आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 15

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडा अनुवाद – परितोष मालवीय व रवि-रतलामी   267 ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मे...

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

 

267

ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मेरा जीवन आराम से कट रहा है

सुकरात का ऐसा मानना था कि बुद्धिमान लोग सहज रूप से मितव्ययी जीवन व्यतीत करते हैं।

यद्यपि वे स्वयं जूते नहीं खरीदते थे पर प्रायः बाजार में जाकर दुकानों में सजाकर रखे गए जूते व अन्य चीजों को देखना पसंद करते थे।

जब उनके एक मित्र ने इसका कारण पूछा तो वे बोले - "मैं वहां जाना इसलिये पसंद करता हूं ताकि मैं यह जान सकूं कि ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मेरा जीवन आराम से कट रहा है। "

--

268

शेर और डॉल्फिन

समुद्र के तट पर चहलकदमी करते हुए शेर ने एक डॉल्फिन को लहरों के साथ अठखेलियाँ करते हुए देखा। उसने डॉल्फिन से कहा कि वे दोनों अच्छे मित्र बन सकते हैं।

"मैं जंगल का राजा हूँ और सागर पर तुम्हारा निर्विवाद राज है। यदि संभव हो तो हम दोनों एक अच्छा मित्रतापूर्ण गठजोड़ कर सकते हैं।"

डॉल्फिन ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। उनकी मित्रता होने के कुछ ही दिनों बाद शेर की भिडंत जंगली भैंसे से हो गयी। उसने डॉल्फिन को मदद के लिए पुकारा। डॉल्फिन भी शेर की मदद करना चाहती थी परंतु वह चाहकर भी समुद्र के बाहर नहीं जा सकती थी। शेर ने डॉल्फिन को धोखेबाज करार दिया।

डॉल्फिन ने कहा - "मुझे दोष मत दो। प्रकृति को दोष दो। भले ही मैं समुद्र में कितनी भी ताकतवर हूँ, पर मेरी प्रकृति मुझे समुद्र के बाहर जाने से रोकती है।"

"ऐसे मित्र का चुनाव करना चाहिए जो न सिर्फ आपकी मदद करने का इच्छुक हो

बल्कि ऐसा करने में सक्षम भी हो।"

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21

वह चाँदी चमकाने वाला

स्त्रियों का एक समूह अपने धर्मग्रंथों का अध्ययन कर रहा था. एक अध्याय में एक पंक्ति थी – “वह चाँदी चमकाने वाले जैसा बैठेगा.”

यह पंक्ति बहुतों को समझ में नहीं आई. उनमें से एक ने कहा कि वो इसके बारे में और जाँच पड़ताल करेगी और समझने की कोशिश करेगी.

दूसरे दिन वह एक सुनार के पास गई, और उससे चाँदी चमकाने की प्रक्रिया के बारे में पूछा और उस प्रक्रिया को देखना चाहा.

उसने देखा कि सुनार गंदे काले पड़ चुके चाँदी के गहनों को तेज आग में जला रहा है ताकि उसकी गंदगी जल जाए. इस क्रिया को करते समय वह सुनार पूरे समय गहनों पर ध्यान लगाए हुए था और उलट पुलट कर गहनों को तपा रहा था.

जब चाँदी के गहनों की गंदगी जल गई तो उनमें निखार आ गया. उनकी चमक पुनर्जागृत हो उठी. उन गहनों में सुनार की छवि दिखाई देने लगी.

तो यह बात है. ईश्वर भी चाँदी चमकाने वाले की तरह है. हम सदैव ईश्वर के हाथों में होते हैं. वह सुख दुःख से हमें तपाता है और हमारी आत्मा को चमकाता है. जिस दिन हमारी आत्मा में ईश्वर की छवि निखर आएगी, समझिए कि हमें मुक्ति, उद्धार मिल गया.

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

COMMENTS

BLOGGER: 10
  1. आपकी सिफारिश पर इस किताब को खरीद कर पढ़ रहा हूं। अच्छी लग रही है।

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  2. आज समझ में आया कि संभवतः इसीलिये मैं भी बाजार जाता हूँ।

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  3. thanks for the translation.. these are relly great stories.... enjoying...

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  4. शेर और डाल्फिन वाली कथा प्रेरक नहीं है।

    जवाब देंहटाएं
  5. मौका लगा तो देखेंगे

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  6. ओह्ह हम तो कब से ही जिंदा रहने वाली आवश्यक वस्तुओं पर ही जीवित थे, अब थोड़े बहुत शौक पाल लिये हैं ।

    और मित्रता की बात बिल्कुल सही है, मित्रता केवल दिखावा नहीं है, उसे निभाना भी होता है।

    तीसरी कहानी से बहुत प्रभावित हैं।

    जवाब देंहटाएं
  7. "ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मेरा जीवन आराम से कट रहा है" mujhe ye kahani bahut pasand aayi...Sukarat ka Jeevan ek behatarin pustak se kam nahi hai jo hame jeevan ke har path ko padha sakti hai...

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