टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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अथ वार्ता श्रुयंताम्.

बतियाने का इतना मेहनताना।

डेढ़ लाख महीना मिलेगा तो कौन वार्ताकार मामला सुलझाना चाहेगा..
चलिए तब तक इस दुकानदार को राहत मिलेगी उधार से.. :)

अब वार्ताकार क्यों सुलझाने लगें समस्या , कैसे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारे !!

यह वार्ताकार तय करेंगे, कितने पैसे (मेहर) लेकर कश्मीर भारत से अलग होगा. हरामखोरी है....

तो मै उधार की उम्मीद ना ही रखु जिन्दगी भर के लिये

समूचा भारत एक तरफ - कश्मीर एक तरफ
हद है.

bahut khoob, kya nazar dali hai

कश्‍मीर इस तरह से भी लाभदायक हो सकता है यह बताने के लिए धन्‍यवाद। रोजगार के नए अवसरों का एक रास्‍ता और।

शास्त्रीजी, आपका प्रयास सराहनीय है ,
मैं अपने ब्लॉग को कैसे शामिल कर
सकता हूँ? कृपया विस्तार से बताएं !
http://cartoondhamaka.blogspot.com

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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