लिनक्स पॉकेट गाइड – लिनक्स आपकी जेब में : अध्याय 2

अध्याय 2

लिनक्स की क़िस्में

जैसा कि ऊपर कहा गया है, लिनक्स की विविध किस्में हैं, वितरण हैं. फिर भी, इन अलग अलग वितरणों में आपको बहुत सी समानताएं मिलेंगी, क्योंकि हरेक लिनक्स मशीन में वही चीजें मिलती हैं जो ज़रूरतों के हिसाब से अलग अलग तरह से जोड़ी गई होती हैं।

अलग अलग वितरणों में लिनक्स दिखने में अलग लग सकता है, पर चारित्रिक व अन्य दृश्यपट जिन मूलभूत आधारों पर निर्मित हैं, वे सब में एक समान हैं। लिनक्स तंत्र ग्नू(GNU यानी ग्नू इज़ नॉट यूनिक्स - ग्नू यूनिक्स नहीं है) उपकरणों पर आधारित है, जो कि तंत्र के प्रयोग व बदलाव के लिए मानक विधियाँ प्रदान करते हैं। सभी ग्नू उपकरणों का स्रोत मुक्त है, अतः वे किसी भी तंत्र पर स्थापित किए जा सकते हैं। अधिकतर वितरणों में सबसे आम उपकरणों के पहले ही कम्पाइल किए हुए पैकेज मिलेंगे, जैसे कि रेडहैट पर आरपीऍम पैकेज व डेबियन पर डेब पैकेज, अतः किसी पैकेज को अपनी तंत्र पर स्थापित करने के लिए प्रोग्रामिंग का ज्ञान आवश्यक नहीं है। लेकिन यदि आप प्रोग्रामर हैं, और आपको ख़ुद चीज़ें करना पसन्द है, तो आपको लिनक्स और ज़्यादा पसन्द आएगा, क्योंकि अधिकतर वितरणों में विकास सम्बन्धी सभी उपकरण रहते हैं, जिनकी मदद से आप मात्र स्रोत कूट की मदद से नए तन्त्रांश को स्थापित कर सकते हैं। इस प्रकार के जमाव की मदद से आप ऐसे प्रोग्राम भी स्थापित कर सकते हैं जो कि पहले से आपकी तंत्र पर पैकेज के प्रारूप में मौजूद न हों।

आम ग्नू प्रोग्रामों की एक सूची जो प्रत्येक लिनक्स वितरण में होते ही हैं:

· बैश: ग्नू आवरण

· जीसीसी: ग्नू सी कम्पाइलर

· जीडीबी: ग्नू त्रुटिभञ्जक(डिबगर)

· फाइंडयूटिल्स: फ़ाइलों में व फ़ाइलों को खोजने के लिए

· फ़ॉन्टयूटिल्स: मुद्रलिपियों(फ़ॉण्ट) के प्रारूप बदलने या नए बनाने के लिए

· गिम्प: ग्नू छवि प्रबन्धन कार्यक्रम

· गनोम: ग्नू डेस्कटॉप वातावरण

· ईमैक्स: बहुत सशक्त सम्पादन तन्त्र

· घोस्टस्क्रिप्ट घोस्टव्यू: पीडीऍफ़ फ़ाइलों के लिए इण्टर्प्रेटर व प्रदर्शक।

· जीएनयू फोटो: डिजिटल कैमरों के साथ काम करने के लिए प्रोग्राम

· ऑक्टेव: गणित के फ़ंक्शनों व छवियों का गणन करने वाला कार्यक्रम।

· जीएनयू एसक्यूएल: रिलेशनल डाटाबेस तंत्र

· रेडियस: सुदूर पुष्टि व खाता प्रबन्धन सेवक

· ...

लिनक्स के लिए कम्प्यूटर खेलों सहित ढेरों मुक्त व व्यवसायिक अनुप्रयोग (ऍप्लिकेशन) भी उपलब्ध हैं, और उनके बारे में और जानकारी आगे के पृष्ठों में समाहित हैं.

नए प्रोग्रामों के पैकेजों को स्थापित करने के लिए लिनक्स वितरण के अनुरूप प्रोग्राम संस्थापन औज़ार होते हैं जैसे कि एम एस विण्डोज़ के इंस्टॉल शील्ड. और इनके ज़रिए लिनक्स में नए प्रोग्राम इंस्टॉल करना व पुराने प्रोग्रामों को हटाना बहुत ही आसान हो गया है।

2.1 ग्नू/लिनक्स क्या है?

