अपने फ़ोन को सर्विस सेंटर पर देने से पहले ध्यान रखने योग्य कुछ बातें

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राहुल (परिवर्तित नाम) का स्मार्ट फ़ोन कुछ दिक्कत देने लगा तो उन्होंने उसे सर्विस सेंटर को सुधारने के लिए दिया. उनका फ़ोन दो तीन दिन में सुधर कर आ भी गया.

इसके कुछ दिनों के राहुल के इंटरनेट इनेबल़्ड बैंक खाते से अनधिकृत तरीके से हजारों रुपए निकाल लिए गए. जब राहुल को पता चलता और वे बैंक जाकर खाता ब्लॉक करवाते, उन्हें लाखों रुपए का चूना लग गया.

पुलिस के साइबर सेल में रिपोर्ट लिखवाने के बाद तहकीकात से पता चला कि राहुल के खाते से उनका वास्तविक पासवर्ड/यूजरनेम का उपयोग कर ही पैसा निकाला गया है, लिहाजा इस मामले में कुछ नहीं हो सकता. सूत्रों को पिरोने से हालाकि यह बात प्रकटतः सिद्ध हो गई कि राहुल ने अपने मोबाइल फ़ोन पर इंटरनेट बैंकिंग ऐप्प भी इंस्टाल किया था और अपने बैंक खाते के डिटेल भी सेव कर रखे थे जिसे सर्विस सेंटर में किसी ने कॉपी कर लिया था, और उसका उपयोग बैंक से अनधिकृत तौर पर रुपया निकालने के लिए किया था.

मित्र से गलती यह हो गई थी कि उन्होंने सर्विस सेंटर पर अपना मोबाइल फ़ोन देने से पहले उसे रीसेट नहीं किया था. रीसेट करना यानी मोबाइल फ़ोन से अपना पूरा इतिहास, डेटा, कॉन्टेक्ट इत्यादि तमाम सामग्री मिटा कर वापस फ़ैक्ट्री सेटिंग की स्थिति में पहुँचाना. केवल इस विधि से ही मोबाइल फ़ोनों में स्टोर किए गए हमारे डेटा पूरी तरह से मिट पाते हैं, अन्यथा नहीं.

तो, यदि आपके फ़ोन में कोई समस्या आ रही है, और आप उसे रिपेयर हेतु सर्विस सेंटर पर जमा कर रहे हैं तो उसे रीसेट करना न भूलें. कुछ मामले में - यदि फ़ोन पूरी तरह से डेड है तब तो ख़ैर, कुछ हो नहीं सकता, मगर बाकी के मामलों में फ़ोन का पूरा डेटा, सम्पर्क जानकारी, इतिहास, खींचे गए फ़ोटो इत्यादि सबकुछ डिलीट कर दें. बहुत से मामलों में मात्र डिलीट करने से काम नहीं बनता. कुछ खास सॉफ़्टवेयरों से इन मिटाई गई सामग्री को वापस प्राप्त कर लिया जाता है. इसीलिए फ़ोन को रीसेट करना ही सही विकल्प है.

आजकल के प्रायः सभी स्मार्टफ़ोनों में ही फ़ोन को रीसेट करने की सुविधा आ रही है. यदि आपको इस मामले में समस्या आ रही है तो आप सर्विस सेंटर वाले से ही कहें कि वो आपके सामने आपका फ़ोन रीसेट करके बताए और आप उसे चालू कर के देखें कि कहीं आपका डेटा, कॉन्टेक्ट लिस्ट इत्यादि अब भी तो मौजूद नहीं हैं. और यदि आपके फ़ोन में कोई खास महत्वपूर्ण डेटा या सेंसिटिव किस्म की सामग्री नहीं है तब भी आप सर्विस सेंटर को देने से पहले रीसेट अवश्य करें. आपके फ़ोन में आपके संपर्कों के नंबर रहते हैं, और आपको अपने उन संपर्कों के नंबरों को सार्वजनिक हो जाने का कोई चांस नहीं लेना चाहिए.

यदि आप अपना फ़ोन अपग्रेड कर रहे हैं और अपने वर्तमान फ़ोन को रीप्लेस कर रहे हों या किसी को बेच रहे हों तब भी, नए फ़ोन में अपना डेटा, कॉन्टेक्ट लिस्ट इत्यादि कॉपी कर पुराने फ़ोन को रीसेट करने के लिए यही विधि अपनाएं. कौन जाने किस व्यक्ति के पास आपका पुराना फ़ोन पहुँचेगा और वह किस तरह से इसका उपयोग करेगा आपको नहीं पता.

