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मैं मोबाइल का उपयोग नहीं करता क्योंकि ये मुझे ट्रैक कर सकते हैं: रिचर्ड स्टॉलमेन

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हाल ही में भारत की यात्रा पर आए रिचर्ड एम स्टॉलमन से अपने मोबाइल फ़ोन प्रयोग नहीं करने और मुक्त सॉफ़्टवेयर, स्टीव जॉब्स, फ़ेसबुक इत्यादि के बारे में ईएफवाईटाइम्स से बात की. मुख्य अंश पढ़ें ...


जब भी मुफ्त सॉफ्टवेयर की बात की जाती है, वहाँ आरएमएस के रूप में विख्यात रिचर्ड एम स्टॉलमेन का नाम आता है. और क्यों न हो, उनके जैसा मुक्त सॉफ़्टवेयर का मुखर प्रयोगकर्ता व एक्टिविस्ट और दूसरा कोई नहीं है. स्टॉलमेन के मुताबिक विंडोज या एपल मैक जैसा मालिकाना सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर आपकी स्वतंत्रता को पूरी तरह समाप्त करता है और यह बात उन्हें पूरी तरह से अस्वीकार्य है.

आप फ़ेसबुक को सिरे से नकारते हैं. क्यों?


फ़ेसबुक किसी का मित्र नहीं है, और निश्चित रूप से मेरा तो मित्र नहीं ही है. फ़ेसबुक, का एकमात्र काम है अपने प्रयोगकर्ताओं का डेटा इकट्ठा करना. फ़ेसबुक की तथाकथित तमाम सुविधाएँ उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग में ली जाती हैं तो उनका इस्तेमाल फ़ेसबुक अपने फायदे के लिए डेटा एकत्रित करने के लिए करता है. यदि आप फ़ेसबुक में मेरी एक तस्वीर पोस्ट करेंगे और उसमें लेबल के रूप में रिचर्ड स्टॉलमेन लिखेंगे तो उनके डेटाबेस में मेरे बारे में जानकारी एकत्र हो जाएगी कि रिचर्ड स्टॉलमेन को कौन पसंद करता है. और मैं किसी दूसरे के डेटाबेस में अपने बारे में किसी किस्म की जानकारी साझा नहीं करना चाहता.


आपने Stallman.org के माध्यम से अपने अनुयायियों से कहा है कि अमेज़न के साथ व्यापार कतई न करें?


अमेज़न का स्विंडल तो ठगी का मालवेयर है. स्विंडल इसका आधिकारिक नाम नहीं है, मगर मैं उसके उसी प्रसिद्ध गॅजेट के बारे में कह रहा हूं जो आप समझ रहे हैं. इसे पाठकों को पढ़ने के उनके पारंपरिक स्वतंत्रता को ठगने के लिए डिज़ाइन किया गया है. मैं एक ई-किताब और उसके पाठक की बात कर रहा हूँ. किताबें खरीदने का एक ही तरीका है. आप दुकान पर जाते हैं, नकद भुगतान कर गुमनाम तरीके से पुस्तक खरीदते हैं. यह खरीदने की स्वतंत्रता है. अमेजन में यह स्वतंत्रता नहीं है. मैं कभी नहीं चाहूंगा कि कि मेरा नाम किसी भी डेटाबेस में रखा जाए कि मैंने कौन सी किताबें खरीदी हैं. अमेजन यही करता है. वो सारे आंकड़े अपने साथ रखता है कि आपने कब कब क्या खरीदा क्या क्या पढ़ा. यह आपकी स्वतंत्रता पर हमला है. अमेज़न के पास विशाल डेटाबेस है कि प्रत्येक पुस्तक जो उसकी साइट से बेची गई है उसे किन लोगों ने और कितने लोगों ने खरीदा है. और इस तरह के डेटाबेस, लोगों को लगता हो कि इसमें कोई बुरी बात नहीं है परंतु यह सोच गलत है. यह तो मानव अधिकारों के लिए एक खतरा है. और हमें इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए.


फिर जब आप कोई किताब खरीदते हैं तो उसे पढ़ने के बाद रद्दी में बेच देते हैं या किसी मित्र को उपहार में दे देते हैं या अपनी लाइब्रेरी में सहेज कर रख लेते हैं. अमेज़न तो डिजिटल हथकड़ी के साथ आपको किताब बेचता है. आपकी इस स्वतंत्रता का हनन होता है. इसके उपयोगकर्ता लाइसेंस समझौते के साथ जब आप खरीदते हैं तो आपको ये सब सुविधाएं नहीं मिलतीं.


