टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

और, अब धार्मिक ऑपरेटिंग सिस्टम भी !



सच है. धर्म को आप अपने से अलग नहीं कर सकते. आप उसे जितना दूर फेंकने की कोशिश करते हैं, वह उतनी ही तीव्रता से बाउंस होकर आपके गले पड़ता है. तेजी से लोकप्रियता की ओर अग्रसर हो रहे उबुन्तु लिनक्स के एक वेरिएन्ट को उबुन्तु मुसलिम संस्करण के नाम से जारी किया गया है.

पर, रुकिए, इसमें तालिबानी सोच जैसा कुछ भी नहीं है. इसमें मुसलिम प्रार्थनाएँ, इबादतें, कुरान अध्ययन के व अरबी पढ़ने के औजार तथा मुसलिम तिथियों इत्यादि माल-मसाला रखा गया है ताकि मुसलिम भाइयों को सहूलियतें हों.

(स्क्रीनशॉट - साभार उबुन्तुमी.कॉम)

लगता है कि अब अतिशीघ्र ही उबुन्तु हिन्दू संस्करण, उबुन्तु ईसाई संस्करण, उबुन्तु सिख-जैन-बुद्ध-और-न-जाने-क्या-क्या संस्करण शीघ्र ही निकलेगा!

मेरी उंगलियाँ धन चिह्न बनाकर अटकी हुई हैं.

अद्यतन - अनुराग ने बताया कि उबुन्तु का ईसाई संस्करण पहले से ही है. स्क्विरल ने बताया कि उबुन्तु का शैतानी संस्करण भी है.

यानी कि धार्मिक लिनक्सों का हिसाब किताब यहाँ भी शैतानी लिनक्स ने बराबर कर दिया!

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ये तो बिल्कुल नयी खबर सुनायी आपने, कहीं ऐसा ना हो अच्छे विचार से ये सब शुरू हो और फिर इंटरनेट में ही धर्मयुद्ध में तब्दील हो जाये

उबुन्टू का इसाई वर्ज़न तो बहुत पहले से प्रचलन में है।

तरुण,
हाँ, कुछ मामलों में इंटरनेटी धर्मयुद्ध तो शुरु हो ही चुका है.

अनुराग,
आपका धन्यवाद. मुझे तो पता ही नहीं था कि उबुन्तु का ईसाई संस्करण भी है! अब तो बस इसे हिन्दू संस्करण आने की देरी है.

जानकारी अच्छी दी आपने, लेकिन इन धार्मिक संस्करणों को सिर्फ़ युज़र फ़्रेंड्ली होने तक ही रखा जाये या प्रचारित किया जाये, धार्मिक आरोपण इन सबसे दुर ही रहेतब तो ठीक है।
हमें तो इंटरनेटी धर्मयुद्ध के बारे में आपका यह चिठ्ठा पढ़कर ही मालुम चला।

संजय बेंगाणी

यह कुछ व्यंग्य जैसा नहीं लग रहा? धार्मिक नेता नई तकनीको का विरोध करते रहे हैं और नई तकनीको का धार्मिकीकरण हो रहा है :)

संजय,
हाँ, यह तो ख़ालिस व्यंग्य ही है!
और, सभी धर्मों के लिए है!

संजय बेंगाणी

अरे भाई, मैने भी सभी धर्मो के लिए ही लिखा है. कौए सभी जगह काले ही होते हैं :)

बेनामी

अच्छे विचार से ये सब शुरू हो और फिर इंटरनेट dfasd df

अगर अच्छे मकसद से हो रहा है तो ठीक है। वैसे हिन्दू संस्करण आए तो बताइएगा।

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