मंगलवार, 2 मार्च 2010

(हिन्दी में पहली) विस्तृत समीक्षा – माईवे आईपीटीवी के साथ अड़तालीस घंटे

पिछले कई महीनों से लगातार माईवे (बीएसएनएल-एमटीएनएल के साथ जो आईपीटीवी सेवा प्रदान करती है) के टेलीमार्केटियरों से बचते-बचाते अंतत: जब 1 महीने के लिए मुफ़्त जांच-परख का ऑफर आया तो सोचा कि चलो, इसी बहाने इस सेवा को न सिर्फ जांच परख लिया जाए और यदि काम का लगे तो इसकी सेवा क्यों न ली जाए. वैसे, नेट पर भारत के आईपीटीवी माईवे के लिए ऋणात्मक समीक्षाओं की भरमार है, और मैं कम से कम किसी चमत्कार की उम्मीद तो कर ही नहीं रहा था.

मेरे हाँ करते ही, जल्द ही माईवे का प्रतिनिधि घर पर धमक गया. कुछ आसान सी फ़ॉर्मेलिटी करवाई गई, एक आवेदन भरवाया गया, सुरक्षा निधि के नाम पर 1500 रुपए लिए गए कि जब आपको यह सेवा पसंद न आए तो हम एक महीने के भीतर आपको यह पैसा वापस दे देंगे. माईवे आईपीटीवी के लिए घर पर बीएसएनएल-एमटीएनएल का ब्रॉडबैण्ड आवश्यक है. मैंने अपना ब्रॉड बैण्ड तब कटवा लिया था जब से मैंने बीएसएनएल की भरोसेमंद, आंशिक रोमिंग युक्त बढ़िया वायरलेस हाईस्पीड इंटरनेट सेवा – ईवीडीओ का प्रयोग करना प्रारंभ कर दिया था. तो मैंने एक सस्ती सेवा 125 रुपए प्रतिमाह, 250 मेबा डाउनलोड सीमा हेतु ब्रॉडबैण्ड ले लिया. यह बड़ी अजीब बात है कि माईवे आईपीटीवी के लिए आपके घर में ब्रॉडबैण्ड होना आवश्यक है. भई, मैं टीवी देखना चाहता हूं, कम्प्यूटर चलाना नहीं तो क्या जबरन मुझे ब्रॉडबैण्ड थमाया जाएगा इसके लिए? मैंने विरोध दर्ज किया तो बताया गया कि यह बात पाइपलाइन में है, और इस जबरिया आवश्यकता को जल्द ही खत्म किया जाएगा.

आवेदन के तीसरे दिन माईवे के इंजीनियर मि. तुषार कनेक्शन आईपीटीवी लगाने पहुँच गए. आईपीटीवी के लिए एक छोटा सा सेट-टॉप बॉक्स होता है, और एक रिमोट कंट्रोल. आईपीटीवी को आपके ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन के मॉडम के एक नेटवर्क पोर्ट से जोड़ा जाता है. मेरे पास का मौजूदा वायरलेस मॉडम टाइप 4 ने कुछ समस्याएँ खड़ी की तो टाइप 1 लगाया गया. फिर भी काम नहीं बना तो 2 घंटे की अनवरत कोशिश के बाद पता चला कि नए सेट-टॉप बॉक्स में भी खराबी है, क्योंकि वो बूट नहीं हो रहा था. उसे बदला गया, और आगे कोई आधे घंटे के जद्दो जहद और तीन बार सेट-टॉप बॉक्स को रीबूट करने के उपरांत आईपीटीवी के होम के दर्शन टीवी पर कुछ यूं दिखे:

