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ये टोरेंट टोरेंट क्या है?

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ये खबर, वैसे भी भ्रमित करने वाली है कि किसी टोरेंट को क्लिक करने पर भी 3 साल की जेल होगी. जिस किसी ने भी यह समाचार लिखा, संपादित किया और प्रकाशित किया है, उसकी तकनीकी दक्षता पर प्रश्नचिह्न तो है ही, पर यह बात भी सही है कि (खासकर तकनीकी मामले में) हर कोई हर किसी चीज के बारे में जानकारी नहीं रख सकता. यदि मैं किसी चिकित्सकीय विषय पर कुछ लिखूं (लिखने लगूं?), तो शायद ऐसे ही भ्रमित करने वाले लेख लिखूं! -क्योंकि चिकित्सा विज्ञान के मामले में मेरी जानकारी और ज्ञान सतही किस्म का और सुनी सुनाई बातों का ही है.

बहरहाल, बिटटोरेंट / टोरेंट प्रोग्राम और टोरेंट फ़ाइलें पूरी तरह कानूनी है, और इसके उपयोग से किसी तरह का – एक बार फिर – किसी तरह का कोई कानून नहीं टूटता है, और न कोई सज़ा हो सकती है.

सज़ा का प्रावधान तभी लागू होगा जब आप टोरेंट से किसी अवैधानिक, गैरकानूनी, कॉपीराइट वाली सामग्री को डाउनलोड करें और उसका उपयोग करें, और कोर्ट में यह साबित हो जाए कि आपने ऐसा किया है.

ध्यान दें कि वैधानिक टोरेंट प्रोग्रामों – जैसे कि म्यूटोरेंट जैसे पर किसी तरह का प्रतिबंध न तो लगाया गया है और न ही लगाया जा सकता है. टोरेंट की तकनीक पर भी कोई प्रतिबंध न तो लगाया जा सकता है और न लगाया गया है. माइक्रोसॉफ्ट जैसी नामी कंपनी वर्तमान में विंडोज 10 के अपग्रेड के लिए इसी – टोरेंट जैसी तकनीक का ही प्रयोग कर रही है ताकि संसार के सभी कंप्यूटर विंडोज 10 पर तेजी से अपग्रेड हो जाएँ वह भी उसके सर्वर पर बिना अधिक लोड पड़े!

तो, आप भी टोरेंट का भरपूर उपयोग करें, पर हाँ, ध्यान ये रखें कि अवैधानिक सामग्री, कॉपीराइट सामग्री आदि डाउनलोड न करें. सज़ा का प्रावधान ऐसी सामग्री को डाउनलोड करने व उपयोग करने पर ही है / हो सकता है.

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चित्र - इंटरनेट की एक महत्वपूर्ण, लोकप्रिय साइट आर्काइव.ऑर्ग की सार्वजनिक उपलब्ध वैध टोरेंट फ़ाइल - हिंदी साहित्य की पत्रिका विविधा की टोरेंट फ़ाइल का डाउनलोड विकल्प.

इस टोरेंट फ़ाइल का लिंक  -

https://archive.org/download/Vividha2nd20151/Vividha2nd20151_archive.torrent

भी पूरी तरह वैधानिक है और आप भी इस टोरेंट लिंक में उपलब्ध टोरेंट सामग्री को टोरेंट क्लाएंट / ब्राउजर प्लगइन / ऐप्प से बिना किसी कानूनी कार्यवाही की चिंता के डाउनलोड कर सकते हैं. और, ऐसी करोंडों वैध, क्रिएटिव कॉमन्स और सार्वजनिक, ओपन-सोर्स वितरण की टोरेंट फ़ाइलें आम जन के मुफ़्त - निःशुल्क उपयोग के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध हैं.

