मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियम

मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियम

बिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण को यह कभी भी न पता चलने दें कि आप बहुत जल्दी में हैं.

(मरफ़ी के कुछ अन्य, मज़ेदार नियम यहाँ पढ़ें)

  • गलत निष्कर्ष पर पूरे विश्वास के साथ पहुँचने की व्यवस्थित विधि का नाम ही ‘तर्क' है.
  • जब किसी सिस्टम को पूरी तरह से पारिभाषित कर लिया जाता है तभी कोई मूर्ख आलोचक उसमें कुछ ऐसा खोज निकालता है जिसके कारण वह सिस्टम या तो पूरा बेकार हो जाता है या इतना विस्तृत हो जाता है कि उसकी पहचान ही बदल जाती है.
  • तकनॉलाज़ी पर उन प्रबंधकों का अधिकार है जो इसे समझते नहीं.
  • यदि बिल्डिंग बनाने वाले, प्रोग्राम लिखने वाले प्रोग्रामरों की तरह कार्य करते होते तो विश्व के पहले बिल्डर का पहला ही काम संपूर्ण समाज को नेस्तनाबूद कर चुका होता.
  • किसी संस्थान के फ्रंट ऑफ़िस की सजावट उसकी संपन्नता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
  • किसी कम्प्यूटर के कार्य का विस्तार उसके बिजली के तार के विस्तार जितनी ही होती है.
  • विशेषज्ञ वो होता है जो क्षुद्र से क्षुद्र चीजों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखता है. सही विशेषज्ञ वह होता है जो कुछनहीं के बारे में सबकुछ जानता है.
  • किसी आदमी को बताओ कि ब्रह्माण्ड में 300 खरब तारे हैं तो वो आपकी बात पर विश्वास कर लेगा. उसे बताओ कि किसी कुर्सी पर अभी अभी पेंट लगाया गया है और वह गीला है तो वह इसकी तसदीक के लिए छूकर अवश्य देखेगा.
  • विश्व की महानतम खोजों के पीछे मानवीय भूलों का ही हाथ रहा है.
  • कोई भी चीज नियत कार्यक्रम या निश्चित बजट में नहीं बन सकती.
  • मीटिंग में मिनट्स को रखा जाता है और घंटों को गंवाया जाता है.
  • प्रबंधन का पहला मिथक है - कि उसका का अस्तित्व है.
  • कोई यूनिट तब तक असफल नहीं होती जब तक कि उसका अंतिम निरीक्षण नहीं कर लिया जाता.
  • नए सिस्टम नई समस्याएँ पैदा करते हैं.
  • गलतियाँ करना मनुष्य का स्वभाव है, परंतु ढेरों, सुधारी नहीं जा सकने वाली गलतियों के लिए कम्प्यूटर की आवश्यकता होती है.
  • कोई भी उन्नत तकनीक जादू सदृश्य ही होती है जब तक कि वह समझ न ली जाए.
  • एक कम्प्यूटर मात्र दो सेकंड में उतनी सारी गलतियाँ कर सकता है जितना 20 आदमी मिलकर 20 वर्षों में करते हैं.
  • किसी व्यक्ति को कोई भी बात इससे ज्यादा प्रोत्साहित नहीं कर सकती - कि उसके बॉस ने किसी दिन घंटा भर ईमानदारी से काम किया.
  • कुछ व्यक्ति नियमबद्ध होते हैं - भले ही उन्हें यह नहीं पता होता कि नियम क्या हैं व किसने लिखे हैं.
  • फेब्रिकेटर के लिए मुश्किलें बढ़ाना तथा सर्विस इंजीनियर के काम को असंभव बनाना ही डिज़ाइन इंजीनियर का पहला काम होता है.
  • भीड़ में से विशेषज्ञ का पता लगाना मुश्किल नहीं. वह किसी कार्य को पूरा होने में सर्वाधिक समय व पैसा लगने की भविष्यवाणी करता दिखाई देता है.
