टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

थकेले दिग्गजों की तरफ से आपके लिए ब्लॉगिंग टिप्स...

वैसे तो अपने तमाम हिन्दी चिट्ठाकारों ने समय समय पर ब्लॉग उपदेश दिए हैं कि चिट्ठाकारी में क्या करो और क्या न करो. परंतु अभी हाल ही में दो सुप्रसिद्ध, शीर्ष के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले भारतीय अंग्रेज़ी-भाषी ब्लॉगरों की गिनती में शामिल, अमित वर्मा (इंडिया अनकट) तथा अर्नाब –ग्रेटबांग (रेंडम थॉट्स ऑफ डिमेंटेड माइंड) ने अपने अपने ब्लॉगों में कुछ काम के टिप्स दिए हैं. उनके टिप्स यहाँ दिए जा रहे हैं. अमित वर्मा से विशेष अनुमति ली गई है तथा ग्रेटबांग के चिट्ठे की सामग्री का क्रियेटिव कामन्स के अंतर्गत प्रयोग किया गया है.

तो, सबसे पहले, पहली बात. पेंगुइन की एक किताब – गेट स्मार्ट – राइटिंग स्किल्स के लिए लिखे अपने लेख में अमित वर्मा कहते हैं:

ब्लॉग लेखन मनुष्य की सर्जनात्मकता का सर्वाधिक आनंददायी पहलू है. एक चिट्ठाकार पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होता कि वो क्या लिखे, कैसे लिखे, कितना लिखे. आप चार शब्दों में अपना पोस्ट समेट सकते हैं तो चालीस पेज भी आपके लिए कम हो सकते हैं. इसी तरह, न तो विषयों पर कोई रोक है, और न आपकी शैली पर कोई टोक.

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(अमित वर्मा – चित्र – साभार http://labnol.org )

अमित अपने ब्लॉग में आगे बताते हैं

“तो, यदि आप स्वांतःसुखाय ब्लॉग लिख रहे हैं तो आप दुनिया जहान की चिंता आराम से छोड़ सकते हैं. और इस चिट्ठे को भी गोली मार सकते हैं और बिन पढ़े सटक सकते हैं. परंतु...

परंतु यदि आप चाहते हैं कि आपका लिखा सर्वत्र पढ़ा सराहा जाए, आपके नियमित पाठक आपके नियमित पोस्टों को पढ़ें तो फिर आपको कठिन जतन करने होंगे. इसका कारण है – इस माध्यम की प्रकृति.

जब कोई पाठक पढ़ने के लिए कोई किताब खरीदता है, तो फुर्सत के लम्हे ढूंढता है और फिर उसमें डूब कर पढ़ने की कोशिश करता है. वही पाठक यदि कोई पत्र-पत्रिका पढ़ने के लिए उठाता है तो सुबह के नित्य कर्म या चाय की चुस्कियों और मित्रों के गप सड़ाकों के बीच उसके पन्ने पलटता है. पर जब कोई पाठक किसी ब्लॉग पर विचरण करता है तो वो दूसरी तरफ कई कई सारे काम एक साथ करता होता है – जैसे कि चैट विंडो में चैट कर रहा होता है, ईमेलिया आदान प्रदान करता होता है, कहीं किसी गेम में हाथ आजमा रहा होता है या यू-ट्यूब के किसी वीडियो के बफर पर नजरें जमाया हुआ होता है कि कब ये पूरा हो और वो वीडियो देखे. आपका चिट्ठा इन सब के साथ प्रतिद्वंद्विता में लगा हुआ होता है पाठक का ध्यान खींचने के लिए. तो यदि आपका लेखन पाठक के ध्यान को आकर्षित करने में नाकामयाब होता है तो वो ब्राउज़र के किसी दूसरे टैब पर बिना हिचक भाग लेता है.

एक सफल चिट्ठाकार के लिए, सिर्फ और सिर्फ एक ही नियम है जिसे आपको निभाना है – वो ये है कि आप अपने पाठक के समय का लिहाज रखें. जो कोई भी सलाह आपको मैं यहाँ दे रहा हूं वो इसी नियम को ध्यान में रखते हुए दे रहा हूं.

