चिट्ठाकारों की नियमित, योग्यता जाँच

ability test of hindi blogger

क्या खयाल है? चलिए मान लिया, यहाँ कोई न न्यूनतम और न महत्तम मापदण्ड है, मगर योग्यता के नाम पर कुछ तो होगा? पर, अब आप कहेंगे कि एक चिट्ठाकार की योग्यता आखिर क्या होनी चाहिए जो जांची-परखी भी जा सके. और यदि कुछ तो ऐसा होगा जिसे चिट्ठाकार की योग्यता कहा जा सके तो फिर उसे जांचने में कोई हर्ज है क्या?

मेरे एक चिट्ठे पर हाल ही में एक टिप्पणी आई – “*तिए ये तूने क्या लिखा है?” वो तो टिप्पणी मॉडरेशन का धन्यवाद कि मैंने उस टिप्पणीकार के *तियापे को प्रकाशित नहीं किया. मगर यहाँ पर सवाल यह उठता है कि मैंने जो कुछ लिखा था, वो तो मेरी अपनी नज़रों में महान था. तमाम इंटरनेटी दुनिया में तांक झांक कर मसाला उड़ाकर निचोड़ बनाकर मैंने लिखा था. मेरे अपने हिसाब से वो एक क्लासिक था. जितनी दफा और जितनी मर्तबा और जितनी बार, बार-बार मैं उसे पढ़ता, पढ़कर मुग्ध हो जाता और सोचता कि क्या गजब लिखा है. मुझे लगता कि उसने कहा था की तर्ज पर मेरा यह मात्र एक लेख मुझे चिट्ठासंसार में स्थापित कर सकने की क्षमता रखता है. मगर उस पर आई भी तो यह टिप्पणी!

मगर, फिर मैंने अपने आप को दिलासा दिया - वह पाठक और वह टिप्पणीकार अवश्य ही *तिया रहा होगा जो इंटरनेट के खरबों पृष्ठों को अनदेखा कर मेरे चिट्ठे पर मंडरा रहा था. जाहिर है, उसका ज्ञान मेरे ज्ञान से करोड़ों गुना उच्चकोटि का रहा होगा, और इसीलिए उसने मेरे लेख पर ऐसी टिप्पणी दी. मैंने अपने ज्ञान के मुताबिक, अपनी योग्यता के मुताबिक जो लिख मारा था, वो मेरे बराबर या मुझसे नीचे ज्ञान रखने वाले, मुझसे नीचे योग्यता रखने वाले पाठकों के लिए, जाहिर है, ठीक होगा, परंतु मुझसे ऊपर की योग्यता रखने वालों के लिए मेरा लिखा तो हर हाल में आखिर *तियापा ही होगा!

पर, इस घटना - इस टिप्पणी से मुझे सदमा सा लगा. मुझे अपनी योग्यता पर संदेह सा होने लगा. लगा, एक चिट्ठाकार के नाते मुझे अपनी योग्यता की जांच करनी होगी. मैंने सोचा, चिट्ठाकारों को चिट्ठा पाठकों की पठन योग्यताओं पर संदेह करना फिजूल है. मुझे अपने अंदर के चिट्ठाकार की योग्यता जांच के लिए ही कुछ सूत्र, कुछ फ़ॉर्मूले गढ़ने होंगे. चिट्ठाकारी योग्यता जांच के लिए कुछ करना ही होगा. और फिर तब ही मेरी योग्यता में इजाफ़ा हो सकेगा.

वैसे, नियमित योग्यता जांच तो हर क्षेत्र में, हर एक के होने चाहिएँ. हाल ही में हुए संसद सत्र का उदाहरण लें तो स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी. सांसदों की क़ीमतें 25 करोड़ आंकी गई. विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र के सांसदों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए. वैसे भी, इस महंगाई के जमाने में 100 करोड़ से कम की कीमत तो होना ही नहीं चाहिए. यदि इन सांसदों की नियमित योग्यता जांच होती रहती तो इनमें से अधिकतर योग्य बने रहते और फिर इनमें से हर एक की कीमतें यकीनन 100 करोड़ से ज्यादा होती. अयोग्य सांसदों, जिनकी योग्यताओं की कभी भी जांच नहीं हुई, 25 करोड़ कीमत तो ओवर रेटेड है. साथ ही संसद पटल पर घूँस के 1 करोड़ के नोट लहराए गए. भारतीय संसद पटल की सिर्फ इतनी ही योग्यता – कि वहां सिर्फ 1 करोड़ लहराए गए? 25-50 करोड़ के नोट लहराते तो कोई बात बनती. ये तो भारतीय संसद का सरासर अपमान है. मेरे मुँह से अनायास वही बात निकली जो मेरे चिट्ठे के उस टिप्पणीकार की थी...