  • कहने भर से कोई काम तो हो जाता है, मगर फिर उसके बाद और बहुत सा कहा जाता है जो होता नहीं
  • किसी भी नवीनतम सर्किट डिजाइन में एक भाग वो होता है जो कालातीत हो चुका होता है, दो भाग बाजार में उपलब्ध नहीं होता तथा तीन भाग विकास के चरणों में होते हैं.
  • कोई जटिल सिस्टम अंततः जब काम करने लगता है तो पता चलता है कि इसे तो एक कार्यशील सरल सिस्टम से ही बनाया गया है.
  • कम्प्यूटर अविश्वसनीय हैं, परंतु मनुष्य और ज्यादा अविश्वसनीय हैं. जो सिस्टम मनुष्य की विश्वसनीयता पर निर्भर है, वह अविश्वसनीय ही होगा.
  • यदि आप कुछ समझ नहीं पाते हैं तो वह आपकी अंतर्बुद्धि से प्रकट हो जाता है.
  • खरीदार संस्था का सचिव यदि आपसे जरा ज्यादा ही सहृदयता से पेश आता है तो यह समझें कि खरीद आदेश आपके प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने पहले ही हड़प लिया है.
  • किसी कंस्ट्रक्शन को डिजाइन करते समय, शनिवार 4.30 बजे के बाद उसके आयामों का सही योग नहीं निकाला जा सकता. सही योग सोमवार सुबह 9 बजे स्वतः सुस्पष्ट हो जाता है.
  • जो खाली है उसे ही भरें. जो भरा है उसे ही खाली करें. और जहाँ खुजली है, वहीं पर ही खुजाएँ.
  • दुनिया में सब संभव है, रिवॉल्विंग दरवाजे से होकर स्कीइंग को छोड़कर.
  • कठिन परिश्रम से नहीं, बल्कि चतुराई से काम करें तथा आपनी वर्तनि के प्रति सवधान रहे.
  • यदि यह गूगल में नहीं मिलता, तो फिर इसका अस्तित्व ही नहीं है.
  • यदि कोई प्रयोग सफल हो जाता है तो फिर कहीं कुछ गलत अवश्य है.
  • यदि सबकुछ असफल हो जाता है तो फिर निर्देश पढ़ें.
  • जो भी ऊपर जाता है, वह नीचे आता ही है - फिर भले ही वह सेंसेक्स क्यों न हो.
    उप प्रमेयर : परंतु हमेशा नहीं.
  • हाथों से छूटा औजार हमेशा कोने में वहां जा पहुँचता है जहाँ आसानी से नहीं पहुँचा जा सकता.
  • किसी भी सरल सिद्धान्त की व्याख्या अत्यंत कठिन तरीके से ही संभव है.
  • जब कोई सिस्टम इतना सरल बनाया जाता है कि कोई मूर्ख भी उसका इस्तेमाल कर सके, तो फिर उसका इस्तेमाल सिर्फ मूर्ख ही करते हैं.
  • तकनीकी दक्षता का स्तर, प्रबंधन के स्तर के उलटे अनुपात में होता है.
  • एक अत्यंत मुश्किल कार्य पूर्ण होने के ठीक पहले, एक अति महत्वहीन छोटे से विवरण की अनुपलब्धता के कारण रुक जाता है.
  • कोई भी काम भले ही पूरा हो जाता हो, परंतु उसे सही ढंग से पूरा करने के लिए कभी भी समय नहीं होता.
  • जैसे-जैसे अंतिम समय सीमा करीब आती है, वैसे-वैसे बचे हुए काम की मात्रा बढ़ती जाती है.
  • यदि कोई उपकरण खराब हो जाता है और उसकी वजह से काम अटकने लगता है, तो वह उपकरण तब ठीक होता है जब,
    1. उसकी आवश्यकता अब नहीं होती है
  • कोई दूसरा आवश्यक कार्य किया जा रहा होता है तब.
  • बिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण को यह कभी भी न पता चलने दें कि आप बहुत जल्दी में हैं.

