टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

एक शाम कन्याकुमारी के नाम

कन्याकुमारी में विराट, अनंत समुद्र में से सूर्योदय और सूर्यास्त को देखने का अपना अलग अनुभव है. इन चित्रों से उस माहौल की कल्पना आप भी कर सकते हैं -

कन्याकुमारी कन्याकुमारि kanyakumari

 

 

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अद्भुत और रहस्यपूर्ण

और एक लंगोट भी :)

अपलक निहारे जानेवाले ये द़ष्‍य दो बार देखने का अवसर मिला है। अद्भुत होता है यह दृष्‍य। अवर्णनीय।

यह किस कवि की कल्पना का चमत्कार है?

बढिया फोटो हैं।

ब्लॉग बुलेटिंग में एक बार फिर से हाज़िर हुआ हूँ, एक नए बुलेटिन "जिंदगी की जद्दोजहद और ब्लॉग बुलेटिन" लेकर, जिसमें आपकी पोस्ट की भी चर्चा है.

सूर्यास्त के शानदार नज़ारे .

सूर्योदय के समय तीनों सागर अलग अलग नज़र आते हैं , टिप ऑफ़ इंडिया पर खड़ा होकर देखने से .

प्रकृति का निःशब्‍द पाठ.

हम भी आज कन्याकुमारी में ही है ।

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