रविवार, 11 जुलाई 2004

विश्व जनसंख्या दिवसः मेरा देश कहाँ जाएगा

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आज विश्व जनसंख्या दिवस है. मैंने अपनी पिछली किसी पोस्टिंग में इस बात का जिक्र
किया था कि भारत अपने असीमित संसाधनों के बावज़ूद कैसे बढ़ती जनसंख्या के सामने
पंगु और असहाय होकर संपूर्ण अराजकता की स्थिति में शीघ्र ही पँहुचने वाला है.
उदाहरण के लिए ही लें, तो रतलाम जिले की जनसंख्या पिछले दस वर्षों में २६% तक
बढ़ गई! जनसंख्या पर रोक प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए. जहाँ पढ़े लिखे मध्य उच्च
वर्ग में जनसंख्या वृद्धि पर रोक स्वैच्छिक हो रही है, बात दरअसल अनपढ़ ग़रीबों
की है जो अब भी यह समझते हैं कि घर में बच्चा पैदा होना ऊपर वाले ईशु, ईश्वर और
अल्लाह की देन है, और उस पर रोक लगाना बेमानी है. ऐसी स्थिति में चीन की तरह
जनसंख्या वृद्धि रोकने हेतु कड़े प्रतिबंध क़ानूनन लगाया जाना ज़रूरी है, और,
इसके अलावा क्या आपको लगता है कि भारत में कोई उपाय है भी?

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ग़ज़ल
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मेरा देश कहाँ जाएगा
भीड़ ले के मेरा देश कहाँ जाएगा
राह अपनी पकड़ वहाँ कहाँ जाएगा

कुछ तो ख़याल कर ले कल का
वरना परसों तू फ़िर कहाँ जाएगा

किसे चाह नहीं आबाद दुनिया पर
हर वक्त के मेले में कहाँ जाएगा

फ़िक्र कर वोटों के अलावा भी
तू तो गया तेरा पुत्र कहाँ जाएगा

सोचकर रवि होता है हलाकान
दहकता ये हादिसा कहाँ जाएगा

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1 blogger-facebook:

  1. जहाँ जा रहा है, फिलहाल
    वहीं जाएगा, वहाँ जाएगा।

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