116 आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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गरीब स्त्री का दान

यीशु मसीह देवालय में बैठे थे. वहां दान पात्र में भक्तगण अपने सामर्थ्यानुसार सिक्के डाल रहे थे. अमीर अपने बटुए खोलते और खनखनाते सोने की अशर्फियों में से कुछ निकालते और गर्व से कुछ इस तरह पात्र में डालते कि लोगों को एकाध झलक तो मिल ही जाए.

इतने में एक गरीब स्त्री वहाँ आई. उसने अपनी मुट्ठी में तांबे का एक सिक्का दबा रखा था. वह बड़ी देर से हिम्मत जुटा रही थी कि अशर्फियों के दान के बीच वह अपना तांबे का सिक्का डाले तो कैसे.

अंततः उसने थोड़ी हिम्मत दिखाई और जब दानपात्र के पास कोई नहीं था तो उसने चुपके से वह पैसा दानपात्र में डाल दिया.

यीशु बड़ी और उनके अनुयायी दूर से उस स्त्री को देख रहे थे, जबकि उस स्त्री को इसका भान नहीं था. यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा – ईश्वर इस स्त्री के एक सिक्के से ज्यादा प्रसन्न होगा बजाए उन धनिकों की अशर्फियों से.

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अच्छे शासन के मूलभूत तत्व

कन्फ़्यूशियस से उसके एक शिष्य ने एक बार पूछा – “अच्छे शासन के मूलभूत तत्व क्या हैं?”

कन्फ़्यूशियस ने उत्तर दिया – “भोजन, हथियार और जनता का विश्वास.”

“परंतु इनमें से यदि किसी एक चीज को आपको हटाने को कहा जाए तो आप किसे हटाएंगे?”

“हथियारों को”

“और बाकी दो में से भी किसी एक को हटाने कहा जाए तो?”

“भोजन”

“परंतु भोजन के बगैर तो जनता जिंदा कैसे रहेगी!”

“जनता अपने भोजन का जुगाड़ तो कर ही लेगी, परंतु सरकार यदि जनता का विश्वास खो देगी तो वह खुद समाप्त हो जाएगी.”

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तुर्की भाषा में पत्र

एक दिन नसरूद्दीन कहीं जा रहा था तो एक आदमी ने उसे रोका और एक पत्र थमाते हुए पूछा कि क्या वो यह पत्र पढ़ सकता है, क्योंकि यह पत्र तुर्की भाषा में है और वो तुर्की भाषा पढ़ नहीं सकता.

नसरूद्दीन ने वह पत्र उस आदमी के हाथ से लिया और पढ़ना चाहा. परंतु वह भी तुर्की नहीं पढ़ सकता था. अतः उसने उस आदमी से कहा – माफ करना भाई, मैं भी इसे नहीं पढ़ सकता. मुझे भी तुर्की नहीं आती.

उस आदमी को गुस्सा आ गया. उसने नसरूद्दीन से गुस्से से कहा – यदि तुम्हें तुर्की नहीं आती है तो तुमने ये तुर्की टोपी क्यों पहनी हुई है?

इस पर नसरूद्दीन ने मुस्कुराते हुए कहा – यदि तुर्की टोपी पहनने से तुर्की पढ़ी जा सकती हो तो यह टोपी तुम पहन लो!

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सफल जीवन के सूत्र

एक बार एक व्यवसायी ने एक प्रसिद्ध संत से पूछा कि सफल जीवन का सूत्र क्या है.

संत ने जवाब दिया – प्रतिदिन एक व्यक्ति को प्रसन्न करो.

फिर कुछ देर ठहर कर संत ने आगे जोड़ा – यदि वह व्यक्ति आप स्वयं हो तब भी.

और फिर एक पल बाद आगे कहा – यदि वह व्यक्ति आप हैं तब तो विशेष रूप से.

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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अच्छे शासन के मूलभूत तत्त्व
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