ग्नू को मोटे तौर पर ओपनसोर्स कहा जा सकता है. लिनक्स का कर्नल ग्नू परियोजना का हिस्सा नहीं है पर इसका ओपनसोर्स लाइसेंस ग्नू तन्त्रांश जैसा ही है। कई उपयोगी तन्त्रांश व विकास के उपकरण जो कि विशिष्टतः लिनक्स के नहीं हैं, ग्नू परियोजना से ही लिए गए हैं। किसी भी काम लायक परियोजना में कर्नल व कुछ संख्या में उपयोगी प्रोग्राम होने आवश्यक हैं, अतः कुछ लोगों का मानना है कि ऐसी तंत्र को ग्नू/लिनक्स तंत्र कहना चाहिए। परंतु आमतौर पर ओपनसोर्स के रूप में प्रचलन में लिनक्स ही आता है.

2.2 लिनक्स के आकार-प्रकार

वैसे तो हर लिनक्स वितरण का दिल एक ही होता है – उसका कर्नेल, पर वितरणों के अनुसार उनके रूपाकार अलग हो सकते हैं, आरंभिक संस्थापना व उनके प्रबंधन के तौर तरीके अलग हो सकते हैं. आइए कुछ प्रमुख लिनक्स वितरणों पर प्रारंभिक नजर मारते हैं.

2.3 रेडहैट –

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लिनक्स के सर्वाधिक प्रचलित और सफल वितरणों में से एक है रेडहैट. इसकी परिकल्पना 1993 में मार्क ईविंग ने की थी. इसके नामकरण का रोचक इतिहास है. मार्क कॉलेज के दिनों से ही कम्प्यूटर एक्सपर्ट थे और अपने दोस्तों की कम्प्यूटर संबंधी समस्याओं को गाहे-बगाहे हल किया करते थे. वे लाल रंग का हैट पहनते थे, और इसी कारण उन्हें रेडहैट मैन के नाम से संबोधित किया जाता था. कॉलेज के आखिरी दिनों में जब उनकी पसंदीदा लाल टोपी गुम हो गई तो उन्होंने अपनी कंपनी का ही नाम रेडहैट रख दिया. रेडहैट का एंटरप्राइज संस्करण व्यवसायिक उत्पाद है, परंतु इसी का एक हिस्सा मुक्त व मुफ़्त जारी किया गया है जो फेडोरा के नाम से अत्यंत प्रचलित है.

2.4 उबुन्टु –

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डेबियन परियोजना कोड बेस को लेकर उबुन्टु तैयार किया गया है. ब्रिटेन की कंपनी केनोनिकल लि. के दक्षिण अफ्रीकी मालिक मार्क शटलवर्थ ने इसकी नींव रखी और 20 अक्तूबर 2004 में इसका पहला संस्करण जारी किया गया. शुरू में इसका कोई नाम नहीं था, परंतु बाद में इसे उबुन्टु नाम दिया गया जिसका अफ्रीकी भाषा में अर्थ है – दूसरों के प्रति मानवता का भाव. मानव के लिए लिनक्स का भाव लिए यह लिनक्स भी मुफ़्त में उपलब्ध है, परंतु इसकी सेवाओं तथा सहयोग हेतु फीस लिया जाता है. वर्तमान में डेस्कटॉप कम्प्यूटरों में सर्वाधिक लोकप्रिय लिनक्स वितरण उबुन्टु ही है.

2.5 मंड्रिवा –

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मंड्रिवा का पूर्व नाम मैन्ड्रेक लिनक्स था. इस लिनक्स वितरण की शुरूआत गेन ड्यूआन नामक 22 वर्षीय फ्रेंच विद्यार्थी ने 1995 में की. गेन ड्यूआन ने केडीई डेस्कटॉप वातावरण को रेडहैट लिनक्स के साथ जोड़कर एक नया वितरण मैन्ड्रेक बनाया और मुफ़्त वितरण के लिए एफटीपी सर्वर पर 1998 के दौरान लोड कर दिया. इसमें उस वक्त के लिहाज से बहुत से तंत्र प्रशासन के कार्यों को सरल बनाया गया था इसलिए यह देखते ही देखते लोकप्रिय हो गया. शुरूआत में उत्साहजनक परिणाम देने के बाद बीच में यह वितरण कुछ पिछड़ सा गया. मगर अभी भी इसके समर्पित प्रयोक्ता हैं, और यह वितरण समय के अनुरूप सुधरता जा रहा है.

