माइक्रोसॉफ़्ट की नई ऑनलाइन ईमेल सेवा : आउटलुक.कॉम - क्या यह हम हिंदी वालों के लिए काम का है?

माइक्रोसॉफ़्ट ने हॉटमेल को री-ब्रांड कर एक नया अवतार दिया है. आउटलुक.कॉम के नाम से. उद्योग के पंडित इसे जीमेल का तोड़ और बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करने में जुटे हैं. मैंने भी इसकी थोड़ी जांच परख की.

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विस्तृत समीक्षा नीचे है -

अगर आपके पास विंडोज लाइव खाता है या हॉटमेल का खाता है तो आपको आउटलुक.कॉम के लिए अलग से नया खाता बनाने की जरूरत नहीं है. आप आउटलुक.कॉम पर इन खातों से लॉगइन कर सकते हैं. वस्तुतः यदि आपका हॉटमेल खाता है तो आपसे पूछा जाता है कि आप नया आउटलुक.कॉम वाला इंटरफेस रखना चाहेंगे या पुराना हॉटमेल का इंटरफेस. अब चूंकि नया आउटलुक.कॉम का इंटरफेस साफ सुथरा है तो अधिकांश जनता इसे ही चुनेगी. और यह एक बड़ी वजह है कि आउटलुक.कॉम की प्रशंसा के गीत गाए जा रहे हैं.

 

मैंने आउटलुक का थोड़ा सा प्रयोग करने की कोशिश की तो पाया कि ये तो हम हिंदी वालों के लिए तो बिलकुल बेकार है. और जीमेल के सामने तो अभी इसमें हिंदी संबंधी कोई भी सुविधा नहीं.

 

  • हिंदी लिखने के लिए अंतर्निर्मित औजार नहीं - जीमेल में आपको ट्रांसलिट्रेशन के जरिए हिंदी लिखने की सुविधा मिलती है. आउटलुक में अभी यह सुविधा नहीं है, और शायद आगे भी न मिले. माइक्रोसॉफ़्ट कहेगी - आईएमई इंस्टाल करो भई! परंतु यह कोई उत्तर नहीं है. आप एण्ड्राइड और टैबलेटों में जब काम करते हैं तब यह सुविधा तो आपके लिए देवदूत की तरह होती है.
  • हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा नहीं - जीमेल में आपको हिंदी वर्तनी जांच की अंतर्निर्मित सुविधा मिलती है. आउटलुक में यह नहीं है और शायद आगे भी न मिले, क्योंकि माइक्रोसॉफ़्ट अपनी व्यापारिक रणनीति के तहत इन अतिरिक्त सुविधाओं को विक्रय कर पैसे बनाता है.
  • हिंदी भाषा में उपलब्ध नहीं - जीमेल में हिंदी का भरा पूरा समर्थन है. हॉटमेल की सेटिंग में ढेर सारी भाषाओं सहित हिंदी भाषा का भी समर्थन मिलता है.  परंतु आउटलुक.कॉम में बहुत सी भाषाओं को अभी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. हिंदी भाषा का समर्थन भी नदारद है. अलबत्ता यदि आपने अपने हॉटमेल खाते में हिंदी को सक्षम बनाया हुआ है और आप आउटलुक का विकल्प चुनकर आउटलुक.कॉम में आते हैं तो हिंदी सुविधा आपको उपलब्ध रहती है. परंतु यहाँ भी अनुवादों में भारी गलतियाँ है और बेहद घटिया किस्म का, चलताऊ किस्म का अनुवाद है जिसे आप चित्र में लाल पेन से चिह्नित किया देख सकते हैं.

 

कुल मिलाकर गूगलमेल के सामने आउटलुक.कॉम मेल अपन हिंदी वालों के लिए कोई काम का नहीं. भले ही बाकी अन्य सुविधाओं, ओएस इंटीग्रेशन, सिंक्रोनाइजेशन इत्यादि में, लोगों के मुताबिक, बाजी मार ले जाए!

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important and basic knowledge THANKS.

हिन्दी बिना सब सूना..

कल 06/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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