनर सब मंहगा हो जाता है. बड़ा मुशकिल हो जाता है. इस बार भी अइसन होगा. और क्या होगा.

प्र. तब तो बजट का आपके धंधे पर, आपकी आमदनी पर भी असर होता होगा?
उ. धंधा का तो ऐसा है - कुल मिलाकर कंपनसेट हो जाता है. जैसे कि बजट पर मंहगाई बढ़ती है तो हम भी अपना रेट बढ़ा देते हैं. तो कुछ ग्राहक टूट जाते हैं तो कई नए बन जाते हैं - जनसंख्या थोड़े ही न कम हो रही है.

प्र. इस बजट से आपको क्या मिला?
उ. बजट से कभी किसी को कुछ मिलता भी है? बजट तो सबसे लेता है. बजट से तो बस सरकार को ही मिलता है - इसीलिए तो नेता लोग सरकार में आने के लिए सरकार बनाने के लिए एक पैर के एक अंगूठे पर हरदम, ताजादम तैयार खड़ा मिलता है. फेर इधर कुछ साल से सरकार ने हमारे धंधे पे भी सेवा कर लगा दिया है. अब हमें तो मालूम है कि हमारा धंधा चार लाख में भी नहीं पहुँचता, पर अफसर को जरूर ऐसा लगता है जो साल भर का खरचा पानी लेकर ही मानता है. नहीं तो फोकट का चालान काटता है. इस बार बजट छूट सीमा बढ़ाकर आठ लाख कर दिया है. तो उस हिसाब से अफसर का रेट भी बढ़ेगा.

प्र. ठीक है-ठीक है, ये बताइए, इस बजट का देश की अर्थ-व्यवस्था पर, विकास और रहन-सहन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उ. प्रभाव क्या पड़ना है. वैसा ही पड़ेगा जैसा अब तक पड़ता आया है. विदर्भ और तेलंगाना में किसानों पर जो प्रभाव पहले पड़ा था वैसा ही अभे पड़ेगा. उसकी अर्थ व्यवस्था और उसका रहन सहन अबके जरूर बदलेगा - अब वह मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करजा लेने के लिए करेगा. वह करजा लेकर मोबाइल फोन खरीदेगा, फिर मोबाइल फोन के जरिए और करजा लेगा. उसको तो करजा लेकर ही मरना है. अब मोबाइल फोन से उसका काम आसान हो जाएगा. सरकार गांव गांव में फोन और मोबाइल जो ला रही है.

प्र. समय खत्म हो रहा है, आपसे एक अंतिम प्रश्न - यदि आपको बजट बनाने को कहा जाता तो आप कैसा बजट बनाते?
उ. प्रश्न हायपोथेटिकल है तो हमारा उत्तर भी हायपोथेटिकल नहीं न होगा. हम तो बजट में धोबी कौम के लिए कंट्री के एवरी नूक एंड कॉर्नर में धोबी-घाट और डंकी पार्किंग की व्यवस्था करवा देता - एकदम मुफ़्त. वो क्या है ना, वी धोबी पीपुल आर वेरी माइनारिटी, वेरी बैकवर्ड हैं ना...

प्र. अरे अरे, चलते चलते आपसे एक प्रश्न और. ये आपकी भाषा को क्या हो गया? आप तो अंग्रेज़ी बोलने लग गए...
उ. इब का करें. हमने हमार छोरा को कान्वेंट में पढ़ाया कि वो भी कलट्टरी करेगा. या नहीं तो नेतागिरी करेगा. कुछ नाम रोशन करेगा, हमार कुरिया को कोठी में बदलेगा. फेर वो तो पढ़ लिखकर काल सेंटर में नौकरी करने लग गया. खरचा ज्यादा और आमदनी कम कह कर हर दूसरे चौथे दिन पइसा मंगाते रहता है. काल सेंटर में काम करते-करते उसे अंग्रेज़ी बोलने की आदत लग गई है तो वो भी मुझसे अंग्रेज़ी में ही बात करने लग जाता है. सुनते सुनते मैं भी समझने लगा और अब तो बोलने भी लगा हूं... आई थिंक आल दीज बजट्स ऑफ सो मेनी ईयर्ज हैड मेड इंडिया एन अल्टीमेट काल सेंटर एंड नथिंग एल्ज़...(सुबुक...)

प्र. आपसे बातचीत कर बहुत प्रसन्नता हुई. अगले बजट में फिर बातचीत करेंगे. आपका बहुत बहुत धन्यवाद
उ. जी, धन्यवाद.
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छींटे और बौछारें: बजट : मोहल्ले के धोबी की विलंबित प्रतिक्रिया...
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