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यहाँ पर कुछ तकनीकी बातें – मैंने जो ब्रॉडबैण्ड इस आईपीटीवी के लिए लिया है, वो 125 रुपए महीने का है, और उसकी लिमिट है – कृपया ध्यान दीजिए – 250 मेबा प्रति माह. अब जो आईपीटीवी इसी कनेक्शन पर लगाया गया है, वो अभी तो एक माह के लिए मुफ़्त है, मगर यदि मैं इसका बेसिक प्लान लूं, तो 100 रुपए मासिक का है. और, आईपीटीवी में प्रतिमिनट 2 एमबीपीएस की गति अच्छे टीवी दर्शन के लिए आवश्यक है. और, यदि मैं 4 घंटे भी नित्य टीवी देखता हूं, तो आप स्वयं गणना करने के लिए स्वतंत्र हैं कि मैं कितने जीबी डाटा इस सौ रुपल्ली में प्रयोग कर लूंगा आईपीटीवी के जरिए. मगर यदि मैं डाटा का प्रयोग ब्रॉडबैण्ड कम्प्यूटिंग के लिए करूं तो जेब कट जाएगी. ये दोतरफा, ग्राहकों को चूना लगाने की नीति किसी एंगल से समझ नहीं आई.

अब आइए देखते हैं आईपीटीवी के तकनीकी पहलू –

सेट-टॉप बॉक्स –

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सेट-टॉप बॉक्स छोटा सा, वजन में हल्का है और इसमें सामान्य टीवी के लिए एसवीडियो और कम्पोजिट वीडियो-ऑडियो आउट हैं. एक ईथरनेट आरजे45 पोर्ट तथा पावर इनपुट सॉकेट है. एक यूएसबी भी इसमें दिया है, मगर इसके बारे में तुषार द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई, कि यह क्या कर सकता है और किसलिए है. इसका मैन्युअल भी नहीं मिला जिससे पता किया जा सके कि इसका कार्य क्या है. माईवे की साइट पर इंस्टालेशन मैनुअल में बताया गया है कि इसका प्रयोग वायरलेस टीवी ब्रॉडकास्ट खास यूएसबी डांगल के जरिए प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है.

सेट-टॉप बॉक्स रिमोट कंट्रोल –

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रिमोट कंट्रोल अनावश्यक लंबा और भारी है. इसमें दो AA आकार के बैटरी के कारण यह नीचे की ओर ज्यादा भारी हो जाता है जिससे पकड़ में बैलेंसिंग की समस्या होती है. मेन्यू में नेविगेशन के लिए जो कुंजियाँ दी गई हैं वे रिमोट के एकदम ऊपरी हिस्से में दी गई है जिससे छोटे हाथ वालों को एक हाथ से पकड़ कर उंगलियों से दबाने में समस्या होती है. नेविगेशन कुंजियों को जगह होने के बावजूद बहुत पास पास रखा गया है जो कुंजियाँ दबाने में समस्या पैदा करता है और कहीं का कहीं दब जाता है. ओके बटन के लिए गैप भी सही नहीं है, जिससे उसे दबाने में भी समस्या आती है. मोटी उंगलियों के लिए तो खास समस्या पैदा करती है. रंगीन बटन विशिष्ट फंक्शनों के लिए हैं और ठीक जगह पर हैं, मगर बाकी के बटन बहुत ही क्राउडेड और पास पास हैं.

आईपीटीवी में नया क्या है?

मेरे पास एयरटेल डीटीएच सेवा पहले से ही उपलब्ध है. आईपीटीवी की सेवा डीटीएच सेवा से उन्नत बताया जा रहा है. मैंने एयरटेल डीटीएच के ऑडियो आउट को फ़िलिप्स एचटीएस 3378 के ऑक्जिलरी 1 से जोड़ा हुआ है. आईपीटीवी को मैंने इसके ऑक्जिलरी 2 से जोड़ दिया ताकि डीटीएच तथा आईपीटीवी के ऑडियो वीडियो दोनों की क्वालिटी में तुलना संभव हो सके.

