नज़राना

110 अरब रुपयों की सालाना रिश्वत
***/***

*-*-*
भारत में 110 अरब रुपयों की सालाना रिश्वत पुलिस, यातायात पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारियों को दी जाती है. यह धनराशि केंद्र तथा राज्य सरकारों को करों और अन्य शुल्कों के रूप में सालाना प्राप्त होने वाली राशि से 30 अरब रुपए ज्यादा है. प्राय: हर मार्ग पर ट्रकों / वाहनों से वसूली करती दिखाई देती पुलिस इन आंकड़ों की पुष्टि करती है. हाल ही में पुलिस का मुख्य काम यह हो गया था कि वह मुम्बई जैसे महानगर से लेकर मेवासा गांव तक वह यह सुनिश्चित करे कि दो पहिया वाहन चालक हेलमेट पहन कर ही वाहन चलाएँ. हेलमेट निर्माताओं ने भी रिश्वत का सहारा अपने उत्पादों को बेचने के लिए ले लिया लगता है. पुलिस के अनुसार हेलमेट पहन कर आप संपूर्ण सुरक्षित हो जाएँगे- भीड़ भरी, अनियंत्रित ट्रैफिक सहित, गड्ढों से परिपूर्ण सड़कों में. धन्य है!

*-*-*
व्यंज़ल (हास्य ग़ज़ल, हज़ल के तर्ज पर)
/*/*/
जीवन के शर्त में शामिल है रिश्वत
मयस्सर है कफन जो होगी रिश्वत

क़िस्सों में भी नहीं प्यार की बातें
भाई-भाई के रिश्तों में घुसी रिश्वत

ऐसे दौर की कामना नहीं थी हमें
अपने आप को देना पड़े है रिश्वत

बदल चुके हैं इबादतों के अर्थ भी
कोई फ़र्क़ नहीं रस्म हो या रिश्वत

हवालात की हवा खाना ही थी रवि
तूने लिया जो नहीं था कोई रिश्वत

*-*-*

टिप्पणियाँ

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

अधिक दिखाएं

---------------

छींटे और बौछारें का आनंद अपने स्मार्टफ़ोन पर बेहतर तरीके से लें. गूगल प्ले स्टोर से छींटे और बौछारें एंड्रायड ऐप्प image इंस्टाल करें.

इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का खजाना:

इंटरनेट की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित व लोकप्रिय ईपत्रिका में पढ़ें 10,000 से भी अधिक साहित्यिक रचनाएँ

हिन्दी कम्प्यूटिंग के लिए काम की ढेरों कड़ियाँ - यहाँ क्लिक करें!

.  Subscribe in a reader

इस ब्लॉग की नई पोस्टें अपने ईमेल में प्राप्त करने हेतु अपना ईमेल पता नीचे भरें:

FeedBurner द्वारा प्रेषित

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

***

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद करें