तो, समय समय पर, नियमित योग्यता जाँच तो होते ही रहने चाहिएँ. चिट्ठाकारों के भी, और चिट्ठापाठकों के भी. इस तरह दोनों तरफ योग्यताओं में इजाफा होता रहेगा. जब जाँच होंगे, तो कुछ मापदण्ड भी तय करने होंगे. विविध क्षेत्रों में योग्यता जाँच के लिए कुछ न्यूनतम मापदण्ड कुछ यूँ हो सकते हैं –

  • केंद्रीय मंत्रियों के लिए - लालू की तरह मतदाताओं का मनोरंजन कर उन्हें उल्लू बनाने की योग्यता.
  • सरकारी अफ़सर के लिए – अपनी तनख़्वाह से सौ गुना अधिक रिश्वत/कमीशन उगाह सकने की योग्यता.
  • सरकारी कर्मचारी के लिए – महीने भर में अधिकतम बहाने बनाने, अधिकतम छुट्टी लेने व हर हाल में न्यूनतम काम करने की योग्यता.
  • प्रोफ़ेसरों के लिए – कोर्स के अलावा हर संभव विषय में शानदार लेक्चर दे सकने की योग्यता.
  • पुलिस के लिए – एफआईआर लिखने के लिए फरियादी से यथा संभव उसके औकात से ज्यादा माल निकलवा सकने तथा उसे ही अपराधी सिद्ध करने की योग्यता.

जाहिर है, सूची अनंत रूप से लंबी हो सकती है. और इससे पहले कि आप मेरी चिट्ठाकारी योग्यता पर संदेह कर आगे पढ़ने के बजाए सीधे कोई उलटी सीधी टिप्पणी लिख मारें और मैं उसके बिना पर आपकी चिट्ठापठन योग्यता पर संदेह करने लगूं, मामला यहीं बन्द करता हूं.

फिर भी, क्यों न अपन अपनी योग्यताओं की जाँच करवा ही लें? क्या खयाल है? पर, वे योग्यताएं आखिर क्या होंगी?

मूलत: http://raviratlami.blogspot.com पर प्रकाशित

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इस काम के लिये ( चिट्ठाकारो की जांच) के लिये सभी चिट्ठाकार हमारे चिट्ठे पर टिपियाये , हम हर महीने अपने व्यस्ततम समय मे से समय निकाल कर उन्हे ग्रेड देंगे जो नही टिपियायेगे वे ध्यान दे उनकी ग्रेडिंग नकारात्मक यानी निगेटिव की जायेगी , :)

आप लिखते रहिये आप बहुत अच्छा लिखते है मन की लिखते है स्वतंत्र है कुछ सनकी तरह के लोगों की टिपण्णी से हताश न होइए..मुझे तो आप योग्य लगे ...

kuchh log khud ko mahan sabit karne ke liye dusron ko apshabd kahte hain..inka aghosit sidhant hota hai prasiddh hone ke liye kisi bhi lokpriya vyakti par aachhep laga do.aap bhi inhi me se ek ki jalan ka shikar huye hain.