कुछ चीजें हैं, जिन्हें मैंने ब्लॉगिंग में सीखी हैं वो हैं –

 

संक्षिप्तता में गुरूता है

लंबे लंबे वाक्यों, वाक्य विन्यासों, अनुच्छेदों और पृष्ठों से इंटरनेट के पाठकों को डराने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं है. आपके दोस्त, परिचित तो आपको भले ही झेल लेंगे, मगर एक अजनबी को अपना शिकार क्यों बना रहे हैं? इसलिए जितना बन पड़े अपने लेखन को संक्षिप्त रखें. (फुरसतिया टाइप चिट्ठाकार व पोस्टें इनके अपवाद स्वरूप हैं और रहेंगे, :)*  - रवि) छोटे, आसानी से समझ में आने वाले शब्दों, वाक्यों का प्रयोग करें, ये ध्यान रखें कि हर वाक्य आपकी पोस्ट के लिए जरूरी है, नहीं तो उसे उड़ा दें.

दिखावे से बचें

नए नए लिक्खाड़ अपनी भाषा शैली दिखाने लग जाते हैं. इससे बचें. लोगों को अपनी कहानी बतानी है, किसी मुद्दे पर अपने विचार रखने है तो इसके लिए जटिल, साहित्यिक, पुस्तकीय भाषा की आवश्यकता नहीं है. इसीलिए आपकी भाषा सादा और सरल होनी चाहिए. यदि आपका कोई पाठक ये कहता है कि वाह क्या बढ़िया लाजवाब शैली है आपके लेखन की – तो इसका मतलब ये है कि उसे आपके पोस्ट की विषय वस्तु ने नहीं खींचा है. आप जो कहना चाहते हैं, वो कह नहीं पाए. इसीलिए वो आपकी शैली को देखने व सराहने लग गया. आपका लेखन ब्लॉग पर केंद्रित न हो, बल्कि आप क्या लिख रहे हैं उस पर केंद्रित हो, नहीं तो आपके लेखन के टाइप्ड होते और अंततः एक ही शैली से लोगों को बोर होने में देर नहीं लगेगी. लेखन की शैली को लेखकीय तत्व के सदा पीछे होना चाहिए.

आप क्यों और किसलिए लिख रहे हैं

यदि आप अपने आदर्श पाठक की कल्पना कर सकें कि आप उसके लिए ब्लॉग पोस्टें लिख रहे हैं तो आपका लेखन आसान और आरामदायक हो सकता है. कभी कहीं अटक रहे हों तो ये सोचें कि आप इसे ब्लॉग पोस्ट के रुप में नहीं, बल्कि अपने किसी मित्र को ईमेल भेज रहे हैं. फिर देखिए कि आप इसे कितना जल्दी और कितने सुभीते से लिख सकेंगे.

पोस्ट में अपने बारे में भी कुछ कहें

नेट पर हजारों लाखों की संख्या में ब्लॉग हैं तो आदमी स्वतंत्र है कि वो क्या पढ़े और किस पर निगाह ही न मारे. पर आपके ब्लॉग में कोई न कोई ऐसी खास बात तो होगी ही. हां, है. वो है आप. अपने ब्लॉग के लिए एकमात्र खास बात, विशिष्ट बात आप हैं. इसलिए हर पोस्ट में छोटा सा ही सही, अपनी बात अवश्य जोड़ें – चाहे वो आपका अपना नजरिया हो, कोई अनुभव हो, या हजारों बार सुना-सुनाया गया कोई चुटकुला ही क्यों न हो. आपका ब्लॉग ही तो है जो आपको बाहरी दुनिया से जोड़ता है तो उसमें आप अपने बारे में अवश्य लोगों को बताएँ.

नियमितता से बड़ा कुछ नहीं

यदि आप चाहते हैं कि आपके ब्लॉग के नियमित पाठकों का बड़ा समूह हो तो आपको भी तो नियमित ब्लॉग ठेलने होंगे. एक बार पाठक को आपके लिखे को पढ़ने में आनंद मिलने लगेगा तो वो बारंबार आपके ब्लॉग पर आना चाहेगा. और चाहेगा कि जब भी वो आए, उसे कुछ न कुछ मिले. अगर उसे एक लाइन भी नया कुछ पढ़ने को मिल जाता है तो वो अगली मर्तबा एक अनुच्छेद की कामना लिए वापस जाता है. इसीलिए, नियमित लिखते रहें.