 

टोरेंट (इंडैक्स करने वाली) साइटों को बंद करने में भिन्न देशों की सरकारी एजेंसियों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने भिन्न-भिन्न रुख अपनाया है. भारत में ताजा प्रतिबंध इंटरनेट के प्रमुख गुण – खुलापन के विपरीत है, जिसका विरोध किया जाना चाहिए. टोरेंट साइटों में अवैधानिक सामग्री होती है तो वैधानिक सामग्री भी भरपूर होती है. आर्काइव.ऑर्ग में अब ज्यादातर क्रियेटिव कॉमन्स और सार्वजनिक डोमेन की फ़ाइलें भी टोरेंट के जरिए उपलब्ध हो रही हैं तो ऐसे में टोरेंट इंडैक्स करने वाली साइटों – जिनका मुख्य काम गूगल जैसे सर्च कर इंडैक्स करना ही है, प्रतिबंध करना तो शुतुरमुर्गी चाल ही है. साथ ही, अवैधानिक सामग्री डाउनलोड पर प्रतिबंध के नाम पर लोकप्रिय और प्रचलित टोरेंट साइटों पर प्रतिबंध लगाकर वहाँ उपलब्ध वैधानिक सामग्रियों के टोरेंट लिंक पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो अस्वीकार्य है. वैसे भी, एक टोरेंट साइट पर प्रतिबंध लगाओ, दो पर लगाओ. यहाँ तो हर दूसरे दिन ऐसी प्रतिबंधित साइटों के दर्जनों क्लोन और मिरर साइटें बन जाती हैं तो कितने पर प्रतिबंध लगाएंगे? इंटरनेट के खुले पन में ऐसा करना संभव ही नहीं है.

उदाहरण के लिए, यदि हम कहानी टोरेंट से गूगल में सर्च करते हैं तो तमाम ऐसे हजारों प्रतिबंधित-अप्रतिबंधित टोरेंट लिंक वैसे भी मिल जाते हैं -

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अब, क्या कोई गूगल पर प्रतिबंध लगा सकता है भला?

कहा जा रहा है कि इस तरह के प्रतिबंध से फ़िल्मों आदि की पाइरेसी रुकेगी. पर यह तो और भी हास्यास्पद है. आप भारत के किसी भी शहर के किसी भी व्यस्त स्ट्रीट मार्केट में चले जाएं. ठेलों पर खुलेआम तमाम नई पुरानी भारतीय/हॉलीवुडी फ़िल्में 5 रुपल्ली में एक के भाव में मिलती हैं - जी हाँ, एक डीवीडी 20 रुपए में मिलती है, और उसमें अमूमन 4-5 फ़िल्में होती हैं. और, मैं शर्त लगा सकता हूं कि भारत के अधिकांश घरों में न्यूनतम दर्जन भर ऐसी सीडी-डीवीडी अवश्य निकल आएंगी. इनका क्या?

 

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म्यूटोरेंट से डाउनलोड होता वैध फ़ाइल - विविधा साहित्यिक पत्रिका की पीडीएफ फ़ाइल - वैध साइट - आर्काइव.ऑर्ग से, जो कि न केवल सार्वजनिक फ़ाइलों के टोरेंट लिंक भी होस्ट करती है, इन फ़ाइलों को टोरेंट में बदल कर जारी भी करती है. पूरी तरह से वैध.

 

और, वैसे भी, जब इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की दुनिया दिनोंदिन होशियार होती जा रही है तो ऐसी साइटों पर प्रतिबंध लगाना और डुगडुगी बजाना और बड़ी मूर्खता है. टोरेंट उपयोगकर्ताओं के अधिकांश हिस्से को पता है कि वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्किंग) का उपयोग कर ऐसे किसी भी प्रतिबंधित साइटों को कहीं से भी खोला और उपयोग किया जा सकता है – वह भी पकड़ में आए बिना, क्योंकि वीपीएन का प्रयोग करने पर आपके वास्तविक आईपी एड्रेस (जिसके जरिए कंप्यूटर उपयोगकर्ता पर पहुँचा जा सकता है) को ट्रेस करना बेहद मुश्किल होता है. और अब तो मुख्यधारा के वेबब्राउज़र – जैसे कि ओपेरा – अंतर्निर्मित वीपीएन के साथ आ रहे हैं – जिसका उपयोग आप इन प्रतिबंधित टोरेंट वेबसाइटों को खोलने के लिए धड़ल्ले से कर सकते हैं.

मैं अपनी बात कहूं? मैं इंटरनेट के भारत (मेरे शहर में,) में आगमन से इसका उपयोग करता आ रहा हूँ, और आगे भी करता रहूंगा. वैधानिक. कॉपीलेफ्ट, क्रिएटिव-कॉमन्स की सामग्री को डाउनलोड करने का इससे सस्ता सुंदर, तेज और टिकाऊ तरीका और कोई नहीं हो सकता.

टोरेंट जिंदाबाद!

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