बुधवार, 27 फ़रवरी 2008

कभी जश्न तो कभी रोना...


और, पप्पू रो दिया...

ये वही पप्पू हैं, जिनके जेल में भी जश्न मनाने की चटपटी खबरें आती रही थीं. जीवन सचमुच बहुत कटु होता है. जश्न और रोने का हिसाब आज नहीं तो कल, बरोबर!

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व्यंज़ल

कभी जश्न तो कभी रोना

जिंदगी का है यही रोना


प्रेम में ये कहां से आया

दाल रोटी का वही रोना


हँसते हँसते आते आँसू

आंखें भूलते हैं कभी रोना


कब तक हँसेंगे दूसरों पे

जब खुद पे है वही रोना


जिंदगी आसां होती रवि

याद होता कल वही रोना


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2 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. पप्पू फेल हो गया, रोएगा तो है ही।

    कोई बात नही मुन्ना, एक फोन करके पाला बदल लो, फिर दिन बहुर जाएंगे। ये सजा वजा तो नेताओं के पैर की जूती है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी नजर की दाद देता हूं। कब कहाँ पहुंच जाए, कहा नहीं जा सकता।

    उत्तर देंहटाएं

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