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Tuesday, July 10, 2007

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लेख आइडिया : यह जाल स्थल

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16 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

maithily said...

वाह रवि जी;
पर हिन्दी की अन्तर्जाल दुनियां के पास पैसा भी है?

Raviratlami said...

मैथिली जी,
पर, कहावत है, और सच भी है - पैसा पैसे को खींचता है.

पैसा लगाओ, पैसा पाओ!

masijeevi said...

रविजी आपने पुन: पुन: पुनश्‍च में यह नहीं जोड़ा कि गाली देने वाले टिप्‍पणीकारों की भर्ती भी खुली है। ये प्रीमियम सेवा क्‍या आप खुद ही देंगे :)
हा्..........आप तो ऐसे न थे :)

जगदीश भाटिया said...

रवि जी, कभी कभी चिट्ठाजगत के झगड़ों को देख कर लगता है कि यह किस झमेलों की दुनिया में आ कर फंस गये।
तो क्या अब इन झमेलों में फंसे रहने के पैसे भी दें?
वैसे भाइचारे के साथ टिप्पणी आदान प्रदान वाला जो कार्यक्रम यहां पहले से चलता था वो कुछ ज्यादा किफायती नहीं है?
वैसे कोई टिप्पणी दे या न दे जब भी आये गुगल एड पर चटका लगा जाये बस :D

Raviratlami said...

मसिजीवी जी,
अब आप मुँह न खुलवाएँ. आपको भी पता है - ऐसे दर्जनों लोग कौड़ियों के भाव में मिलते रहे हैं...

जगदीश जी,
मजा लीजिए चिट्ठाजगत् के झगड़ों का. इसी में सार है. बस कूदियो ना मंझधार में!

rachna said...

excellent no words to say any more about your post ravi

संजय बेंगाणी said...

क्या "बिजनेस आइडिया" लड़ाया है? हमारी हिन्दी भी "अप-टू डेट" है, नौकरी का आवेदन भेज रहें है. पावती भेज देना जी.

Amit said...

यह सर्विस ट्रैफिक बेचने वाली साइटों की तर्ज पर बनी लगती है। जिस तरह वे आपके ब्लॉग/वेबसाइट के लिए ट्रैफिक बेचते हैं उसी तरह यह कमेंट बेचती दिखे है!

मजा लीजिए चिट्ठाजगत् के झगड़ों का. इसी में सार है. बस कूदियो ना मंझधार में!

बिलकुल स्टीक मशवरा दिया है रविजी। :)

Sanjeet Tripathi said...

ह्म्म, आईडिया तो मस्त है पर मै सोचता हूं कि टिप्पणी खरीदने की बजाय क्रमांक एक वाले में नौकरी के लिए आवेदन कर दूं, ज्यादा कमा लूंगा!!

परमजीत बाली said...

रवि जी,आप ने टिप्पणी लिखने वालों के प्रति जो उदारता दिखाई है उस के लिए धन्यवाद। लगता है हमे भी आवेदन कर देना चाहिए। कुछ तो कमाई होगी।

Udan Tashtari said...

हमारी तो एन जी ओ है-बिना पैसे ही दिये जा रहे धड़ाधड़ टिप्पणियां. एक बार बस मार्केट पकड़ लें फिर कामर्शियल करेंगे. :)

अरुण said...

रवी जी आप तो हमारा नौकरी का प्रार्थना पत्र ही हजम कर गये जी.म आधे पैसे मे भी तैयार है.ठेके पर सारा काम लेने कॊ

जोगलिखी संजय पटेल की said...

रवि भाई ऐसे ख़तरनाक आईडियाज़ को ई-मेल्स के ज़रिये व्यक्तिश: डिसकर कर लिया कीजिये...ब्लाँग पर सार्वजनिक करने की क्या ज़रूरत है..किसी मुकेश अंबानी ने पढ़ लिया तो रिलायंस फ़्रेश में दो किलो भिंडी दो टिप्पणी फ़्री करना शुरू कर दिया करेंगे..मामला ऐसा कमर्शियल भी है ये सोचा न था ...आज से तोल मोल के भाव से टिप्पणी प्रेषित किया करूंगा ...और हाँ अब ब्लाग के बजाय टिप्पणी में यदि माल मिलता है तो लिखने पढ़ने की अपनी बेवकूफ़ी को बंद कर सेलिब्रेटेड और प्रीमियम टिप्पणीकार बनना चाहूंगा ...आप थोड़ा ध्यान रखना जी छोटे भाई का.. बाक़ी आपस में समझ लेंगे.

राकेश खंडेलवाल said...

भाईजी ये सवा लाख मैं भेज रहा हूँ यहां टिप्पणी
अब बस जरा पता बतलायें, कहां हमें बिल भिजवाना है
एक बार पेमेंट मिले तो साख आपकी जम जायेगी
फिर बस इतना ही लिख भेजें कहां कहां पर टिपियाना है

Shrish said...

आइडिया तो सही है, जरा ये बताएँ कि टिप्पणीकर्ताओं का वेतनक्रम क्या है? :)

indscribe said...

آداب عرض
بہت عمدہ لکھا ہے

vaah Ravi ji. lijiye Urdu meN tippanii yaani ki 'tabsira' haazir hai.

Bhopal se Ratlam duur nahiiN...kabhi idhar bhi aaiye...