परंतु ये भी नहीं कि पोस्ट ठेलने के नाम पर कुछ भी अनर्गल भर दें. फिर, यदि आप ब्लॉग लेखन से बोर होने लगेंगे, क्या लिखें यही सोचने लगेंगे तो आपके पाठक भी आपके लिखे को पढ़ कर महाबोर होने लगेंगे और क्यों पढ़ें यही सोचने लगेंगे. आप अपने आपसे जोर जबर्दस्ती से पोस्ट तो लिखवा लेंगे, मगर आपके पाठकों पर तो कोई जोर जबर्दस्ती नहीं है. ऐसे में ब्लॉगिंग से अल्पविराम ले लें.

नए विषयों को आजमाने में डरें नहीं

ब्लॉग एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आप अपने लेखन में हर किस्म का प्रयोग कर सकते हैं. यदि आपको सन्देह है, तो ट्रिगर दबा ही दें. हो सकता है कि आपके नियमित पाठकों को यह परिवर्तन पसंद आए.

भाषा, वर्तनी पर ध्यान दें

ठीक है कि हिन्दी वर्तनी जांचक नहीं है, गूगल ट्रांसलिट्रेट जैसे औजारों से हिन्दी लिखना कठिन है, मगर भरसक प्रयास करें कि आपकी भाषा शुद्ध हो, वर्तनी की गलतियाँ न हों, यदि भाषा शुद्ध और सरल होगी तो आपके ब्लॉग पाठकों के पठन-पाठन में भी ये सरल रहेंगे.

कड़ियों का जमकर प्रयोग करें

आप अपने पाठकों को जितना ज्यादा देंगे, वे आपके उतने ही मुरीद होते जाएंगे और बारंबार आपके ब्लॉग पर आते रहेंगे. आप अपने ब्लॉग के जरिए अपने पाठकों की सबसे बड़ी सेवा उनका ज्ञानवर्धन के जरिए कर रहे होते हैं. और इसका सबसे सरल तरीका है पाठकों को इंटरनेट की कड़ियाँ प्रदान करना. यह इंटरनेट की खासियत है. एक छोटा सा पेज गहन ज्ञान के पृष्ठों की सैकड़ों कड़ियाँ समो सकता है. तो आप जिस विषय पर बात कर रहे होते हैं, जिस विषय पर आपने अपना पोस्ट ठेला है, उसके संबंधित काम की कड़ियाँ अपने पाठकों के लिए अवश्य डालें.

इस बात से निश्चिंत रहें कि कड़ियों को क्लिक कर आपके पाठक नए साइटों में चले जाएंगे और वापस आपके चिट्ठे पर नहीं आएंगे. यदि उन्हें आपके द्वारा प्रदत्त कड़ियों में काम की चीजें मिलती हैं तो वे इसका जिक्र कई मौकों पर करते हैं और आपके अगले पोस्ट का इंतजार करते हैं. पर ये भी ध्यान रखें कि आपका पोस्ट कड़ी की झड़ी न बन जाए जहाँ काम की चीजों को ढूंढ पाना मुश्किल हो – यहाँ भी पाठक के बहुमूल्य समय का ध्यान रखें.

अपने पाठकों को बेवकूफ़ न समझें

अपने पाठकों को अपने से ज्यादा स्मार्ट भले ही न समझें मगर अपने स्तर का स्मार्ट तो समझें ही. तो, किसी विषय पर लिखने व उसे पोस्ट करने से पहले अपने विषय ज्ञान को परख लें, लिखे हुए की सत्यता को प्रमाणित कर लें नहीं तो दूसरे ही पल आपके ज्ञान की वाट लगने ही वाली है समझें. साथ ही, यदि आपको किसी दूसरे के चिट्ठे में कोई चीज गलत नजर आती है तो अपने को सदा-सर्वदा-सर्वज्ञानी-महाज्ञानी मान कर पंडिताई न झाड़ें. सभ्य भाषा में गलती की ओर इंगित करें. गलतियाँ होती हैं. बोलें इस तरह जैसे कि आप सही हैं, परंतु सुनें इस तरह जैसे कि आप गलत हैं.

