टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

क्रिकेट स्तोत्र

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अस्य श्री क्रिकेटस्तोत्र माला मंत्रस्य श्री क्रिकेट मिथ्या प्रशंसक ऋषिः रविरतलामी छन्दः गलीक्रिकेट खिलाड़ी सर्व वर्ण शक्तयः शुश्रुषा वीजं वाकस्तम्भ कीलकम् क्रिकेटम् प्रसन्नार्थे पठे विआनेयोगः।

हे क्रिकेट। हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम नानागुण विभूषित, सुंदरकांति विशिष्ट बहु संपद युक्त खेल हो अतः हे क्रिकेट ! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम हर्ता क्रियात्मकता व रचनात्मकता के, तुम कर्त्ता आराम व छुट्टी के, तुम विधाता सटोरियों के अतएव हे क्रिकेट हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम समर में 20 ओवर धारी, विंटर में 40 ओवर धारी, बाकी समय 5 दिवस धारी मुफ़्त मनोरंजन कारी अतएव हे क्रिकेट हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम एक रूप से तमाम खेलों पर राज्य करते हो, एक रूप से किसी खेल को आगे बढ़ने नहीं देते हो और एक रूप से अनिश्चित हो, अतएव हे त्रिमूर्ते! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

आप के सत्वगुण आप के प्रसंशकों से प्रगट, आपके रजोगुण आपके मैचों से प्रकाशित, एवं आपके तमोगुण भवत्प्रणीत विश्व संवाद पत्रा दिकों से विकसित, अतएव हे त्रिगुणात्मक ! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम ही अतएव सत् हो, तुम्हारे शत्रु हॉकी-फुटबाल युद्ध में चित्, और प्रसंशकों को आनन्द अतएव हे सच्चिदानंद! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम ब्रह्मा हो क्योंकि खेल-प्रजापति हो, तुम विष्णु हो क्योंकि लक्ष्मी के कृपापात्र हो, तुम महेश्वर हो क्योंकि तुम्हारी टीमें एक में हार कर दूसरे में अजेय रहती हैं, अतएव हे त्रिमूर्ते! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम इंद्र हो तुम्हारी हर टीम वज्र है, तुम चंद्र हो - इनकमटैक्स तुम्हारा कलंक है, तुम वायु हो वायुयान तुम्हारी गति है, तुम वरुण हो जल-थल में तुम्हारा राज्य है, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम दिवाकर हो तुम्हारे प्रकाश से हमारा खेल-अज्ञानांधकार दूर होता है, तुम अग्नि हो क्योंकि अन्य सब खेलों को खा चुके हो, तुम यम हो विशेष करके हॉकी, फुटबाल के, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम वेद हो, तुम स्मृति हो, तुम दर्शन हो क्योंकि चहुँओर खेल मीमांसा में तुम ही तुम विराजे हो अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे त्रि-दंडिके, तुम्हारा अमल धवल शुभ्र महाश्म श्रु शोभित त्रि-दंड मंडल व द्वि-गुल्लिका देख करके हमें वासना हुई कि हम तुम्हारी स्तुति करें अतएव हे क्रिकेट, हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम्हारी श्वेत-रक्त वर्ण तीव्र गति चलित कंदुक देखकर के हमको वासना हुई कि हम तुम्हारा स्तव करें, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे वरद! हमको वर दो हम सिर पर शमला बाँध के तुम्हारे टिकट के लिए पीछे पीछे दौड़ेंगे, पुलिस के डंडे की मार भी सहेंगे, तुम हमको चाकरी दो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे शुभंकर! हमारा शुभ मनोरंजन करो, जिस टीम में सट्टे का दांव लगाएँ उसे जिताओ, हम तुम्हारी खुशामद करेंगे और तुम्हारे जी की बात कहेंगे हमको धनवान बनाओ हभ तुमको प्रणाम करते हैं.