आप अमेजन से खरीदी किताबें किसी को नहीं दे सकते. कानूनी तौर पर अपने वारिस, अपने बच्चे को भी नहीं. अमेज़न चोर दरवाजे से आपकी इस स्वतंत्रता का हनन करता है. हमें अमेजन के इस चोर दरवाजे के और भी बुरे सलूकों के बारे में पता है. अमेजन ने 2009 में उपयोगकर्ताओं के ईबुक संग्रह से एक विशेष पुस्तक की प्रतियों को गुपचुप तरीके से डिलीट कर दिया. यह पुस्तक जॉर्ज ऑरवेल द्वारा लिखी गई 1984 नामक पुस्तक है. सोचिए, कोई व्यक्ति आपके घर की लाइब्रेरी में सेंधमारी करे और कोई किताब उठा कर ले जाए और कूड़ेदान में फेंक दे. सबसे बड़ी विडंबना है इस उत्पाद का आधिकारिक नाम. इसका अर्थ है आग शुरू करना. जाहिर है, इस उत्पाद को प्रिंट माध्यम की किताबों को जलाने के लिए डिजाइन किया गया है. ठीक है, मगर हम हमारी अपनी किताबों को तो ऐसा नहीं करने दे सकते इसी लिए यह या ऐसे उत्पादों का उपयोग कतई नहीं करें.


आपने कहा था कि "मैं खुश हूं कि जॉब्स चला गया.” क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि आपने ऐसा क्यों कहा?
लोगों ने मेरी बात को विकृत तरीके से समझा. मैंने यह नहीं कहा कि अच्छा है कि उसकी मृत्यु हो गई. कोई भी सही दिमाग का व्यक्ति ऐसा नहीं कहेगा. मैंने भी ऐसा नहीं कहा. परंतु मैंने यह जरूर कहा कि यह अच्छा है कि वह चला गया. मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह एक शातिर, ज्ञानी शैतान था जिसने दुनिया का बहुत नुकसान किया.

उसने ऐसे कंप्यूटर बनाए जो उन कंप्यूटर के उपयोगकर्ताओं के लिए जेल की तरह थे. उसने कंप्यूटरों को आकर्षक, ग्लैमरस बनाया ताकि उपयोगकर्ता ग्लैमर की ओर आकर्षित हों और जाकर एपल की हथकड़ी पहन लें. एपल के बाद यही काम माइक्रोसॉफ़्ट ने किया. कंप्यूटिंग दुनिया बद से बदतर होती चली गई. अभी भी खासा नुकसान हो रहा है. और हम इससे आजादी के लिए, मुक्त सॉफ़्टवेयर के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. और इसीलिए मैंने यह कहा था कि अच्छा हुआ कि वह चला गया. जॉब्स ने बहुत से अच्छे काम भी किए. मगर एपल के रूप में उसका सबसे खराब काम था यह. मुझे खुशी है कि अब वह इस तरह और अधिक नुकसान करने में सक्षम नहीं है. मुझे आशा है कि इन कार्यों में उनके उत्तराधिकारी उतने सफल नहीं होंगे.


आप मोबाइल फोन का प्रयोग क्यों नहीं करते?
क्योंकि मोबाइल फोन मेरे या किसी के साथ मेरी बातचीत के स्थान को ट्रैक कर सकते हैं. अधिकांश मोबाइल फोन भले ही वे स्मार्टफ़ोन नहीं हों उनमें प्रोसेसर होता है, सॉफ्टवेयर चलता रहता है और सभी सॉफ्टवेयर (स्वामित्व वाले) मालवेयर हैं, क्योंकि वे रिमोट पर अपने डेवलपरों को उपयोगकर्ताओं के स्थानों के बारे में जानकारी भेज सकते हैं. इनमें एक तरह का बैक-डोर होता है जो दूर से आपके वार्तालाप सुन सकते हैं. यूँ भी लगभग सभी सॉफ्टवेयर में बग (बगिंग उपकरण जो जासूसी के काम आता है) होता है. और अपने आप में सॉफ्टवेयर भी एक बग ही है.