निजता से दूर रहें

चिट्ठाकारी के दौरान पोस्टों या टिप्पणियों में चाहे वे अपने स्वयं के ब्लॉग पर हो या दूसरे ब्लॉगों में, वार्तालाप और विचार-विमर्श के दौरान व्यक्तिगत होने से बचें. जरा से कहे गए व्यक्तिगत शब्द वातावरण में कड़ुवाहट घोलने में देरी नहीं करते. आमतौर पर स्वस्थ विचारविमर्श स्वस्थ मीडिया – जिनमें ब्लॉग भी शामिल है, जरूरी है, मगर निजी और व्यक्तिगत छींटाकसी से सारा गुड़ गोबर हो जाता है.

ऐसे समय में क्या करें? याद रखें कि विचार विमर्श विषय केंद्रित हो, व्यक्ति केंद्रित नहीं. किसी व्यक्ति के अभिप्राय, उसके ज्ञान या उसके मोजे के रंग पर प्रश्नचिह्न न लगाएँ. बस उस विषय पर अपना मत दें, कि उस विषय में आपके क्या विचार हैं. वह भी संयत, मृदु और सरल, संक्षिप्त भाषा में. निरपेक्ष पाठक आपके विचारों से सहमत होंगे, और यदि नहीं भी हुए तो वे आपके विचारों का आदर ही करेंगे.

विश्वासघात न करें

बहुतेरे चिट्ठाकार अपनी निजी जिंदगियों के बारे में अपने पोस्टों में लिखते रहते हैं. ठीक है. ब्लॉग आपका है, आप चाहे जो लिख सकते हैं. मगर, सिर्फ अपने बारे में. दूसरों के बारे में नहीं. और दूसरों की व्यक्तिगत जिंदगियों के बारे में तो कतई नहीं. एक विश्वसनीय चिट्ठाकार होने के नाते आपको दूसरे व्यक्ति की निजता का आदर करना चाहिए. दूसरे किसी से की कभी गई चर्चा, दूसरों के ईमेल, उनकी अन्य जानकारियाँ इत्यादि न छापें. यदि छापना आवश्यक लगे तो पहले अनुमति ले लें. यदि आप ऐसी चीजें गाहे बगाहे या यदा कदा छाप देते हैं, तो लोग आपसे कतराएंगे और आपके सामने कुछ भी कहने से हिचकेंगे कि पता नहीं कब ये पोस्ट बनकर नेट की दुनिया में चला आए! इसीलिए, लोगों का विश्वास बनाए रखें.

अपने ब्लॉग पेज को भानुमति का पिटारा न बनाएँ

जब आप किसी दुकान में जाते हैं तो कोई चीज खरीदते समय सबसे पहले उसके रूप रंग को देखते हैं. और जो चीज ज्यादा आकर्षक लगती है, उसे पहले उठाते हैं. मगर फिर बाद में उसकी उपयोगिता को भी ठोंक बजाकर देखते हैं. तो आपका ब्लॉग साफ सुथरा और पठन-पाठन में आसान हो. साइडबार में विजेटों का मेला न लगाएँ. बहुत से ब्लॉगों में साइडबार में घड़ी लगाया हुआ दिखता है. हर कंप्यूटर के तंत्र तश्तरी में जब घड़ी मौजूद रहता है तो ब्लॉग के साइडबार में घड़ी लगाना बेवजह तो है ही, ये पेज लोड में भी देरी करता है.

चित्रों का भरसक प्रयोग करें

जहां तक बन पड़े अपने ब्लॉग पोस्ट में एकाधिक चित्र लगाएं. इससे आपका ब्लॉग रंग व जीवंतता से भरपूर हो जाता है. पर सुनिश्चित हों कि चित्र किसी दूसरे की सम्पत्ति न हों. नेट से उतारे गए चित्र कॉपीराइट न हों. कॉपीलेफ़्ट, मुफ़्त चित्र प्रयोग करें. यदि आप जाने अनजाने ऐसे चित्रों का प्रयोग करते हैं जिनके बारे में कॉपीराइट का संज्ञान नहीं होता है, तो चित्र की साभार कड़ी अवश्य दें.