हे मानद! हमको आईपीएल दो, विश्वकप दो, इंडिया-पाकिस्तान दो, ट्राईसिरीज दो, हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे खेलों के महाराजा! हम तुम्हारा रिपीट टेलीकास्ट देखने की इच्छा सुबह-शाम करते हैं, तुम्हारे बारे में चर्चा कर के लोक मण्डल में महामानास्पद होने की इच्छा करते हैं तुम्हारी जानकारियों को स्वर्ण जटित पत्र बक्स में रखने को स्पर्द्धा करते हैं, हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे अंतरयामिन्! हम जो कुछ करते हैं केवल तुम को देखने को, तुम दाता कहो इस हेतु हम समय दान करते हैं, तुम परोपकारी कहो इस हेतु हम एक दूसरे को क्रिकेट स्कोर बता-पूछ कर परोपकार करते हैं, तुम विद्यमान कहो इस हेतु हम क्रिकेट की खबर पढ़ते हैं अतएव हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

हम तुम्हारी इच्छानुसार गली-गली चर्चा करेंगे, तुम्हारे प्रीत्यर्थ बेसरम की डंडी, टेनिस के बॉल से गली क्रिकेट खेलेंगे, तुम्हारी आज्ञा प्रमाण बिना बल्ले पैड के खेलेंगे और आउट न होंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे सौम्य! हम वही करेंगे जो तुम को अभिमत है, हम सुबह शाम क्रिकेट खेलेंगे, दोपहर क्रिकेट खेलेंगे, रात्रि क्रिकेट खेलेंगे और यदि नहीं खेल पाए तो क्रिकेट चर्चा करेंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे मिष्टभाषिण! हम मातृभाषा त्याग करके क्रिकेट भाषा बोलेंगे, पैतृक धर्म छोड़ के क्रिकेट धर्मावलंब करेंगे, अपना नाम छोड़ कर क्रिकेट फैन नाम लिखवाएंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे सुभोजक! हम चावल छोड़ के क्रिकेट खायेंगे, क्रिकेट पीयेंगे. क्रिकेट ही हमारा जलपान है अतएव हे क्रिकेट! तुम हम को चरण में रक्खो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हम इस देश में क्रिकेट धर्म स्थापित करेंगे, वर्ग-जाति भेद उठा देंगे, सभी गोरे-काले-अफसर-बाबू-नेता-चपड़ासी सिर्फ और सिर्फ एक ही धर्म अपनाएँगे, एक ही जाति के होंगे – क्रिकेटिया, अतएव हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे सर्वद! हम को धन न दो, मान न दो, यश न दो, बस हमारी एक वासना सिद्ध करो – हमने जिस मैच में दांव लगाया उसे फिक्स कर दो. हम तुम को प्रणाम करते हैं।

यदि यह न हो तो हमने जिस ओवर में जितने रन और जितने विकेट का सट्टा लगाया उसे तो फिक्स करो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हमारी स्पीच सुनो, हमारा एसे पढ़ो, हमारा एक्सपर्ट डिसकसन सुनो, हम को वाह वाही दो, इतना ही होने से हम भारतीय क्रिकेटिया समाज की अनेक निन्दा पर भी ध्यान न करेंगे, अतएव हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे भगवन् हम अकिञ्चन हैं और तुम्हारे द्वार पर खड़े रहेंगे, तुम हमको अपने चित्त में रक्खो हम तुम को रिश्वत भेजेंगे, तुम मौसम, पिच का हाल बता देना हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको कोटि कोटि साष्टांग प्रणाम करते हैं।

तुम दशावतार धारी हो – एक दिनी क्रिकेट, पाँच दिनी क्रिकेट, चार दिनी क्रिकेट, रात-दिन क्रिकेट, आईपीएल क्रिकेट, और न जाने क्या-क्या, और लक्ष्मी के प्रिय हो, खेलों में सबसे धनवान् हो हे अवतारिन्! हम तुम को नमस्कार करते हैं।