2.6 डेबियन –

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वाणिज्य संकाय के विद्यार्थी इयान मर्डोक ने डेबियन लिनक्स की संस्थापना 1993 में की. डेबियन नाम के पीछे भी एक कहानी है. इस लिनक्स के नामकरण के समय इयान ने अपनी पत्नी का नाम डेब लिया और उसमें अपने नाम इयान को जोड़ कर डेबियन नाम रचा. यह रेडहैट और मंड्रिवा लिनक्स से बहुत अलग क़िस्म का है यदि इसके पैकेज प्रबंधन और सिस्टम प्रबंधन की बात करते हैं. डेबियन लिनक्स में पहले पहल इंटरनेट के ज़रिए स्वचालित प्रोग्राम इंस्टॉलेशन की उन्नत क़िस्म की सुविधा का इस्तेमाल किया गया जो कि स्वयंमेव ही पैकेज निर्भरता इत्यादि की समस्याओं को हल करने में सक्षम होता है. इसकी इसी खूबी के कारण यह न सिर्फ़ जल्द ही लोकप्रिय हो गया, बल्कि इसको लेकर अन्य दूसरे लोकप्रिय संस्करण जैसे कि उबुन्टु, जेंटू इत्यादि लिनक्स संस्करण भी बनाए गए.

2.7 सूसे-

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सूसे लिनक्स वितरण को पहले पहल 1992 में जर्मनी में जारी किया गया था. इस लिनक्स वितरण की खासियत यह है कि इसमें तमाम लिनक्स प्रोग्रामों व कम्प्यूटर गेमों को शामिल किया जाता है. उपयोक्ता अपनी इच्छानुसार उसमें से वांछित प्रोग्राम संस्थापित कर सकते हैं. सूसे को नॉवेल नेटवेयर के निर्माताओं ने खरीद लिया और उसमें नेटवेयर औजारों को भी शामिल कर दिया जिससे कि यह नेटवर्क वातावरण के लिए एक उम्दा लिनक्स वितरण बन चुका है.

2.8 नॉपिक्स –

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नो हार्ड डिस्क मैन के नाम से विख्यात क्लास नॉपर ने लिनक्स की दुनिया में तब तहलका मचा दिया जब उन्होंने अकेले ही काम करते हुए लिनक्स का एक ऐसा वितरण निकाला जो कि सीधे ही सीडी के ज़रिए चलता है. इसे कम्प्यूटर पर हार्ड डिस्क में इंस्टॉल करने की आवश्यकता ही नहीं होती. और, यह अपनी पूरी क्षमता के साथ, अपने समस्त अनुप्रयोगों के साथ और सारे हार्डवेयरों को चलाते हुए चलता है. clip_image014

(क्लास नॉपर)

नॉपिक्स नाम के इस लिनक्स वितरण ने पारंपरिक कम्प्यूटरों की दुनिया को नए सिरे से पारिभाषित किया और अब आज की तिथि में हर प्रमुख लिनक्स वितरणों के लाइव संस्करण उपलब्ध हैं जिन्हें आप सीधे सीडी/डीवीडी से, उनकी अपनी पूरी क्षमता से चला सकते हैं. नॉपिक्स को वैसे तो हार्डडिस्क पर भी संस्थापित किया जा सकता है और इसके जैसे कुछ संस्करणों को सीधे रैम पर कॉपी करके वहीं से, बड़ी ही तीव्र गति से चलाया जा सकता है. उनकी पत्नी आद्रियान दृष्टिबाधित हैं और उन्होंने साथ मिलकर नॉपिक्स का एक खास लिनक्स संस्करण दृष्टिबाधितों के आसान प्रयोग के लिए भी बनाया है.

2.9 ज़ैंड्रॉस –

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यह भी डेबियन लिनक्स पर आधारित एक खास क़िस्म का लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसका बाहरी रूप रंग विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह सज़ा-संवार दिया गया है जिससे विंडोज़ के पारंपरिक प्रयोक्ताओं को सुविधा हो. प्रयोक्ताओं को प्रोग्रमों व तंत्र प्रबंधन इत्यादि में माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ के जैसा कार्य वातावरण मिलता है. ज़ैंड्रॉस का खास उच्च सुविधा युक्त संस्करण, जिसमें बहुत से मालिकाना सॉफ़्टवेयर सम्मिलित हैं मुफ़्त नहीं है.

