टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 37

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

307

अनुपात

ज्ञान प्राप्त करने की तमाम आकांक्षाऐं मन में लिए एक पर्यटक आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने पहुंचा परंतु गुरू की साधारण बातों से वह जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। उसने आश्रम के एक अन्य शिष्य से कहा - "मैं यहाँ गुरू की तलाश में आया था। लेकिन इन गुरूजी में ऐसी कोई खास बात नज़र ही नहीं आयी।'

शिष्य ने उत्तर दिया - "गुरू ऐसे मोची के समान होते हैं जिनके पास कभी न खत्म होने वाला चमड़े का भंडार है। लेकिन वे आपके पैरों के आकार के हिसाब से ही कटाई और सिलाई का कार्य करते हैं।'

308

अपने भाग्यविधाता बनो

एक दिन नसरुद्दीन अपने गाँव में टहल रहा था। तभी उसके कुछ पड़ोसी पास आकर बोले - "नसरुद्दीन। तुम बहुत बुद्धिमान और नेक इंसान हो। हम लोगों को अपना चेला बना लो। तुम हमें यह समझाओ कि हम किस तरह अपना जीवन व्यतीत करें और जीवन में सुख और शांति के लिए हमें क्या करना चाहिये?"

नसरुद्दीन ने कहा - "ठीक है। मैं तुम्हें पहला शिक्षा अभी दिए देता हूँ। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि तुम अपने पैरों और चप्पलों का विशेष ध्यान रखो। उन्हें हर समय साफ और स्वच्छ रखो। "

पड़ोसी उसकी बात को ध्यान से सुन रहे थे, तभी उनका ध्यान नसरुद्दीन के पैरों की ओर गया जो बहुत मैले-कुचैले थे तथा उसकी चप्पलें भी टूटी-फूटी थीं।

एक पड़ोसी तपाक से बोला - "लेकिन नसरुद्दीन, तुम्हारे पैर तो बहुत ही गंदे हैं और चप्पलों का तो कहना ही क्या। जिन बातों का तुम खुद ही पालन नहीं कर रहे हो, उनका पालन हम कैसे कर सकते हैं ?"

नसरुद्दीन - "तो मैं भी यह जानने के लिए इधर-उधर नहीं भटकता कि मुझे अपना जीवन कैसे बिताना चाहिये?"

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60

अगर आजादी चाहते हो तो पहले मरना सीखो

एक गांव में एक आदमी अपने प्रिय तोते के साथ रहता था.

एक बार जब वह आदमी किसी काम से दूसरे गांव जा रहा था, तो उसके तोते ने उससे कहा – “मालिक, जहाँ आप जा रहे हैं वहाँ मेरा गुरु-तोता रहता है. उसके लिए मेरा एक संदेश ले जाएंगे?”

“क्यों नहीं!” – उस आदमी ने जवाब दिया.

“मेरा संदेश है,” तोते ने कहा - “आजाद हवाओं में सांस लेने वालों के नाम एक बंदी तोते का सलाम.”

वह आदमी दूसरे गांव पहुँचा और वहाँ उस गुरु-तोते को अपने प्रिय तोते का संदेश बताया. संदेश सुनकर गुरु-तोता तड़पा, फड़फड़ाया और मर गया.

जब वह आदमी अपना काम समाप्त कर वापस घर आया तो उस तोते ने पूछा कि क्या उसका संदेश गुरु-तोते तक पहुँच गया था.

आदमी ने तोते को पूरी कहानी बताई कि कैसे उसका संदेश सुनकर उसका गुरु-तोता तत्काल मर गया था.

यह बात सुनकर वह तोता भी तड़पा, फड़फड़ाया और मर गया.

उस आदमी ने बुझे मन से तोते को पिंजरे से बाहर निकाला और उसका दाह-संस्कार करने के लिए ले जाने लगा. जैसे ही उस आदमी का ध्यान थोड़ा भंग हुआ, वह तोता तुरंत उड़ गया और जाते जाते उसने अपने मालिक को बताया – “मेरे गुरु-तोते ने मुझे संदेश भेजा था कि अगर आजादी चाहते हो तो पहले मरना सीखो!”

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61

रेत पर लिखें कि पत्थर पर

दो दोस्त कहीं जा रहे थे. रास्ते में उनमें किसी बात पर झगड़ा हो गया. गर्मागर्मी में एक ने दूसरे को चांटा जड़ दिया. जिसने चांटा खाया, उसने दुःखी होकर रेत पर लिखा – “आज मेरे प्रिय मित्र ने मुझे दुःखी किया.”

वापसी में भी वे साथ थे. बीच रास्ते में नदी पड़ती थी. दोनों ने स्वच्छ बहती नदी में स्नान करने का मन बनाया. अचानक वह मित्र जिसने चांटा खाया था, भँवर में फंस कर डूबने लगा. उसके उसी मित्र ने जिसने चांटा मारा था, उसे बचाया.

जिसने चांटा खाया था, उसने खुश होकर एक चट्टान पर लिखा – “आज मेरे प्रिय मित्र ने मेरा जीवन बचाया.”

जब कोई आपको दुःखी करे, तो उसे रेत पर लिखें ताकि क्षमा करने वाली हवाएँ उसे मिटा दें. परंतु जब कोई आपके लिए अच्छा काम करे, तो उसे पत्थर पर लिखें ताकि वो आपकी स्मृतियों में सदैव बना रहे.

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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वाह रे नसरुद्दीन! वाह रे तोता!

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