समस्या यही है कि हम अपनी योग्यता की पहचान दूसरों की टिप्पणियों से करने की कोशिश करते हैं। कुछ दिन पहले एक बंदा जो खुद को एक बड़े पॉपुलर ब्लॉग से जुड़ा होने की बात कहकर अपनी पहचान जताने की कोशिश करते हुए मेरे गुग्गल टॉक पर मुझसे बतियाने चला आया। मैंने पूछा आपको मेरी आई डी कैसे मिली तो बोला... आपके ब्लॉग से ली है। मैंने कहा मैंने तो आपका कमेंट कभी वहां देखा नहीं... कहने लगा मोहतरमा, अच्छी लेखनी कभी कमेंट की मोहताज नहीं होती। फिर कहीं मैं गलत ना समझ बैठूं... इसलिए तपाक से अगला वाक्य लिख मारा... मैंने अच्छी लेखनी की बात की है.... आपकी नहीं। मैंने कहा...जी, धन्यवाद। और बोलने को था भी क्या?
अब टिप्पणी मिलती है तो समझती हूं कि बहुत अच्छा लिखा है। नहीं मिलती तो यह कि अच्छी लेखनी टिप्पणी की मोहताज नहीं होती। सही है ना?

रोचक और सटीक। और शायद उलटी-पुलटी टिप्पणी करनेवालों के मुँह पर करारा चमाटा, हमारे देखने में।

अतुल शर्मा

ज़रूर होना चाहिए जी :-)

आपकी योग्यता दिख गई :)

yahn to magar aapsi dosti yari ka khel hota hai ,jinke blog par 4 tippayiniya hoti hai ya jinhe padhne vala koi nahi hota unke interview aor blog akhbar me chapte hai.jinhe padha ja raha hai unka koi nam nahi ,darasal bade bloggar aor khastaur se patrkar doosro ka likha padhte nahi to fir unhe koi kyun padhe?mai bhi isliye gine chune blog padhti hun aor kisi khas jagah par tippani,par ye kahna ki achhe lehan ko tippani ki jarurat nahi,sab bakvaas hai,so called bade blog writers har chouthe din apne blog post par tippaniyo ko lekar likhte hai fir kahte hai unhe tippaniyo ka koi moh nahi,to fit bhai pareshan kyu hai.kis likhne vale ne kitni quality se likha hai aor lagatar kitna achha likha hai ,usse bhi jaroori ki kya vo har vidha me likhta hai?kya gana post pe laga dena ?.news laga dena ? kisi aor ki gajal likhna bloging hai?kaise judge karenge?

यहाँ तो एक से एक *तिये तलवार भाँज रहे हैं,
मुफ़्त और जुगाड़ में जो मिल जाये, उसी पर
पिल पड़ते हैं ।
आप एक वरिष्ठ एवं सुलझे हुये ब्लागर हैं,
बल्कि ब्लागर-स्तंभ हैं, तो..
मेरा आपसे एक सीधा सवाल है, कि क्या आपको
इस तरह के *तियों के *तियापे पर इतना अधिक
विचलित होना चाहिये ? कदापि नहीं !

आपने तो चिट्ठाकारिता की योग्यता के मानदंड तय किए बिना ही सस्ते छूट लिए .विचारों की उधेड़ बुन हमारे गले लगा गए -वैसे यह भी एक मानदंड हो सकता है .
दरसल हिन्दी चिट्ठाकारिता की समस्या यह है कि यहाँ भी भारतीय लोकतंत्र पूरी शिद्दत से मौजूद है -यहाँ परिपक्वता की जरूरत है ही कहाँ -आख़िर चिट्ठाकार बनने के लिए बस थोडा सा कम्पूटरी ज्ञान ही तो चाहिए फिर खोल कर बैठ जाईये अपनी दूकान और गन्दगी फैलाते जाईये -रतलामी जी ,लल्लू पंजुओं की काहें को परवाह करते हैं जो आप के काम से परिचित हैं वे जानते हैं कि यह ब्लागजगत आप से उरिण नही हो सकता .

अरे तो फिर हम जैसे अयोग्य लोगों का क्या होगा :-)

तूने क्या लिखा है?”
यह किस *** जी ने लिखा था जी?!