2.10 बॉस लिनक्स –

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खास भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग की आवश्यकताओं को देखते हुए बॉस (भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशन) लिनक्स का निर्माण भारत की सरकारी क्षेत्र की नामी कम्प्यूटिंग संस्था सीडैक ने इसे जारी किया है. बॉस लिनक्स में आपको हिन्दी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम, ओड़िया, पंजाबी इत्यादि अनेक भारतीय भाषाओं में विभिन्न प्रोग्रामों में काम करने की सुविधा प्रदान की गई है. इसमें बहुत सारे भारतीय भाषाओं के न सिर्फ़ भाषाई वातावरण हैं, बल्कि हर क़िस्म के कुंजीपट भी सम्मिलित हैं. बॉस लिनक्स का प्रयोग करने के लिए, कंप्यूटर विशेषज्ञ द्वारा एक बार संस्थापित कर लेने के उपरांत भारतीय भाषाई प्रयोक्ता को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान आवश्यक नहीं होता है, और वो अपनी मातृ भाषा – जैसे कि हिन्दी में बख़ूबी काम कर सकता है. बॉस लिनक्स की सीडी आप अपने निकटस्थ सीडैक के ऑफिस से निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं. ऑफिसों की सूची यहाँ है - http://bosslinux.in/get-boss-cd/ तथा अन्य विवरण http://bosslinux.in/ से प्राप्त कर सकते हैं.

2.11 उबुन्टु मुसलिम संस्करण

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धर्म को आप अपने से अलग नहीं कर सकते. आप उसे जितना दूर फेंकने की कोशिश करते हैं, वह उतनी ही तीव्रता से बाउंस होकर आपके गले पड़ता है. तेजी से लोकप्रियता की ओर अग्रसर हो रहे उबुन्टु लिनक्स की इस क़िस्म को उबुन्टु मुसलिम संस्करण के नाम से जारी किया गया है.

पर, रुकिए, इसमें तालिबानी सोच जैसा कुछ भी नहीं है. इसमें मुसलिम प्रार्थनाएँ, इबादतें, कुरान अध्ययन के व अरबी पढ़ने के औज़ार तथा मुसलिम तिथियों इत्यादि माल-मसाला रखा गया है ताकि मुसलिम भाइयों को सहूलियतें हों.

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(स्क्रीनशॉट - साभार उबुन्टुमी.कॉम)

उबुन्टु का ईसाई संस्करण http://www.whatwouldjesusdownload.com/christianubuntu/2006/07/download.html पहले से ही है. वैसे ही उबुन्टु का शैतानी संस्करण http://parker1.co.uk/satanic/kubuntu भी है.

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यानी कि धार्मिक लिनक्सों का हिसाब किताब यहाँ भी शैतानी लिनक्स ने बराबर कर दिया!

2.12 एफ़सिक्योर एंटीवायरस रेस्क्यू लिनक्स सीडी –

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एंटीवायरस बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी एफ़सिक्योर ने एक लाइव लिनक्स रेस्क्यू सीडी प्रस्तुत किया है जो वायरस से संक्रमित कम्प्यूटरों को जाँच कर उन्हें वायरसों से मुक्त कर सकता है. वायरस संक्रमित कम्प्यूटरों की समस्याओं के समाधान के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है चूंकि हार्ड डिस्क में बिना बूट हुए, सीधे ही लाइव सीडी से क्लीन सिस्टम में बूट होकर वायरसों की जाँच की जाती है जो कि काफी प्रभावी होती है.

2.13 टाइनी लिनक्स-

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विंडोज़ विस्ता को हार्ड डिस्क पर इंस्टॉल करने पर 8 जीबी जगह घेरता है. कोई भी सामान्य पारंपरिक लिनक्स तंत्र 2-4 जीबी जगह घेर सकता है. मगर लिनक्स तंत्र की खूबी यह है कि इसे बहुरूपों में ढाला जा सकता है. इसका एक खास, आकार में अत्यंत छोटा लिनक्स टाइनी लिनक्स (ऐसे और भी वितरण हैं जैसे कि पपी लिनक्स, डैम स्माल लिनक्स इत्यादि) सिर्फ़ 50 मेगा बाइट का है और आप इसमें आमतौर पर दैनंदिनी के बहुत से कम्प्यूटिंग कार्य कर सकते हैं जिनमें शामिल हैं ईमेल करना, इंटरनेट पर ब्राउजिंग करना, लिखना पढ़ना इत्यादि.

जैसे कि ऊपर बताया गया है, लिनक्स के और भी दर्ज़नों संस्करण उपलब्ध हैं. और इनमें से हर एक का उल्लेख कर पाना न तो संभव होगा और न ही प्रासंगिक. प्रश्न यह पैदा होता है कि कौन सा लिनक्स वितरण आपके लिए मुफ़ीद होगा. जिस लिनक्स वितरण से आप सोचते हैं कि आपका काम बनेगा, बस, उसी को चुनें.

2.14 मुझे कौन सा वितरण स्थापित करना चाहिए?