आईपीटीवी में पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्ट के अलावा और भी दूसरी ढेरों, सुविधाएँ हैं और संभावनाएँ अनंत हैं. चूंकि आपका टीवी इंटरनेट से जुड़ जाता है तो भविष्य में ही सही (अभी तो नहीं है,) इंटरनेट की सारी सुविधाएँ आईपीटीवी के जरिए कम कीमत में मिल सकती हैं. वर्तमान में टीवी प्रसारणों के अतिरिक्त आईपीटीवी में निम्न सुविधाएँ अतिरिक्त रूप से मौजूद हैं –

· मूवी ऑन डिमांड – डीटीएच में सीमित – 4-6 फ़िल्में ही मिल सकती हैं, आईपीटीवी में असीमित हैं, और आप इन्हें पॉज कर सकते हैं, फारवर्ड-बैकवर्ड चला सकते हैं. जो डीटीएटच में संभव नहीं.

· नेट भ्रमण – जैसे कि आप अभी अपना ईमेल चेक कर सकते हैं. भविष्य में कीबोर्ड के जरिए ईमेल लिखने की संभावनाएँ उपलब्ध.

· माईवे आईपीटीवी की आई-सेवा के तहत प्रमुख सुविधाएँ जैसे कि रेल रिजर्वेशन, पीएनआर नंबर जानकारी, नक्शे में रास्ते देखना, पता ज्ञात करना इत्यादि.

· ऑन-डिमांड के तहत टीवी एपिसोड (जैसे कि महाभारत का कोई भी एपिसोड कभी भी देखें), बाबा रामदेव के योग, बच्चों की कहानियाँ, कविताएँ, अंग्रेजी सीखने के पाठ, कार्टून, गेम्स इत्यादि इत्यादि.

सेवा की असली समीक्षा – क्या आईपीटीवी वाकई दमदार है?

अभी तक तो हमने किताबी समीक्षा की कि आईपीटीवी में क्या दावा किया गया है और क्या संभावनाएँ हैं. मगर अब देखते हैं कि वास्तविक प्रयोग में यह कितना खरा उतरता है.

इंजीनियर तुषार द्वारा आईपीटीवी को संस्थापित किए जाने व चालू करने के बाद उसकी कुछ विशेषताओं को देखने परखन के उद्देश्य से मैंने रिमोट के जरिए नेविगेशन प्रारंभ किया तो पाया कि नेविगेशन बहुत ही धीमा और डिलेड रेस्पांस युक्त है. बटन दबाने के कोई 5-10 सेकण्ड बाद स्क्रीन पर बदलाव दिखता है. जब तक आप बटन दबाते हैं, और सोचते हैं कि शायद बटन सही ढंग से नहीं दबा होगा और दूसरा बटन दबा देते हैं. जिससे मामला और गड़बड़ा जाता है. मेन्यू का नेविगेशन भी बेहद खराब किस्म का है और अड़चनें पैदा करता है. आपको शुरू में मेन्यू में जाने और देखने के लिए सीखने में भी अच्छा खासा समय लगता है.

मैंने एएक्सएन टीवी पर सो यू थिंक यू कैन डांस लगाया. दस मिनट बाद, जब एक बढ़िया डांस सीक्वैंस चल रहा था स्क्रीन अचानक फ्रीज हो गया. मैंने सोचा एकाध मिनट में यह ठीक हो जाएगा, मगर नहीं हुआ. मैंने रिमोट के दो चार बटन दबाए, स्टैंडबाई का बटन दबाया, मगर कुछ नहीं हुआ. तुषार ने काल सेंटर का नंबर लिखवाया था, कि कोई समस्या आने पर वहाँ काल करें. मैंने काल सेंटर लगाने की कोशिश की, दो-तीन बार लगाने के बाद उनके स्वचालित वाइस इंटरेक्टिव रेस्पांस के बाद आगे किसी से बात ही नहीं हो पाई. थक हार कर वापस तुषार को नंबर लगाया जो इमर्जेंसी के लिए दिया गया था. उन्होंने कहा कि वो आधे घंटे से आते हैं, देखने के लिए. उनका आधा घंटा अड़तालीस घंटा बीतने के बाद भी नहीं आया है.

