मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग...

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व्यंज़ल

 

डरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

कभी तो चिंगारी सुलगेगी

भरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

जब भी परीक्षा की घड़ी आई

खरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

बात बे बात लाल पीले फिर

हरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

देश को चने के खेत सा रवि

चरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

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देश को चने के खेत सा रवि
चरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

वाह! जी।

मेरे शहर के लोग, भगवान करे कि जाग जायें।

शुक्र अदा करो खुदा का कि,
(तुम्‍हें) सह रहे हैं मेरे शहर के लोग

क्या क्या रंग मे सने हुए है मेरे शहर के लोग!!!!!!

शानदार गजल...

ravijee ,pataa nahee kya ho gayaa hai ,har shahar ka yahee hal hain. aap nirash n hon.

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