लिनक्स की दुनिया में ढेरों, और (प्रयोक्ताओं तथा प्रशंसकों के हिसाब से,) एक से बढ़कर एक, दर्ज़नों लिनक्स वितरण हैं. जैसे कि रेडहैट, उबुन्टु, डेबियन, सूसे, जेंटू, मंड्रिवा, बॉस इत्यादि, इत्यादि. सवाल ये है कि आपके लिए कौन सा वितरण मुफ़ीद रहेगा. ख़ासकर तब जब यदि आप नए नए सीख रहे हों.

संस्थापन के पहले, सबसे ज़रूरी कारक है आपके कम्प्यूटर हार्डवेयर की क्षमता । हरेक लिनक्स वितरण में मूल पैकेज रहते ही हैं, और लगभग सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसका निर्माण किया जा सकता है (क्योंकि कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़ दें तो सभी में कर्नल एक तरह का ही होता है), अतः आपको बस ये देखना होगा कि चुना गया वितरण आपके कम्प्यूटर पर चलेगा या नहीं। उदाहरणार्थ, लिनक्सपीपीसी मैकिण्टॉश व अन्य पावरपीसी पर चलता है, लेकिन सादे x86 आधारित पीसी पर नहीं चलेगा। लिनक्सपीपीसी नई मैक मशीनों पर नहीं चलता है, लेकिन आप इसका प्रयोग कुछ प्राचीन मशीनों पर कर पाएँगे, जो कि पुरानी बस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं। इसी तरह का पेचीदा मसला है सन सिस्टम जो कि पुराना स्पार्क सीपीयू हो सकता है, या फिर नया अल्ट्रास्पार्क, दोनों में लिनक्स के अलग अलग संस्करण चाहिए होंगे।

कुछ लिनक्स वितरण ख़ास प्रोसेसरों के लिए अच्छे से ढाले गए होते हैं, जैसे कि 64 बिट सीपीयू के वितरण, जो मानक 486, 586 व 686 इण्टेल प्रोसेसरों पर नहीं ही चलेंगे। कभी कभी ख़ास सीपीयू के लिए बनाए गए वितरण उतने विश्वसनीय नहीं होते हैं, क्योंकि उनका परीक्षण कम लोगों द्वारा किया गया होता है।

इसी तरह, हो सकता है कि एक तंत्र में मानक डेस्कटॉप प्रबंधक (जिसकी चर्चा आगे के पृष्ठों में की गई है) ग्नोम हो, और किसी दूसरी में मूलतः केडीई हो। आमतौर पर ग्नोम व केडीई दोनो ही सभी लिनक्स वितरणों में उपलब्ध होते हैं। और अधिक विकसित प्रयोक्ताओं के लिए अन्य डेस्कटॉप प्रबन्धक भी उपलब्ध हैं।

मानक संस्थापन प्रक्रिया में आप अलग अलग मूल संस्थापनों में से चुन सकते हैं, जैसे कि वर्कस्टेशन, जिसमें रोज काम आने वाले व विकास सम्बन्धी पैकेज संस्थापित होते हैं, या फिर सर्वर संस्थापन, जिसमें अलग अलग नेटवर्क सेवाएँ चुनी जा सकती हैं। आप प्रारम्भिक संस्थापन प्रक्रिया के समय स्वेच्छानुसार सैकड़ों पैकेजों में से अपने लिए उपयोगी प्रोग्रामों को चुन कर संस्थापित कर सकते हैं।

वैसे तो आजकल हर लिनक्स वितरण बेहद विकसित हो गया है व चलाने में जिनमें प्रारंभिक संस्थापना से लेकर तंत्र प्रबंधन तक सब शामिल हैं, आसान हो गए हैं, फिर भी लिनक्स के नए प्रयोक्ताओं को प्रारंभ में उबुन्टु लिनक्स का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है. इसका इंस्टॉलर बेहद आसान है तथा इसमें आपके विंडोज़ कम्प्यूटर में भी आसानी से बिना किसी परेशानी व फेर बदल किए संस्थापित हो जाने की आसान सुविधा भी है.

और, यदि आपको लिनक्स की संस्थापना में झंझट दिखाई देता है, विधि कुछ कठिन सी प्रतीत होती है (जो कि यक़ीन मानिए, है नहीं), तो आप सीधे ही लिनक्स लाइव सीडी से बूट कर लिनक्स का आनंद ले सकते हैं. आपको लिनक्स को किसी तरह हार्ड डिस्क पर इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होती और न ही आपको यह अंदेशा रहता है कि आपके हार्ड डिस्क के डाटा को कोई नुकसान न पहुंच जाए.

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(क्रमशः अगले अध्याय में जारी)

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