  • यदि कोई उपकरण खराब नहीं हुआ है तो उसमें और सुधार न करें. आप उसे ऐसा खराब कर देंगे जो फिर कभी सुधारा नहीं जा सकेगा.
  • पटरी को देखकर आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि ट्रेन किस तरफ से आएगी
    यदि आप पूरी तरह से भ्रमित (कनफ़्यूजन में) नहीं हुए हैं तो इसका मतलब है कि आपको पूरी बात मालूम ही नहीं है.
  • मानक पुरजे नहीं होते हैं

  • हाथों से छूटा औजार किसी चलते उपकरण के ऊपर ही गिरता है.
  • नवीनतम तकनॉलाज़ी पर कभी भरोसा न करें. भरोसा तभी करें जब वह पुरानी हो जाए.
  • बोल्ट जो अत्यंत अपहुँच स्थान पर होता है, वही सबसे ज्यादा कसा हुआ मिलता है.
  • तकनॉलाज़ी और विज्ञान में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला वाक्यांश है - "उफ़ - ओह!"

  • तकनीशियन के मुँह से दूसरा सबसे बेकार शब्द आप सुनते हैं - "ओफ़!". पहला सबसे बेकार शब्द होता है "ओफ़! शि..ट"
  • किसी भी दिए गए सॉफ़्टवेयर को जब आप इस्तेमाल करने में दक्षता हासिल कर लेते हैं तो पता चलता है कि उसका नया संस्करण जारी हो गया है.

  • उप प्रमेय 1 - नए संस्करण में जो सुविधा आपको चाहिए होती है वह अभी भी नहीं होती
  • उप प्रमेय 2 - नए संस्करण में जिस सुविधा का इस्तेमाल आप बारंबार करते रहे होते हैं उसे या तो निकाल दिया जाता है या उसमें ऐसा सुधार कर दिया जाता है जो आपके किसी काम का नहीं होता.

  • आज के इनफ़ॉर्मेशन ओवरलोड के जमाने में सबसे आवश्यक तकनीकी दक्षता यह है कि हम जो सीखते हैं उससे ज्यादा भूलने लगें.
  • जटिल चीजों को सरलता से बनाया जा सकता है, सरल चीजें बनने में जटिल होती हैं

  • बन्दर के हाथ में आई-पॉड कोई काम का नहीं होता.

  • सुरक्षा का नियम: यदि आप किसी लाख रुपए के उपकरण को बचाने के लिए पाँच रुपए का फ़्यूज लगाते हैं तो आपके पाँच रुपए के फ़्यूज को जलने से बचाने के लिए आपका पाँच लाख का उपकरण पहले जल जाता है.

  • हर एक के बॉस के लिए हर कहीं लागू होने वाला नियम: बहते हुए गंदे नाले में कचरे के ढेर का सबसे बड़ा हिस्सा ही सबसे ऊपर आता है.
  • किसी समुद्री यात्रा में जहाज के पोरबंदर को छोड़ने के बाद ही कोई महत्वपूर्ण पुरजा खराब होता है, जो भंडार में नहीं होता है.

  • रखरखाव विभाग उपभोक्ता की शिकायतों को तब तक नजर अंदाज करते रहते हैं जब तक कि उपभोक्ता कोई नया खरीद आदेश न दे दे.

  • निरीक्षण की प्रत्याशा के महत्व के अनुसार ही किसी मशीन के खराब हो जाने की संभावना होती है.

  • यदि कोई नया सिस्टम सिद्धान्त में काम करेगा तो अभ्यास में नहीं और अभ्यास में काम करता है तो सिद्धान्त में नहीं.

