नए साल के नए संकल्पों के आपकी राहों के रोड़े

नए साल में हम-आप एक से बढ़िया एक संकल्प लेते हैं. पर, क्या करें, इन संकल्पों की राह में इतने ही या इससे भी बढ़िया रोड़े चहुँ-ओर से चले आते हैं और नतीजा वही होता है – ढाक के तीन पात! आपकी पूरी कोशिश होती है, आप जी जान से कोशिश करते हैं कि आप अपने नए साल के नए संकल्प को भरसक पूरा करें, मगर जालिम दुनिया आपके संकल्प को तोड़ने के लिए हर किस्म की साजिश करती नजर आती है. और, इसी वजह से, आमतौर पर प्राय: हम सभी के संकल्प, अगर आनन फानन नहीं, तो कुछ दिनों में, टूट ही जाते हैं.

इस साल आपने एक बढ़िया संकल्प लिया. आपका संकल्प है कि आप आज से अपने कार्य स्थल पर, अपने ऑफ़िस या दुकान पैदल जाएंगे. आखिर दूरी महज चार-छः किलोमीटर की ही तो है. इस बहाने थोड़ी वर्जिश हो जाएगी और दुनिया में कार्बन फुटप्रिंट को थोड़ा सा कम करने में आपका भी महती योगदान रहेगा. वैसे भी पिछला पूरा माह कोपेनहेगेन-कोपेनहेगेन मय हो गया था.

जैसे ही आप घर से निकलते हैं, आपके घर के नुक्कड़ का पनवाड़ी आपको टोकता है – क्या साहब जी, आज गाड़ी खराब हो गई है क्या? वो जेनुइन प्रश्न पूछता है, मगर आप झुंझला कर उसे बताते हैं कि नहीं भाई, दुनिया का तापमान बढ़ रहा है इसी वजह से मैंने इस साल ये संकल्प लिया है कि मैं काम पर पैदल जाऊंगा. गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करूंगा. पनवाड़ी असमंजस में होता है उसके पल्ले ये नहीं पड़ता है कि दुनिया का तापमान कम हो रहा है, तो अभी अपने यहाँ सर्दी के मारे बुरा हाल क्यों हो रहा है...

आप थोड़ा आगे निकलते हैं तो यूसुफ़ मियाँ पीछे से अपने चमचमाते, लेटेस्ट मॉडल के वाहन पर सवारी करते आते हैं और प्रश्न दागते हैं – क्या मियाँ, गाड़ी पंचर हो गई क्या? चलिए हम आपको लिफ़्ट दिए देते हैं. आप उन्हें निवेदन पूर्वक मना करते हैं कि भई, आज, नए साल से मैं काम पर पैदल जाया करूंगा. यूसूफ़ मियाँ यह कहते ठहाके लगाते चले जाते हैं – अरे मियाँ, इतनी बचत मत करो, कमा रहे हो तो कुछ खर्च भी करो.

जैसे तैसे आप अपनी यात्रा की आधी दूरी तय करते हैं तो मेन रोड चला आता है. वाहनों की रेलम पेल. हाईवे को जेब्रा क्रासिंग पर से भी पार करना टेढ़ी खीर. आप दिल कड़ा कर आगे बढ़ते हैं तो टैम्पो की चपेट में आते आते बचते हैं. एक हायाबूसा चालक आपको अपने वाहन और अपने चालन दोनों की क्षमता जबर्दस्ती बताने के लिहाज से आपको कट मारकर जाता है और आप गिरते गिरते बचते हैं. आपका मन एक बारगी कहता है कि भाड़ में जाए नये साल का नया संकल्प. आप एक खाली ऑटो के लिए हाथ उठाते उठाते रह ही जाते हैं.

ले देकर आप अपने रास्ते का तीन चौथाई हिस्सा पार कर ही लेते हैं. आप सोचते हैं कि आपने कितना महान काम किया है. जब धरती को बचाने का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें आपका नाम भी स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा – आपने भी आखिर अपना वाहन तजकर काम पर पैदल जाकर धरती को बचाने की मुहिम में बड़ा योगदान दिया जो है. इसी ख़ामख़याली में आपका पाँव सड़क के गड्ढे पर पड़ जाता है और आपके पाँव में मोच आ जाती है. आप गिर पड़ते हैं और आपसे चला नहीं जाता. अब तो आपके पास कोई रास्ता नहीं बचता. अंतत: आपका संकल्प टूट ही जाता है और आप वाहन की शरण में आ ही जाते हैं.

ये तो सिर्फ एक संकल्प की बात हुई. आप कोई सा भी, कैसा भी संकल्प लेकर देख लें. संकल्प कोई भी हो, विश्व की तमाम शक्तियाँ आपके संकल्पों को तोड़ने के लिए जी जान से साजिशें करेंगी, राह में तमाम रोड़ें अटकाएंगी और आपका संकल्प अंतत: टूट ही जाएगा.

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बहुत अच्छी रचना। बधाई।

बड़ी आफ़त है मियां। इसई लिये हम कोई संकल्प नहीं लिये।

. ... ... और आपका संकल्प अंतत: टूट ही जाएगा!

पसंद आया आपका यह अनूठा अंदाज़ - चुनौती देने का!

नया वर्ष हो सबको शुभ!

जाओ बीते वर्ष

नए वर्ष की नई सुबह में

महके हृदय तुम्हारा!

बचत और ईधन बचाने के लिये छोटी कार खरीदी और संकल्प लिया लेकिन लोग कहते है बुरे दिन आ गये क्या जो इतनी छोटी गाडी से चलते हो .

सही कहा है आपने | संकल्प करना अलग बात है निभाना अलग बात है | आपके ब्लॉग पर वजन कम करने का विज्ञापन देख कर कुछ अलग ही महशूस हुआ है |

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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