कोई मेरा बिटक्वाइन लेगा?

हे! ईश्वर, तूने मुझे खूब बचाया। आगे भी बचाते रहना। जब बिटक्वाइन के रेट दिन दूने रात चौगुने हो रहे थे, तब लालच में पड़ने में देर नहीं थी और रोज गुजरते दिन अपने आप को कोसता था कि जब मेरे शहर के गली मुहल्ले में भी बिटक्वाइन खरीदने और बेचने वाले घूम रहे हैं तो मैं मूरख क्यों नहीं समझ रहा। पर, अच्छा ही हुआ मैं मूरख बना रहा। कभी-कभी होशियारी में नुकसान भी हो जाता है। बड़ा वाला। 😎

1 टिप्पणी

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति नमन - नामवर सिंह और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

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