टिप्पणियाँ

  1. सावधान...... जागो मोबाइल फ़ोन यूजर

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  2. राहुल ने अपने मोबाइल फ़ोन पर इंटरनेट बैंकिंग ऐप्प भी इंस्टाल किया था और अपने बैंक खाते के डिटेल भी सेव कर रखे थे जिसे सर्विस सेंटर में किसी ने कॉपी कर लिया था

    गलती बंदे की ये थी:
    १) आजकल सभी मुख्य बैंक इंटरनेट द्वारा किसी भी ट्रांसेक्शन की वैधता जाँचने के लिए एक अलग पासवर्ड लगाते हैं या फिर एक डिवाइस देते हैं जिसकी स्क्रीन पर दिखने वाला कोड डालना होता है (जो कि प्रत्येक मिनट में बदल जाता है)। यह सुरक्षा बैंक खाते पर चालू होनी चाहिए। इसको चालू न रखना खतरे से खेलना ही है।

    २) पासवर्ड और दूसरी कोई गोपनीय कोड/नंबर इत्यादि ऐसे ही किसी टैक्स्ट फाइल इत्यादि में नहीं रखने चाहिए कि कोई भी पढ़ ले। फोन पर और कंप्यूटर पर पासवर्ड मैनेजर का प्रयोग करें और इस तरह की सभी जानकारी उसमें सुरक्षित रखें। वह डाटाबेस एक मास्टर पासवर्ड से लॉक हो जाता है, उस मास्टर पासवर्ड को याद रखें, कहीं लिख के नहीं छोड़ें। रोज़ाना प्रयोग होने वाली जानकारी उसमें रखेंगे तो उसको रोज़ाना खोलना पड़ेगा, पासवर्ड आराम से याद रहेगा भूलने का झंझट नहीं होगा।

    ३) सर्विस सेंटर में कभी भी फोन दें तो सिम कार्ड और डाटा कार्ड निकाल लें, वह कभी नहीं छोड़ना चाहिए वहाँ चाहे सर्विस सेंटर वाला उनकी माँग करे (मेरे अनुभव में वे खुद ही ये दोनों चीज़ें निकाल के दे देते हैं)।

    बहुत से मामलों में मात्र डिलीट करने से काम नहीं बनता. कुछ खास सॉफ़्टवेयरों से इन मिटाई गई सामग्री को वापस प्राप्त कर लिया जाता है. इसीलिए फ़ोन को रीसेट करना ही सही विकल्प है.

    फोन रीसेट भी वही करता है, डाटा को डिलीट ही करता है। हार्डडिस्क और फ्लैश स्टोरेज में यही एक बहुत बड़ा फर्क है। हार्डडिस्क से आप कुछ मिटाएँगे तो वह वास्तव में मिटता नहीं है, वहीं रहता है और कल को आवश्यकता होने पर उसी जगह नया डाटा अंकित हो जाता है, इसलिए वहाँ मिटाए गए डाटा को पाना काफ़ी आसान है। फ्लैश स्टोरेज अलग सिद्धांत पर काम करती है, उस पर से मिटाए गए डाटा को रिकवर करना ऐरे गैरों की औकात से बाहर होता है। :) ऐसा नहीं है कि उससे डाटा रिकवर नहीं हो सकता, बिलकुल हो सकता है और फोन रीसेट करने के बाद भी हो सकता है। सबसे अधिक गारंटी के साथ डिलीशन एटीए सिक्योर डिलीट कमाण्ड के द्वारा ही संभव है लेकिन १००% शुद्धता की गारंटी वहाँ भी नहीं है। खैर यह एक लंबा विषय है, लिखने लगूँगा तो पूरा पोथा लिखना पड़ेगा। :)

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    1. जी, सरासर गलती बंदे की थी.
      दरअसल आमतौर पर लोग मासूम ही होते हैं, लोगों पर भरोसा करते हैं और थोड़ी तकनीकी अज्ञानता कोढ़ में खाज की तरह हो जाती है. इसी वजह से समस्या हो जाती है.

      हटाएं
  3. बिल्कुल उचित सलाह..

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (08-10-2013) मंगलवारीय चर्चा---1292-- वो पंख अब भी संभाले रखे हैं मैंने .... में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. अति महत्वपूर्ण जानकारी/सलाह. आभार

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  6. सही कहा. आमतौर से यह सावधानी बहुत कम लोग बरतते हैं

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  7. फोन में इतनी संवेदनशील जानकारी रखी ही क्यों जाय?

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  8. सच है, सावधान रहने की आवश्यकता है।

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