फिर मैंने जो तुषार से इंस्टालेशन के समय सीखा था, के मुताबकि सेट-टॉप बॉक्स को रीबूट कर उसे चालू करने की कोशिश की. मगर सेट-टॉप बॉक्स उस समय रीबूट नहीं हुआ. रीबूट करने के लिए सेट-टॉप बॉक्स में न तो कोई रीसेट बटन है और न ही कोई ऑन-ऑफ स्विच. इसके लिए आपको उसका पावर कार्ड साकेट में से निकालना होगा या पावर प्लग. हद है! तो, इस तरह से मेरा प्रोग्राम ‘सो यू थिंक यू कैन डांस’ अधूरा ही रह गया. शायद नेट में खराबी आ गई थी, और आईपीटीवी सेट-टॉप बॉक्स काम नहीं कर रहा था.

कोई तीन घंटे बाद सेट-टॉप बॉक्स को फिर से चालू किया, तो इस दफा चालू हो गया. जब भी सेट-टॉप बॉक्स बन्द किया जाता है तो उसे चालू होने में 2-3 मिनट लगते हैं. तो यदि आपको टीवी देखने का मूड हो रहा हो, या कोई प्रोग्राम 8 बजे से चालू होता हो तो आप कोई 2-3 मिनट पहले से इसे चालू कर लें, नहीं तो रह जाएंगे. चलते चलते यह बीच बीच में बन्द होता रहा. कभी इसे रीबूट करना पड़ा तो कभी स्टैण्डबाई से फिर से चालू करना पड़ा. कभी मेन्यू बदलते समय यह फ्रीज हो गया तो कभी चैनल बदलते समय. याने कि सेट-टॉप बॉक्स और फ्रीज का चोली दामन का साथ है ऐसा लगता है. कुल मिलाकर टीवी देखने का मजा किरकिरा.

मूवी ऑन डिमांड – चूंकि 1 महीने का मुफ़्त प्रयोग जारी है, अत: मूवी ऑन डिमांड में मुफ़्त उपलब्ध ऋतिक रोशन – अमीषा पटेल की फ़िल्म ‘आप मुझे अच्छे लगने लगे’ लगाई गई. फ़िल्म बढ़िया चलने लगी. इस बीच पड़ोस से मित्र आ गए. हमने यहाँ उपलब्ध पॉज बटन का प्रयोग किया. फ़िल्म पॉज हो गई. बढ़िया. मित्र के साथ बातों में उलझ गए, समय हो गया पता ही नहीं चला. आधे घंटे बाद प्ले बटन दबाया तो स्क्रीन पर आया – आपने बहुत देर के लिए पॉज बटन दबाया हुआ था अतः मूवी रीसेट हो गई है, शुरू से प्ले करें. धत् तेरे की! शुरू से फिर से प्ले किया गया और फारवर्ड बटन से मूवी आगे खिसका कर वांछित जगह से फिर से देखा. मूवी की क्वालिटी और साउंड बढ़िया थे. कम से कम डीटीएच के फ़िल्म चैनलों – फ़िल्मी, जी सिनेमा, सेटमैक्स इत्यादि से बढ़िया. पता नहीं क्यों डीटीएच के हिन्दी फ़िल्म चैनलों में स्टीरियो फ़ोनिक साउंड से फ़िल्में क्यों नहीं दिखाई जातीं. जबकि एचबीओ जैसे अंग्रेज़ी चैनलों में बढ़िया बाकायदा स्टीरियो साउंड रहता है. यही हाल कार्टून नेटवर्क का है. अंग्रेज़ी भाषा में स्टीरियो प्रसारण होता है, जबकि डब की हुई हिन्दी में मोनो प्रसारण होता है. क्या हिन्दी के दर्शक बेवकूफ हैं, जिन्हें स्टीरियो की समझ नहीं या जरूरत नहीं? यही हाल हिन्दी संगीत चैनलों का है – चाहे एमटीवी हो या चैनल वी या नाइनएक्स – सभी बेसुरे मोनो प्रसारण पेलते रहते हैं.