नहीं नहीं रतलामी भइया, ये तो बहुत गड़बड़ बात होगी। चिट्ठाकारी का मजा ही किरकिरा हो जायेगा। पोस्‍ट लिखने और टिपियाने में भी सिलेबस देखना पड़ेगा। जांच परीक्षाएं शुरू हुईं, तो ब्‍लॉगरी में भी पैसे और पैरवी का खेल होने लगेगा। परीक्षाएं देनी पड़ीं तो मैं तो छोड़ ही दूंगा ब्‍लॉगरी :)

अरे! आपने यह तो लिख डाला कि किसपदया श्रेणी की योग्यता
क्या होनी चाहिये ,परन्तु आपने यह तो बताया ही नही कि उन सभी की योग्यता जाचनेवालों अथवा उनको चुनने वालो की योग्यता क्या होगी ? सांसद/विधायक का चुनाव जनता वोट देकर करती है अतः उपरोक्त लोगों द्वारा अपने वोट अपील पोस्टर पर लिखाया जाना आवश्यक कर्दिया जाना चाहिये कि मुझे वोट निम्न योग्यता वाले ही वोट देने का कष्ट करें :-
१~ जो घोर जातिवादी हो ,२~जो घोर धर्म ध्वजा वाहक हो ,३~ जो यह अपने को सम्प्रदायिक्ता विरोधी तो कहे ,परन्तु वर्ग विशेष की सम्प्रदायिक्ता को कभी भी सम्प्रदायिक्ता न माने ४~ जो अधिक से अधिक केवल नजायज काम ही लेकर मेरे पास आवे ---आदि आदि । शेष फ़िर कभी >>राजी खुशी जोग लिखी

योग्यता का clause डाल देंगे तो आधा चिठ्ठाजगत तो साफ़ ही हो जायेगा सरकार मगर criteria यह रखेंगे तो हो गया फ़िर तो। ऐसा जुलम न करो। *तियापा करने वाले तो खैर ज़्यादा नहीं हैं अभी।

हम लोग ब्लॉग से ,ब्लॉग में क्या देखना चाहते है ?लेखन में विविधता ,क्या संदेश देना चाहते है ?किसी वैचरिक मुद्दे पर बहस ?एक आम नागरिक होने के नाते सामाजिक जीवन के कुछ पक्ष ?एक आम आदमी की नजर से दुनिया को देखना ?ऐसी जगह जहाँ पत्रकार ,इंजीनियर ,गृहणी ,टीचर ,डॉ ....देश ओर देश से बाहर सोचे तो देखे ब्लॉग कितनी क्रांति ला सकता है ब्लॉग में ?कही दूर इलाके में लिखा एक लेख दिल्ली में पढ़ा जा रहा है ओर u a e में भी......पर ऊपर मिश्रा जी ने ठीक कहा की अभी चिट्ठा भी अपने शैशव काल से गुजर रहा है ,परिपक्वता की उसे जरुरत है ...वैसे एक बात ओर कहूँ.....आप इसके आधार स्तंभ में से एक है उन लोगो में से है जो निरंतर जरी है ,बिना टिप्पणियों की परवाह किए हुए ,प्रमोद जी का भी लेखन जारी रहता है तो ऐसे ......से विचलित न हो.....पर आपका ये चिंतन जरूर विचारणीय है

आपका विचार बहुत भाया !चिट्ठाकारों के योग्यता अयोग्यता आदि टेस्ट होते रहने चाहिए !!

इत्ती...टिप्पणियों के बाद कहेने को क्या रह जाता है :)

apka post padhkar lagaa ki vakai sabhi proffessionals ka varshik parikshan hona chahiye.
per hindustan men yeh bhi ek nai vikruti lekar brashtachaar ko hi badhaayega.

rajesh

आपकी चिन्ता ज़ायज है लेकिन अभी थोड़ा और मंथन होने दीजिए। कुछ बरसाती मेढ़क आएंगे और टर्र मारकर चले जाएंगे। यहाँ जमेंगे वही जिनमें वास्तविक योग्यता होगी। रंगे सियार जंगल की बादशाहत नहीं पाने वाले। अभी माँग और आपूर्ति का नियम ही चलेगा। लाइसेंस-परमिट राज अब इतिहास की चीज हो जानी चाहिए। इस समुद्र मंथन से कुछ मोती निकलने शुरू भी हो गये हैं। लेकिन विष भी तो निकलेगा ही... और गरलपान करने के लिए एक शंकर की आवश्यकता भी पड़ेगी। हमें अपनी-अपनी भूमिका चुन लेनी है।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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