  • आपकी खोज चाहे जितनी भी पूर्ण व बुद्धिमानी भरी हो, कहीं न कहीं कोई मौजूद होता है जो आपसे ज्यादा जानता है.

  • आसानी से सुधारी जा सकने वाली चीज़ें कभी खराब ही नहीं होतीं.

  • काटा गया कोई भी तार आवश्यक लंबाई में छोटा ही निकलता है.
  • जब आप अंतत: नई तकनॉलाज़ी को अपना लेते हैं, तब पता चलता है कि हर कहीं उसका सपोर्ट व इस्तेमाल बंद हो चुका है.
  • किसी परियोजना का प्रस्तावित आकार, उस परियोजना के अंतिम रुप में पूर्ण होने के आकार के व्युत्क्रमानुपाती होता है.
    कोई विचार जितना ही बुद्धिमानी भरा होगा, उतने ही कम उसे स्वीकारने वाले मिलेंगे.

  • जितना ज्यादा ज्ञान आप प्राप्त करते जाएंगे, आप उतना ही कम सुनिश्चित होते जाएंगे.
  • यदि आप सोचते हैं कि आप विज्ञान (या कम्प्यूटर या औरत) को समझते हैं, तो निश्चित रूप से आप विशेषज्ञ नहीं हैं.
  • सिर्फ तकनीशियन ही ऐसे हैं जो तकनॉलाज़ी पर किसी सूरत भरोसा नहीं करते.

  • सभी असंभव असफलताएँ जाँच स्थल पर ही होती हैं.
  • उप प्रमेय - सभी असंभव असफलताएँ ग्राहक यहाँ होती हैं.

  • किसी को आप जितना बेमुद्दत चाहते हैं कि वह इंस्टैंट मैसेंजर में उपलब्ध हो, उसके ऑफ़ लाइन होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है.
  • किसी उपकरण (या तकनीशियन) का उपयोग और कार्यकुशलता उसे दिए गए गालियों के सीधे अनुपात में होती है.
  • कोई बढ़िया, खराब न होने वाला पुर्जा असुरक्षित समझा जाकर कीमती, बारंबार सर्विस की आवश्यकता वाले पुर्ज़े से हमेशा बदल दिया जाता है.

  • खराब हो चुका पाँच रुपए कीमत का पुर्जा बदला नहीं जा सकता, परंतु उसे किसी सब-एसेम्बली से बढ़िया, कार्य-कुशल तरीके से बदला जा सकता है जिसकी कीमत मूल उपकरण से ज्यादा होती है.
  • किसी खराब पुरज़े की कीमत व उपलब्धता सम्पूर्ण सिस्टम की कीमत के व्युत्क्रमानुपाती होती है. पाँच रुपए का पुरज़ा पाँच लाख की मशीन को अनुपयोगी बना देता है.
  • पाँच लाख की मशीन का पाँच रुपए कीमत का खराब पुरज़ा बाजार में या तो उपलब्ध नहीं होता, उसका निर्माण बरसों पहले से बन्द हो चुका होता है और अंतत: अपने कई गुने कीमत से मेड टू आर्डर से बनवाया जाता है तो पता चलता है कि उस मशीन की जगह नई मशीन ने ले ली है.
  • सभी मेकेनिकल / इलेक्ट्रिकल उपकरण अपनी गारंटी अवधि अच्छी तरह से जानते हैं - वे इस अवधि के बाद ही फेल होते हैं.

  • तकनीशियन ने पहले कभी भी आपके जैसा मशीन नहीं देखा हुआ होता है.

  • तकनीशियन आपके मशीन को उसके जाने के तुरंत बाद या फिर बहुत हुआ तो, अगले दिन खराब होने के लिए ही ठीक करता है.
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  • मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ पढ़ें -

1 मरफ़ी के प्यारे नियम 2 मरफ़ी के भारतीय घरेलू महिलाओं के नियम 3 ये मरफ़ी कौन है?

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