सोमवार, 28 नवंबर 2011

दुःखी हैं? तो ब्लॉगिंग क्यों नहीं करते?

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(चित्र - साभार टू थिंक ऑर नाट टू )

11 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. I did pasted it on my blog someday more or less similar conditions...Hope it helps...Thanks for visit :)

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  2. या तो सुखी हो जाओगे या आत्महत्या कर लोगे:-) दोनो ही अवस्था में मुक्ति तय है।

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  3. गारंटी है कि दुःख और नहीं बढेगा ? :)

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  4. दुखी होकर ब्लॉगिंग कर रहे हैं या ब्लॉगिंग कर के दुखी हैं लोग।

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  5. सही बात है, दूसरों को सुखी क्यों छोड़ा जाए :)

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  6. इसे देखकर रवीन्‍द्र प्रभात जी का लिखा हुआ लेख जो पढ़ा था याद हो आया। लेख का शीर्षक है, ''ब्‍लॉगिंग को बनायें तनावमुक्‍त जीवन का हिस्‍सा।''

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  7. बहोत अच्छे रवी जी

    सच मै बहोत अच्छा लगता है ब्लॉगींग करके !

    http://hindiduniyablog.blogspot.com/

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  8. दशा कुछ ऐसी होती है -

    तौबा मेरी जाम-ए-शिकन,
    जाम-ए-मेरी तौबा शिकन,
    सामने है ढेर,
    टूटे हुए पैमानों का।

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