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अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता

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पिछले दिनों चिट्ठों के आचार संहिता बनने बनाने व उन्हें अपनाने पर खूब बहसें हुईं. इसी बीच चिट्ठाकारों के अनाम -बेनाम-कुनाम मुखौटों पर...

पिछले दिनों चिट्ठों के आचार संहिता बनने बनाने व उन्हें अपनाने पर खूब बहसें हुईं. इसी बीच चिट्ठाकारों के अनाम -बेनाम-कुनाम मुखौटों पर भी खूब जमकर चिट्ठाबाजी हुई.

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए इस ‘अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता' की रचना की गई है. सभी हिन्दी चिट्ठाकारों को इन्हें मानना व पालन करना घोर अनिवार्य है. अन्यथा उन्हें चिट्ठाकार बिरादरी से निकाल बाहर कर दिया जाएगा और उनका सार्वजनिक ‘चिट्ठा' बहिष्कार किया जाएगा.

  • चिट्ठे विवादास्पद मुद्दों पर ही लिखे जाएँ. मसलन धर्म, जाति, आरक्षण, दंगा-फ़साद इत्यादि. इससे हिन्दी चिट्ठों का ज्यादा प्रसार-प्रचार होगा. सीधे सादे सरल विषयों पर लिखे चिट्ठों को कोई पढ़ता भी है? अतः ऐसे सीधे-सरल विषयों पर लिख कर अपना व पाठकों का वक्त व नारद-ब्लॉगर-वर्डप्रेस का रिसोर्स फ़ालतू जाया न करें. इस तरह के सादे चिट्ठों की रपट ब्लॉगर और वर्ड प्रेस को एब्यूज के अंतर्गत कर दी जाएगी और उस पर बंदिश लगाने की सिफ़ॉरिश कर दी जाएगी.
  • अखबारी-साहित्यिक-संपादित तरह की तथाकथित ‘पवित्र' भाषा यहाँ प्रतिबंधित रहेगी. हर तरह का भाषा प्रयोग यहाँ न सिर्फ स्वीकृत बल्कि अनिवार्य होगा. फ़ूहड़, गाली-ग़लौज से भरे भाषाओं को चिट्ठा-चर्चा में विशेष तवज्जो दी जाएगी. अब ये अलग बात है कि चिट्ठा-चर्चा क्यों और किसलिए है ये कुछ चिट्ठाकारों को जल्दी से समझ नहीं आए. और ऐसे नासमझ चिट्ठाकारों को समझ आते तक दिन में दो बार चिट्ठा-चर्चा पढ़ना अनिवार्य होगा, और उन्हें अपने चिट्ठों पर ‘चिट्ठा-चर्चाओं' की नियमित ‘चर्चा' करना घोर अनिवार्य होगा.
  • चिट्ठों का स्वरूप है - अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता. चिट्ठाकार एक-दूसरे पर कीचड़-नुमा चिट्ठे उछालने को न सिर्फ स्वतंत्र हैं, बल्कि साल में ऐसे तीन चिट्ठापोस्ट करना अनिवार्य है जिसमें वे साथी चिट्ठाकारों की जमकर व्यक्तिगत भद पीटें. अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता को बनाए रखना हर चिट्ठाकार का न सिर्फ अधिकार है, बल्कि उसका कर्तव्य भी है.
  • अनाम-बेनाम-कुनाम चिट्ठाकारी प्रतिबंधित रहेगी. हर चिट्ठाकार को नाम रखना होगा - जे. एल. सोनारे - 001, जे. एल. सोनारे - 002 इत्यादि, इत्यादि. जिन चिट्ठाकारों ने प्रसिद्धि की चाह में अपने वास्तविक नाम रख छोड़े हैं उन्हें अपना वास्तविक नाम छः माह के भीतर हटाना होगा और नया नाम रखना होगा.
  • चिट्ठाकारों को पहचान हेतु फ़ोटो चिट्ठों के बाजू में प्रोफ़ाइल में लगाना अनिवार्य होगा. चिट्ठाकारों के खुद के फ़ोटो जरूरी नहीं हैं, बल्कि उन्हें अत्यंत अनावश्यक माना जाएगा. जिन चिट्ठों में चिट्ठाकारों के स्वयं के फ़ोटो लगे हैं उन्हें विज्ञापन माना जाएगा और उन्हें हटाने के लिए छः माह का समय दिया जाएगा. ऐसा न करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा. पहचान हेतु कुछ इस तरह के या कुछ उस तरह के चित्रों की अनुशंसा की जाती है. वैसे, जगदीश भाटिया का चित्र भी लगाया जा सकता है (नंबर 001, 002 इत्यादि लगाकर), चूंकि हिन्दी चिट्ठा जगत् में एक अकेले वे ऐसे महापुरुष हैं जिनका चिट्ठा तो क्या, उनका फ़ोटो ही चोरी चला गया था , ऊपर से चोर कोई देसी नहीं, विदेसी बंधु था!
  • जिन चिट्ठाकारों ने अपने चिट्ठों में विज्ञापन भर रखे हैं उन्हें अपने चिट्ठे विज्ञापनों से खाली करने होंगे. ऐसे समस्त विज्ञापन उन चिट्ठों में रखना अनिवार्य होगा जिनके चिट्ठाकार विज्ञापनों से चिढ़ते हैं, खौफ़ खाते हैं. इंटरनेट इज ग्रेट लेवलर. इस तरह से, हिन्दी चिट्ठों का हिसाब बराबर किया जाएगा.
  • कुछ समय पहले चिट्ठा-चोर आया चिट्ठा-चोर आया का बड़ा हल्ला मचा था. इस तरह की समस्याओं का परमानेंट समाधान करने के लिए समस्त हिन्दी चिट्ठों पर मौलिक लेखन की तत्काल पाबंदी लगाई जाती है. अब चिट्ठों में जो भी लिखा जाएगा, वह चोरी की, कटपेस्ट और कॉपी पेस्ट सामग्री होगी. चोरी कर लिखी सामग्री की चोरी की फिर कोई चिंता नहीं होगी. जो चिट्ठाकार मौलिक सामग्री का प्रयोग करता पाया जाएगा, उस पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाएगा.
  • सौम्य भाषाओं में लिखी टिप्पणियाँ मॉडरेट कर दी जाएंगीं व उन्हें तत्काल कूड़ेदान में डाल दिया जाएगा. तल्ख़, उत्तेजक, गाली-गलौज से भरपूर टिप्पणियाँ लिखें, व्यक्तिगत छींटाकसी करती हुई टिप्पणियाँ लिखें. ऐसी टिप्पणी लिखें कि सामने वाले का ख़ून खौल उठे और वह भी उतनी ही उत्तेजक प्रति टिप्पणी लिखे और अन्य चिट्ठा लेखक-पाठक भी प्रति टिप्पणी या प्रति-चिट्ठापोस्ट लिखने को प्रेरित हों. पोस्ट को पढ़े बिना ही उसके असली पाठ के मतलब को समझे बिना ही टिप्पणी करने से भाषा में और तल्ख़ी आती है यह ध्यान रखें.

'अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता' की रचना लगातार जारी है. समयानुसार नियम बनते बिगड़ते रहेंगे. अपने उत्तम विचारों से अवश्य अवगत करावें ताकि इसे पूर्णता प्रदान की जा सके.

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छींटे और बौछारें: अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता
अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता
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