ब्लॉग : आइए, आचार संहिता को मारें गोली!

एक छोटा सा दूरस्थ प्रस्तुतिकरण जो मैंने वर्धा कार्यशाला में दिया था, वह नीचे एम्बेड है, जिसे चलाकर आप देख सकते हैं. स्लाइड में दिए उपशीर्षकों के जरिए प्रस्तुतिकरण का सारांश आसानी से और बखूबी समझा जा सकता है.

विषय:

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मुझे तो गोला बारूद कभी भी पसंद नहीं रहा, वैसे आपकी यह प्रस्तुति बहुत जोरदार थी। हाँ, वर्धा में आपकी कमी अवश्य खली।
................
वर्धा सम्मेलन: कुछ खट्टा, कुछ मीठा।
….अब आप अल्पना जी से विज्ञान समाचार सुनिए।

अच्छी और जरूरी जानकारी के लिए शुक्रिया...एक खास वर्ग के लिए ये बेहद आवश्यक है.

आपके हुकुम करने की देर थी, हमने उसी समय गोली मार दी थी... :)

आज आपके बलोग से एक काम की जानकारी और मिल गयी | टोर प्रोजेक्ट ......|

आपका यह प्रसारण वर्धा संगोष्ठी की चर्चा का मुख्य विषय बनने के साथ-साथ सबके लिए उत्सुकता का भी विषय रहा ...आपका प्रस्तुतीकरण भी शानदार था ...आभार आपका ...

उपयोगी जानकारी।
एक प्रश्न:
बिना टॉर के, यदि कोई बेनामी बनकर ई मेल करना या ब्लोग लिखना चाहता है तो क्या निम्नलिखित युत्कि में कोई कमी हैं?

१) एक फ़र्जी email ID अपनाओ और समय समय पर उसे बदलते रहो
२) कई सारे साइबर कैफ़े का प्रयोग करो और बारी बारी से इन साइबर कैफ़े से पोस्ट करो।
३)साइबर कैफ़े के रजिस्टर में कभी अपना सही नाम और पता मत लिखना
३) कभी अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर पोस्ट की हुई सामगरी की प्रति नहीं रखना।
४) इसकी प्रति अपने फ़र्जी email ID के mailbox में ही रखना

क्या यह एक सुरक्षित तरीका है?

शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ

रवि जी,
आप लखनऊ आये और मैं महाराष्ट्र की यात्रा से इसी दिन लौटा था मुलाक़ात नहीं हो सकी ....फिर सोचा वर्धा में मुलाक़ात होगी किन्तु दुर्भाग्यवश मिलाने का सुयोग न बन सका, वैसे आपकी कमी बहुत खली वर्धा में ! आपकी प्रस्तुति ने न केवल आपके वहां होने का एहसास करा दिया वल्कि आपकी सार्थक उपस्थिति की मुहर भी लगा दी ! अच्छी लगी आपकी प्रस्तुति, आपका आभार !

गोली मार... ,भेजा शोर करता है।

जी सही कहा, हम तो छूटते ही गोली मार दिये थे…
हालांकि आपका प्रस्तुतीकरण देखने का सौभाग्य मुझे नहीं मिला, क्योंकि ट्रेन का समय हो रहा था…

अलबत्ता मेरी तरफ़ से एक और अन्तिम गोली बेंगाणी जी ने भी आते-आते मारी थी… :)

आपने अच्‍छी जानकारी दी। मुझे लगता है,मेरे कुछ मित्र आपके अत्‍यधिक आभारी रहेंगे।

जी. विश्वनाथ जी,
आपके सुझाए गए तरीके पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. इन युक्तियों के प्रयोग से व्यक्ति की पहचान जाहिर होने व उसके पकड़े जाने का खतरा तो कुछ न कुछ बना ही रहता है, भले ही वो अत्यल्प हो. जबकि यदि आप टॉर जैसी युक्ति का प्रयोग करते हैं तो यह खतरा इसलिए नहीं रहता क्योंकि इसमें आईपी ट्रैकिंग जैसी संभावना है ही नहीं. और सुरक्षा के पूरे और पुख्ता इंतजाम हैं.

रवीन्द्र प्रभात जी,
मुझे भी अफसोस था वहाँ न पहुँचपाने का. आशा करता हूँ जल्द ही आपसे मुलाकात होगी.

मरी हुई आचार संहिता में गोली मारना न तो समझदारी है न वीरता !

aapke is prastutikaran ko warddha me baithkar dekha aur phone par suna ... lekin abh yaha dekhaa to bhaai vivek ka comment ekdam mast lagaa,
khair,
jo sawal mann me aaye vo ye ki,

kya ho agar koi tor ka prayog karte hue kisi ke upar mangadhant kuchh bhi kah de, tab?

koi rasta use pakadne ka?

jab ham anaitik/naitik dono paksha pratust karne kaa ek aur rastaa banaa rahe ho tab anaitik wale ko pakadne ka upaay?

kynki jaisa ki aapne apne prastutikaran me torrent downloading ka udaharan diya tha us sandarbh me hi puchh rahaa hu ki downloading aur blog me kisi ke sandarbh me kuchh bhi likh dene me kaafi antar hai.....mujhe agyaani ka maargdarshan karein...

स्लाइड शो देख के मज़ा आया.

बहुत सही..

है कहाँ आचार सहिंता..

विवेक सिंह से सहमत |
मृत आचार संहिता में गोली मरना गोली और समय दोनों जाया करना समान है |

आपका यह स्टाइल तो बहुते बढ़िया लगा !!!!!!!!!!!!

संजीत भाई,
विवेक की टिप्पणी तो सदैव की तरह व्यंग्य है :)
बाकी सवाल आपका तो टॉर उन लोगों के लिए है जो शासन, कुशासन, स्थानीय माफिया और बाहुबली के भ्रष्ट तंत्र के विरूद्ध प्रभावी सीटी बजाने के लिए अपनी खुद की पूरी सुरक्षा करते हुए काम में लेते हैं, नहीं तो उनका भी हश्र अनिरूद्ध बहल और आलोक तोमर (सोचिए कि जब ये बड़े पत्रकार हैं, और सीटी बजाने पर इनके विरूद्ध ही मुकदमा ठोंक दिया गया तो अदना ब्लॉगर का क्या हाल होगा)की तरह हो जाएगा.
और, किसी भी तंत्र के सु-और-कु-प्रयोग के उदाहरण तो होते ही हैं. आग, आग लगाती भी है, और आपके लिए खाना भी पकाती है. आपके ऊपर है कि आप उसका अपने लिए क्या कैसे प्रयोग में लाते हैं. :)

विवेक जी,
सिर्फ शीर्षक पे न जाओ यारों!

The link is broken

http://www.slideshare.net/raviratlami/blogging-ethics-5441971

Sorry! We could not find what you were looking for :(

-Arun Jain

सत्यवचन गुरुदेव:)

गुरुजी ..बढ़िया पोस्ट

Tor के अलावा...सबसे सरल Ultrasurf है, या फिर फ्री VPN Services जैसे Hotspot Shield आदि | Tor कुछ ज्यादा ही स्लो था |

बहुत अच्छि जानकारी धन्यवाद रवि जी

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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