टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

जीवन के शर्त में शामिल है रिश्वत…

आदम और हव्वा

rishwat (Custom)

व्यंज़ल

/*/*/
जीने के शर्त में शामिल है रिश्वत 
मुरदे दे रहे  कफ़न के लिए रिश्वत


क़िस्सों में भी नहीं प्यार की बातें 
आदम-हव्वा के बीच घुसी रिश्वत


ऐसे दौर की कामना नहीं थी हमें 
खुद को देना पड़ता है यहाँ रिश्वत


बदल चुके हैं इबादतों के अर्थ भी 
कोई फ़र्क़ बताए रस्म है या रिश्वत


हवालात की हवा खानी ही थी रवि
तूने ली/दी नहीं थी जो कोई रिश्वत

---

(व्यंजल – फरवरी 2005 की पोस्ट से संशोधित रीठेल. रिश्वत विषय से संबंधित अन्य पोस्टें यहाँ पढ़ें)

एक टिप्पणी भेजें

ठेल से रिठेल तक दमदार।

एक टिप्प्णी की रिश्वत कबूल करें. :)

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

अन्य रचनाएँ

[random][simplepost]

व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

विविध

[विविध][random][column1]

हिन्दी

[हिन्दी][random][column1]
[blogger][facebook]

तकनीकी

[तकनीकी][random][column1]

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

[random][column1]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget