सोमवार, 2 जनवरी 2012

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 49

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

331

कंजूस

एक कंजूस ने अपनी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सारी संपत्ति बेचकर एक सोने की ईंट खरीद ली और उसे मैदान में एक जगह छुपा दिया। वह अक्सर उस जगह जाकर निरीक्षण करता रहता कि ईंट सुरक्षित है या नहीं। उसके इस व्यवहार पर उसके एक नौकर को शक हो गया कि उसने उस जगह खजाना छुपा रखा है।

जब वह कंजूस व्यक्ति वहां से चला गया तो पीछे से नौकर ने सोने की ईंट को चुरा लिया।

कुछ देर बाद जब वह कंजूस उस जगह पहुंचा तो उसने पाया कि ईंट चोरी हो चुकी है। वह चिल्ला - चिल्ला कर रोया और अपने बाल नोंच लिये। इस घटना के गवाह उसके पड़ोसी ने उसे समझाते हुए कहा - "तुम्हें ज्यादा पछताने की आवश्यकता नहीं है। उस जगह वह केवल एक पत्थर रख दो और यह कल्पना करो कि यही सोने की ईंट है। जब तुम्हें उस सोने की ईंट का प्रयोग ही नहीं करना था, तो पत्थर और सोने की ईंट में भला क्या फर्क?"

"धन का मूल्य उसके संचय में नहीं, बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग में है।"

332

सबसे बड़ा आदमी

चीन के राजा ने प्रसिद्ध चीनी गुरू कन्फ्यूशियस को अपने पास बुलाया और पूछा - "तुम किसे सबसे बड़ा आदमी समझते हो?"

कन्फ्यूशियस ने कहा - "निश्चित रूप से आप ही सबसे बड़े हैं। क्योंकि आप इतने बड़े साम्राज्य को चलाते हैं और इतने अधिक व्यक्तियों को आदेश देते हैं।"

राजा ने कहा - "और तुम मुझसे बड़ा किसे समझते हो?"

कन्फ्यूशियस ने कहा - "मैं अपने आप को आपसे बड़ा समझता हूँ क्योंकि मैं सत्य का पुजारी हूँ।"

राजा ने फिर कहा - "तब मुझे उस व्यक्ति के पास ले चलो जो हम दोनों से भी बड़ा हो।"

वे दोनों साथ में ऐसे व्यक्ति की तलाश में निकले। उनकी तलाश तब पूरी हुई जब उन्हें एक ऐसा आदमी मिला जो अकेले ही कुंआ खोद रहा था। उसे देखकर कन्फ्यूशियस ने कहा - "वह है सबसे बड़ा आदमी। वह व्यक्ति किसी राजा और दार्शनिक से बड़ा है। पूरे धैर्य के साथ वह अकेला ही कुंआ खोद रहा है। ऐसा वह सिर्फ अपनी प्यास बुझाने के लिए नहीं कर रहा बल्कि वह कई व्यक्तियों की प्यास बुझाने के लिए कर रहा है। केवल वही व्यक्ति सबसे बड़ा कहा जा सकता है जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा में अपना जीवन व्यतीत करता है।"

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84

सब सही सही

एक बार मुल्ला नसरूद्दीन को न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठाया गया कि वो न्याय दे सके.

मुल्ला के पास पहला केस आया. वादी ने अपने तमाम तर्क वितर्क मुल्ला के सामने रखे.

मुल्ला ने कहा – “हाँ, तुम सही हो”

इस पर प्रतिवादी चिल्लाया – “योर ऑनर, आप मेरी बात सुने बगैर वादी की बात को कैसे सही ठहरा सकते हैं?” और उसके बाद प्रतिवादी ने मुल्ला के सामने अपने तर्क वितर्क रखे.

मुल्ला ने कहा – “हाँ, तुम भी सही हो”

प्रेक्षकों में से एक उठ खड़ा हुआ और बोला – “योर ऑनर, ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि वादी भी सही हो और प्रतिवादी भी!”

मुल्ला ने निर्णय सुनाया – “हाँ, तुम भी सही हो!”

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85

धन्यवाद का कारण

मुल्ला के पास एक बार उसका मित्र आया और मुल्ला से 100 रुपए उधार मांगे. मुल्ला ने कहा कि उसके पास पैसे तो हैं, मगर वो उसे नहीं देगा. और मित्र को इस बात के लिए मुल्ला का आभार मानना चाहिए और धन्यवाद देना चाहिए.

उसका मित्र भड़क गया. बोला – “तुम उधार न दो कोई बात नहीं पर ये क्या बात हुई कि इस बात के लिए मैं तुम्हारा कृतज्ञ होऊं और धन्यवाद दूं.”

“मेरे प्रिय मित्र, तुमने मुझसे उधार मांगा, तो मैं तुम्हें सीधे मना करने के बजाए कल आने को कह सकता था, या अगले हफ्ते आने को कह कर टाल सकता था. इस तरह मैं तुम्हें आशान्वित बनाकर इतने दिन लटका सकता था कि तुम फिर कोई दूसरी व्यवस्था कर लेते. मगर मैंने ऐसा नहीं किया. अब तुम स्वतंत्र हो कि अपनी कोई दूसरी व्यवस्था जल्द से जल्द कर लो. और इस बात के लिए तुम्हें मेरा कृतज्ञ होना ही चाहिए.” - मुल्ला ने समझाया.

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

2 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. इमेल पर आपकी पोस्ट प्राप्त हो जाती है, बेमिसाल संकलन है.
    कम से कम धार्मिक व्याख्यानों से ये पुस्तक ज्यादा उपयोगी है.

    उत्तर देंहटाएं

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