तुम नृसिंह हो क्योंकि मनुष्य और सिंह दोनों पन तुम में है। विकेट तुम्हारा क्रोध है और रन तुम्हारा प्रेम। तुम परम विचित्र हो, तुम वामन हो क्योंकि तुम चतुर हो – पूरी तरह अनप्रेडिक्टिबल, तुम परशुराम हो क्योंकि तुमने पूरे भारत को (क्रिकेट के अलावा) नि-खिलाड़ी कर दी है अतएव हे लीलाकारिन्। हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

तुम राम हो क्योंकि हिंद-पाकिस्तान के बीच शांति और प्रेम के अनेक सेतु बाधे हैं। तुम बलराम हो क्योंकि विरोधी टीमों के प्रशंसकों के बीच तुम हलधारी जैसे हो। तुम बुद्ध हो क्योंकि अन्य तमाम खेलों के विरुद्ध हो, और तुम कल्कि हो क्योंकि अन्य समस्त खेल संहारकारी हो। अतएव हे दश विधि रूप धारि! हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

तुम मूर्तिमान् हो। मनोरंजन तुम्हारा अंग है। टीवी तुम्हारा शिर है। दूरदर्शन और यू-ट्यूब तुम्हारा नेत्र है। और रेडियो तुम्हारे केश हैं। अख़बार, पत्रपत्रिकाएँ तुम्हारे हाथ-पाँव। अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

खिलाड़ी तुम्हारे मुख हैं, अंपायर तुम्हारी नाक है, विरोधी टीम तुम्हारी मूंछ है और सट्टेबाज तुम्हारे काल दृष्टा हैं, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं। हमारा भरपूर मनोरंजन करो।

लाइव प्रसारण और हाईलाइट्स तुम्हारी दोनों भुजा हैं। एक्सपर्ट कमेंटरी तुम्हारे नख है री-टेलीकास्ट तुम्हारा पृष्ट है और आमदनी तुम्हारा हृदय है अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

क्रिकेटरों की नीलामी तुम्हारा पेट है, टेलीकास्ट फीस तुम्हारी क्षुधा है, टिकट चरण है, स्पांसरशिप तुम्हारा प्रसाद है। अतएव हे विराटरूप क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

दीक्षा दान तपस्तीर्थ ज्ञानयागादिकाः क्रिया।

क्रिकेट स्तवपाठस्य कलां नार्हति षोडशीम्।। 1।।

विद्यार्थो लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।

स्टारार्थी लभते स्टारम् मोक्षार्थी लभते गति।। 2।।

एक कालं द्विकालं च त्रिकालं नित्यमुत्पठेत्।

भव पाश विनिर्मुक्तः क्रिकेट लोक संगच्छति।। 3।।

---

(भारतेंदु हरिश्चंद्र के अँग्रेज़ स्तोत्र की पैरोडी)

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मज़ा आ गया सर! अच्छा व्यंग्य किया है.

सादर

हम भी आंखें बंद कर प्रणाम करते हैं क्रिकेट को.

बढि़या पोस्‍ट क्रिकेट पर। हमारे देश में क्रिकेट एक ऐसे विशाल व़ृक्ष की तरह है जो अपने आस-पास उगने वाले अपने से छोटे पेड़-पौधों तक सूरज की धूप नहीं पहुँचने देता। क्रिकेट दूसरे खेलों के विकास में इसी तरह बाधा बना हुआ है।

हा हा!! जबरदस्त!! बहुत मस्त भाई...

अति उत्तम |

बहुत बढिया , मजा आ गया ...

एकदम चकाचक पोस्टम

आज की सुबह निर्मल आनन्‍दमयी हो गई आपकी यह पोस्‍ट पढ कर। आपकी कल्‍पनाशीलता ही नहीं, हिन्‍दी की शक्ति भी जताती है आपकी यह पोस्‍ट। आनन्‍द आ गया।

जय हो! हम फ़ुरसतिये आपको प्रणाम करते हैं।

ath argalastrotam samapayet..........

pranam.

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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