आजकल के छात्रों के तो सिर्फ फ़ेसबुक पन्ने ही अच्छे रहते हैं...

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8 Responses to "आजकल के छात्रों के तो सिर्फ फ़ेसबुक पन्ने ही अच्छे रहते हैं..."

  1. और हिंदी अख़बार में आधी अंग्रेजी छप रही है.

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    1. हाँ, शायद ये भी एक वजनी वजह है...

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  2. यही अब हर जगह हो रहा है, अभ्यास की बात है।

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  3. :) खराब इंगलिस हिंदी के डर से कुछ टिपिया भी नहीं पा रहे। :)

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  4. हमारे हिन्‍दी अखबारों ने तो अंग्रेजी प्रसार के लिए पुरस्‍कार प्राप्‍त करने की पात्रता हासिल कर ली है।

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  5. अभी अग्रेजी बोलना सिखाने वाला विज्ञापन दिखा यहाँ ब्लाग पर... :)

    कुछ नहीं कह पा रहे खबर पर।

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  6. umabhatt gadhwali6:32 pm

    yah aik wjah ho sakti hai

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  7. मानक हिंदी का प्रयोग अवश्यमेव होना चाहिए. हिंग्लिश के चलते हिंदी की स्वाभाविकता प्रभावित हो रही है.

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