इलाहाबाद चिट्ठाकार सम्मेलन के कुछ हा हा ही ही , हाय हैलो के ऑडियो - वीडियो

आइए, आग को कुछ और हवा दें. दूर-सुदूर प्रांतों-देशों में कान-नाक-मुँह खोलकर अपने कम्प्यूटर के सामने चिंतित होकर ब्लॉगियाती-टिपियाती जनता के लिए, कि इलाहाबाद में क्या क्या न हुआ और क्यों न हुआ और हुआ तो क्यों हुआ इत्यादि के लिए   प्रस्तुत है सम्मेलन के कुछ हा – हा – ही – ही , हाय हैलो के ऑडियो वीडियो.

 

सबसे पहले मनीषा पाण्डेय को सुनें. उनका ओजस्वी वक्तव्य पूरा रेकॉर्ड न कर पाया इसका अफसोस है. – कारण - वही : हार्डवेयर फ़ेल्योर.

 

अब विनीत कुमार को सुनें. ऑडियो क्वालिटी बहुत खराब है – (सेमिनार हाल में ही ऑडियो गूंज रहा था बेसबब) मगर विनीत को सुनना उनको पढ़ने से ज्यादा आनंददायी है. यकीन मानें.

 

आगे विनीत से लिया गया छोटा सा साक्षात्कार. छोटा इसलिए, कि साक्षात्कार के बीच में ही बैटरी जाने कैसे माशाअल्ला हो गई और एक वीडियो करप्ट हो गया. फिर भी, जो थोड़ा सा बचा है वह भी इसलिए महत्वपूर्ण है कि विनीत ने जब से ब्लॉग लिखना शुरू किया, उनका लेखन, उनकी लेखनी का तेवर, उनकी शैली सबकुछ कूदती फांदती नित्य नई ऊँचाईयाँ पाती गई. उन्होंने बातों बातों में बताया कि पिछले साल-डेढ़ साल में ही उन्हें कई-कई प्रमुख जगहों से नियमित लेखन के प्रस्ताव मिलते रहे हैं और उन्होंने हिन्दी लेखन से ही पच्चीस हजार रुपए से भी अधिक की आय इस छोटे से समय में अर्जित कर ली है. जहाँ हिन्दी की प्रमुख पत्रिकाएँ बेहद कम, मात्र रस्मी पारिश्रमिक देती हैं, ऐसे में उनकी यह उपलब्धि अचंभित करती है.

 

विनीत का साक्षात्कार – भाग 1

 

विनीत का साक्षात्कार – भाग 2

वैसे तो अपने पास और भी दर्जनों एलीबाई हैं कि वहाँ उपस्थित चिट्ठाकारों ने सरकारी पैसे से और क्या क्या मौज मस्ती की, मगर हमने हांडी के चावल दिखा दिए हैं. तो दोस्तों, आपका तो पता नहीं, इधर से चिरकुटाई बन्द. अब से रेगुलर ब्लॉगिंग जारी आहे. जै चिट्ठाकारी - जै जै चिट्ठासंसार!

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जय हो...विनित को सुनना अच्छा लगा...मनीषा की आवाज क्लियर न हो पाई.

सच है, आवाज़ बहुत गूंज रही है, लेकिन फिर भी सम्मेलन को महसूस तो करा ही रहा है.

विनीत अपन लोगों के जमाने के सेलिब्रिटी हैं. पूत के पांव पालने में नजर आते हैं. लगो रहे विनीत भाई...
रवि रतलामी जो को धन्यवाद जो उन्होंने टैलेंट को पहचाना व इंटरव्यू कर प्रोत्साहित करने का नायाब काम किया...

रविजी यू खूब याद दिलाया...विनीत के प्रस्‍तुतीकरण का आडियो रिकार्ड किया था... मौका मिलते ही अपलोड करेंगे... विनीत को सुनना सदैव ही स्‍फूर्तिदायक होता है।

रविजी धन्यवाद .
सम्मलेन में न जा पाने की कमी आपने काफी कुछ पूरी कर दी .

अच्चा है यह तकनीकी जुगाड तो ज़रूरी है । अगली बार इससे बेहतरी न हो यह दुआ ।

सम्मेलन के ऑडियो ऊपर साफ़ नहीं आए, शोर बहुत छा गया पूरे ऑडियो में। लेकिन विनीत बाबू का साक्षात्कार बढ़िया रहा, सुनकर और उनके विचार जानकर अच्छा लगा। :)

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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