आईपीटीवी की अन्य सेवाएँ –

मैंने और भी तमाम उपलब्ध सेवाओं को जांचने परखने की कोशिश की. करावके के लिए आपको शुल्क अदा करना होगा. किड जोन में कुछ अच्छे नर्सरी राइम हैं, परंतु उनके चित्रांकन बेहद ही खराब और एनीमेशन बेहद धटिया. यही हाल कहानी और कार्टून के भी हैं. गेम्स में भी बहुत विकल्प अभी नहीं हैं. आईपीटीवी में सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें गीत-संगीत ऑडियो के लिए कोई चैनल नहीं (साइट पर म्यूजिक ऑन डिमांड कमिंग सून दिया है) है, जो कुछ है वो वीडियो चैनल हैं जो मोनो साउंड में फ़िल्मों के प्रोमो गाने सुना सुना कर आपको हद दर्जे के बोर बना सकते हैं.

कुल मिलाकर -

– अगले अड़तालीस घंटे इसी तरह बीते. आप कोई बढ़िया प्रोग्राम देख रहे हैं, पता चला कि वो किसी क्लाइमेक्स के दृश्य में फ्रीज हो गया, फिर आधे घंटे तक सेट-टॉप बॉक्स के चालू होने की कोई संभावना नहीं. चाहे आप उसे रीबूट कर लें, रिमोट के तमाम बटनों को दबा डालें, कुछ नहीं होगा. एक बार तो साउंड में खरखराहट घुस आई जो हर चैनल में एक जैसी थी. आईपीटीवी की वीडियो क्वालिटी डीवीडी बताई जा रही है, मगर यह एयरटेल डीटीएच के मुकाबले पैची और कम गुणवत्ता की है, जिसमें फाइन डिटेल्स गुम हो जाते हैं. यही हाल साउंड का है. मेरे फ़िलिप्स सिस्टम में एयरटेल डीटीएच की साउंड क्वालिटी आईपीटीवी के मुकाबले लगभग हर चैनल में बीस ही रही.

तो, यदि आप आईपीटीवी को इसके गुणों, विशेषताओं और सुविधाओं के नाम पर लेना चाहते हैं, तो अभी यह समय नहीं हुआ है. तकनालाजी नवीन है और इसे मैच्योर होने में, शुरूआती झटकों को दूर होने में संभवतः अभी समय लगेगा. इसमें कोई संशय नहीं कि आईपीटीवी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है, क्योंकि जिस तरह की इंटरेक्टिविटी और क्वालिटी कंटेंट – नेट से जुड़े रहने के कारण – आईपीटीवी आपको मुहैया करवा सकता है, वो कोई अन्य प्रकल्प कदापि नहीं. मगर आज के लिए – आईपीटीवी, कम से कम मेरे लिए - कम्प्लीट नो – नो! और, इसीलिए, एक महीने की मुफ़्त सेवा के बावजूद, मैंने माई-वे आईपीटीवी का रिमोट कोने में फेंक कर एयरटेल डीटीएच का रिमोट हाथ में वापस ले लिया है.

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12 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. पहले भी इस सेवा को लेने का इरादा नहीं था. अब तो बिलकुल भी नहीं है. फिलहाल टाटा स्काय जिन्दाबाद :)

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  2. इस निष्पक्ष से तकनीकी प्रेक्षण के लिए आपका आभार

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  3. पोस्ट दो बार छाप गए हैं, बिना फोटू के पोस्ट यह वाली है जिसको मेरे ख्याल से डिलीट कर सकते हैं।

    आईपीटीवी किसी हाल में भी डीटीएच से बेहतर नहीं होता, ट्रांस्मिशन की गति इंटरनेट के तार पर कम मिलेगी (भारत जैसी जगह पर, परन्तु कोरिया/स्वीडन जैसी जगह पर भी 16mbps के आसपास ही मिलेगी) जबकि डीटीएच में सीधा सैटेलाइट लिंक होता है जिसकी गति प्रायः काफ़ी अधिक होती है। और जो आप आईपीटीवी पर इंटरनेट सर्फ़िंग की बात कर रहे हैं वह डीटीएच पर भी संभव है, आखिर सैटेलाइट से सीधा संपर्क है, वह जुदा बात है कि यहाँ डीटीएच सेवाएँ ऐसी सुविधा देती नहीं हैं। इसी तरह मूवी ऑन डिमाण्ड आदि में भी फिल्म वगैरह बीच में पॉज़ कर बाद में वहीं से आगे देखने की सुविधा भी डीटीएच में मिल सकती है, यदि आपको सर्विस प्रोवाइडर दे नहीं रहा तो बात अलग है लेकिन ऐसा नहीं है कि यह संभव ही नहीं। जो आपने हिन्दी चैनल में मोनो साऊंड की बात करी वह कदाचित्‌ एयरटेल की समस्या हो सकती है, मैंने टाटा स्काई में ऐसा नहीं अनुभव किया।

