सोमवार, 7 जनवरी 2013

ओह, तो यह है संकट की असली वजह!

बहुधा, असली वजहें कुछ और ही होती हैं.

अगर आपको याद होगा तो पिछले पूरे वर्ष भर बारदाना का भारी संकट रहा. गेहूं की फसल जब पक कर तैयार हुई तो उसके भंडारण के लिए बारदाना ढूंढे नहीं मिल रहा था. और, जैसी कि परंपरा है, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो सीधे केंद्र पर आरोप लगा दिया कि बारदाना का संकट उसकी वजह से हो रहा है. और लगता है यह समस्या इस वर्ष भी जारी रहेगी, आरोपों प्रत्यारोपों की झड़ी इस वर्ष भी चलती रहेगी.

ख़ैर, यह तो राजनीति की बात है.

और, लगता है असली वजह कुछ और है. ये देखें -

Image007 (Mobile)

मखमल में टाट का पैबंद? अरे, ये तो पूरा टाट ही टाट है. मेरा मतलब, बारदाना के ठाठ हैं.

image

अब जब फ़ैशनों में, परिधानों में बारदाना का प्रयोग धड़ल्ले से होगा, सुंदरियाँ और भद्र पुरुष अपने परिधान बारदाना के कपड़े से बनवा कर शान बघारते फिरेंगे तो बेचारे इंडियन गेहूं को तो खुले आसमान में नग्न ही सोना, सड़ना पड़ेगा!

 

मैंने भी एक जोड़ा बारदाना ड्रेस सिलवाने का आदेश दे दिया है. इन्हें पहन कर मैं भी फैशन परस्त और स्मार्ट होने की कोशिश तो कर ही सकता हूँ. और बारदाना की और अधिक कमी हो तो मेरी बला से!

11 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. sureshchandra.karmarkar@gmail.com6:09 pm

    INDIA IS A NATION OF DIVERSITIES. ONE SAINT I WILLNOT NAME FOR MY SECURITY ,ADVOCATES WEARING THE CLOTHES MADE OF GUNNY BAGS.THIS PRACTICE ALSO BRINGS THE SHORATGE .

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  2. हमारा अन्न सड़ रहा है और इन्हें फ़ैशन सूझ रहा है।

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  3. चचा ग़ालिब फरमा गए थे:
    " नक्श फरयादी है किसकी शोखी-ए-तहरीर का [?] (रविजी की तहरीर का तो नहीं?)
    कागज़ी है पैरहन हर पैकरे तस्वीर का."

    आज चचा कुछ यूँ फरमाते:

    "नक्श ही दिखते नही मोटा बहुत है पैरहन,
    'बारदानी' पैरहन है पैकरे इस दौर का !"

    http://aatm-manthan.com

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  4. ये बारदाना क्या होता हैँ ।

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    1. बारदाना = जूट के कपड़े से बना बड़ा थैला (बोरा) जिसमें शक्कर, गेहूं, सीमेंट इत्यादि रखे जाते हैं.

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  5. आपकी इस पहल से कहीं 'वे सब' टाट से तौबा न कर लें। तब, आपका टाट पहनना इस मायने में लाभदायक होगा कि बारदाना कम नहीं पडेगा।

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  6. लाजवाब जानकारी के लिए आभार ...

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  7. केवल ड्रेस मेटीरियल नहीं,जूटके रेशों से बुने अन्य वस्त्र(पर्दे सोफ़े के कवर आदि भी)सुंदर ,सस्ते ,आकर्षक ,मज़बूत और टिकाऊ होते हैं ,ऊपर से प्राकृतिक वस्तु होने का ठप्पा!

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