भारत में अपने सामुदायिक संबंधों के आधार पर भारत में फ्री सॉफ्टवेयर आंदोलन के बारे में आपकी टिप्पणी?
यहाँ बहुत से एक्टिविस्ट हैं जो मुक्त सॉफ़्टवेयर के लिए अभियान चलाए हुए हैं और उन्हें बहुत कुछ सफलता भी मिली है. केरल के कुछ स्कूलों में मुक्त सॉफ़्टवेयर का प्रयोग शुरू किया गया है. परंतु भारतीय मुक्त सॉफ़्टवेयर समुदाय स्वतंत्रता के बारे में नहीं सोचता. फिर सरकारी स्तर की बाधाएँ भी हैं. स्कूलों को (कुछ विशिष्ट विद्यालयों में तो निश्चित तौर पर क्योंकि इसकी उन्हें आवश्यकता भी है) मालिकाना सॉफ़्टवेयर सिखाने के लिए बाध्य किया जाता है. तो यह पूरी तरह गलत है. किसी भी देश की सरकार यदि अपने छात्रों को मालिकाना हक के सॉफ़्टवेयरों के बारे में प्रशिक्षित करती है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि वह देश को उस कंपनी के हाथों बेच रही है. तमिलनाडु में स्कूली बच्चों को लैपटॉप दिये जा रहे हैं जिसमें विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम है. यह तो कंपनी को अपना भविष्य बेचने जैसा हुआ. फिर किसी ने बताया कि अब उनमें ड्यूअल बूट सिस्टम डाला जा रहा है. इसका मतलब ये है कि आधे हिस्से में नैतिक माल है और बाकी आधे हिस्से में अनैतिक चीज. दूसरे अर्थों में बच्चों को लंच टाइम में पानी के साथ साथ व्हिस्की भी दी जा रही है ताकि वे दोनों चीजों को चख कर देख सकें. इसलिए उन्हें मालिकाना हक वाले सॉफ़्टवेयरों का वितरण करना बंद कर देना चाहिए. बच्चों के बीच तो बिलकुल नहीं.

--

(ईएफवाईटाईम्स.कॉम में मूल अंग्रेजी में प्रकाशित दीक्षा पी. गुप्ता के आलेख से साभार अनुवादित)

टिप्पणियाँ

  1. स्‍टालमॅन की मानें तो मोबाइल और कंप्‍यूटर का इस्‍तेमाल सबको बंद करना पड़ेगा!!!

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    1. पर, स्टॉलमेन ने ईमैक्स नामक सॉफ्टवेयर लिखा है जो कि अपने आप में मिनी ऑपरेटिंग सिस्टम है!

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  2. मुझे स्टालमेन अच्छा लगता है. उसके और मेरे विचार बहुत मिलते-जुलते हैं इसीलिए मुझे भी कुछ लोग 'अजीब' कहते हैं.

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    1. हालाकि मैं भी उनके तमाम विचारों पर प्रतिबद्धता नहीं दिखा पाता, फिर भी वे बात एकदम सही करते हैं. सटीक और सुस्पष्ट विचार.

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  3. क्रांतिकारी बाते हैं, कुछ कुछ समझ तो आता है।

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    1. इंटरनेट और कंप्यूटिंग की ढेरों मुफ़्त व मुक्त सामग्री का श्रेय इन्हीं महोदय को जाता है.

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    2. मुक्त श्रोत अच्छी बात है लेकिन मुफ्त ! उत्पादक के कार्य का मेहनताना कहां से आयेगा ?

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  4. कहते हैं - 'समझदार की मौत है।' मैं इस मौत से बच गया। कुछ भी पल्‍ले नहीं पडा।

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  5. स्टॉलमन के बारे में हमने तो पहली बार जाना, बात तो सही ही लगती है।

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  6. स्टालमैने अतिवादी है, बहुत कुछ पैरेनोईड! इनकी बहुत सी बातो मे कान्सपीरेसी थ्योरी की झलक मीलती है।

    गूगल और अमेजान द्वारा जो आंकड़े सग्रह किये जाते है, वे महज आंकड़े है, उनसे प्राप्त सूचना गूगल/अमेजान के लिये फायदेमंद जरूर है लेकिन किसी व्यक्ति विशेष के लिये हानी कारक नही। आंकड़ो(Data) और सूचना(information) मे जो अंतर होता है, स्टालमैन उसे समझना नही चाहते।

    अलबत्ता मुक्त श्रोत के लिये उनका कार्य सराहनीय है।

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    1. प्रोग्राम प्रिज्म के बाद आप क्या कहेंगे। ...

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  7. रोचक एवं गम्‍भीर बातें, साझा करने के लिए शुक्रिया।

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  8. सत्य बात हमेशा कड्वी ही लगती है इन महाशय द्वारा कही बात १०० टक सच है..

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  9. ये महाशय तो क्रेडिट कार्ड भी प्रयोग नहीं करते होंगे क्योंकि उसे भी ट्रैक किया जा सकता है ... वैसे करने पर आयें तो ट्रैक तो नोटों के नम्बरों को उस जहाज़ को भी किया जा सकता है जिसमें वे आये होंगे ... अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को भी ट्रैक कर लिया था, आज के समय में ट्रैक न होने के डर से मोबाइल प्रयोग न करना ज़रा अजीब सी बात लगती है, वैसे अपनी-अपनी मर्ज़ी है।

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  10. सनकी बन्दे हैं ये!

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  11. क्रीन्तिकारी विचार....i agree...

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