    बाकी अपने यहाँ तो अभी केबल ही है वही ठीक है। डीटीएच के भाव और नीचे आ जाएँ तब विचार करेंगे उस पर जाने का! ;)

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  4. अमित जी,
    त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने का शुक्रिया.

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  5. रवि भइया इतना लंबा लिखा और मतलब यही निकला कि IPTV बेकार है, इस्‍तेमाल नहीं करें... इत्ती सी बात को सीधे कहते तो कितना मजा आता।

    होली की शुभकामनाएं।

    खबरों के मामले में इंटरनेट अव्‍वल : सर्वे

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  6. @ अमित
    मैंने तो सुना है फ़ाइबर ऑप्टिक जितनी स्पीड किसी की नहीं है .
    सैटिलाइट ट्रांसमिशन आँधी तूफान और तेज बारिश में प्रभावित होते हैं

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  7. आपके द्वारा की गयी समीक्षा हमेशा की तरह लाजवाब है | नयी चीजों कि समीक्षा आपके द्वारा ही पता चलती है | मै आपको एक बात और बताता चालू कि मेरे पास वाईड मोनिटर है जिस पर भारतीय टीवी चैनल चपटे दिखाई देते है | जबकि जर्मनी का चैनल D W tv बिलकुल सही दिखाई देता है | यानी कि उसका प्रसारण 16:9 में होता है जबकि भारतीय चैनलों का आज भी 3:4 में ही होता है | उसकी चित्र गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है आवाज भी स्टीरियो है| सरकारी मशीनरी का सभी जगह यही हाल है | मेरे पास बी एस एन एल का निक कार्ड है | मै इसके बारे में उनके विभाग वालो से भी ज्यादा जानता हूँ | जबकि वो आज तक मुझे कभी संतुष्टी वाला जवाब (तकनीक से सम्बन्धित ) नहीं दे पाए है |

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  8. जानकारी के लिए आभार.

    यह बात अलग है कि भारत में जब भी कोई नई तकनीकि आती है तो मान कर चलें कि आमतौर पर हार्डवेयर obsolete ही होगा. सीमेंस का हथौड़ा मोबाइल फ़ोन आपको याद ही होगा. यही कंप्यूटर के साथ भी था. उम्मीद न करें की आपको लेटेस्ट सेट टॉप बॉक्स दिया जा रहा है. और जहाँ तक तुषारों की बात है, आप जैसे जागरूक उपभोक्ता उनसे कहीं अधिक जानकारी रखते हैं.

    फिर भी अभी बहुत ज़ल्दी है इस तकनीक पर कुछ भी कहना. यह तकनिकी फिअट कार के मॉडल सरीखी है जो कब बंद हो जाए कुछ नहीं पता ...

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  9. बढ़िया जानकारी दी अपने आभार ! शुभकामनायें स्वीकारें !

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  10. पूरा लेख पढ़ा, निष्कर्ष ये कि आइपीटीवी फिलहाल भारत में दूर की कौड़ी है। दूसरी बात ये कि हमको टैंशन लेने की जरुरत ही नहीं, एक तो हमारे शहर में अगले कई सालो तक इसका नामोनिशान नहीं आयेगा दूसरा हम टीवी देखते ही नहीं। :-)

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  11. रिमोट देख कर हाथ कि उंगलियाँ मचल उठी :) :)
    पता नहीं ये सब कब मिलेगा... :( :(

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  12. आपके द्वारा बढ़िया जानकारी के लिए आपका आभार!!

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आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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