जब तक मजा है ब्लॉगिंग में, तब तक टिकें वरना तम्बू उखाड़ लें

ये मेरी आखिरी सलाह है. कोई भी काम ऐसा न करें जिसमें मजा न हो. और फिर, ब्लॉगिंग है ही मजे के लिए. जब आपको आपकी अपनी ब्लॉगिंग में मजा नहीं रहेगा तो आपके पाठकों को क्या खाक मजा आएगा आपकी पोस्टों को पढ़ने में! ब्लॉगिरी आपको कोई करोड़पति तो नहीं बना रहा है तो फिर मजबूरी में ब्लॉगिंग क्यों? पर ये बात भी जानें कि ब्लॉग का एक पोस्ट भी मजे में लिख लेना अपने आप में एक पुरस्कार है. तो अपने आप को नियमित, मजे लेकर पुरस्कृत करते रहें!

सार संक्षेप:

वेब डिजाइन

1 अपने ब्लॉग को व्यवस्थित रखें. इसे साफ सुथरा व आसानी से पठन योग्य रखें
2 सामग्री जमाकर रखें. आपके ब्लॉग की तमाम सामग्री आपके पाठक को आसानी से उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था करें
3 यह सुनिश्चित करें कि आपकी साइट त्वरित गति से लोड हो
4 रंगबिरंगे व विविध आकारों के फ़ॉन्ट प्रयोग न करें. पाठ पढ़ने में आसान हो ऐसी रंग व्यवस्था करें. सफेद पृष्ठभूमि पर काला पाठ सर्वश्रेष्ठ योजना है.
5 चित्रों का प्रयोग करें. श्वेत स्थान (व्हाइट स्पेस) प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें

वेब ट्रैफ़िक

1 उन विषयों पर लिखें जो आपके लिए दिलचस्प हैं, तभी वे आपके पाठकों के लिए भी दिलचस्प होंगी.
2 अन्य ब्लॉगों पर भी विचारविमर्श में हिस्सा लेते रहें. परंतु मात्र अपनी उपस्थिति यत्र तत्र दर्ज न करवाते रहें. यदि आप विचारविमर्श में गूढ़ और गहन विचार रखेंगे तो सबका ध्यान खीचेंगे, और लोग आपके ब्लॉग पर अवश्य उपस्थिति देंगे
3 अपने पसंद के ब्लॉगों को अपने ब्लॉग में लिंकित करें दें. समय समय पर उनका जिक्र करते रहें.
4 टैग्स व श्रेणी का प्रयोग हर ब्लॉग पोस्ट में करें. पर, एक ही पोस्ट में चार दर्जन टैग्स न लगाएं
5 सम-सामयिक विषय पर लिखें. यदि आप वर्तमान समसामयिक विषय पर लिखते हैं तो लोगों का रुझान ऐसे विषयों पर जाहिर है अधिक होता है और वे ऐसे विषयों पर अधिक जानकारियाँ पाना चाहते हैं
6 नियमित लिखें. आप नियमित रहेंगे तो आपके पाठक भी आपको पढ़ने के लिए नियमित बने रहेंगे

बढ़िया पोस्ट का रहस्य

1 जिसके बारे में आपको ज्ञान हो, उसी विषय पर लिखें. उथले ज्ञान का प्रदर्शन न करें. इंटरनेट पर आपकी अज्ञानता का भंडा फूटने में सिर्फ एक क्लिक की देरी होती है.
2 उन तमाम सामाजिक-राजनीतिक विषयों के बारे में लिखें जिनके बारे में आपको लगता है कि आपको अपने विचार प्रकट करने चाहिएँ.
3 कोशिश करें कि आपके ब्लॉग में लोगों को खास चीज मिलती है जो अन्यत्र नहीं मिलती (जैसे कि इस ब्लॉग में व्यंज़ल – :) - रवि) – अब चाहे वो विचार हो, हास्य-व्यंग्य हो या 4 कविता कहानी कार्टून या फिर कुछ और. अन्यथा कोई भला आपके ब्लॉग को पढ़ने कौन आएगा?
5 कड़ियाँ प्रदान कर अपने पाठकों का भला करें और उनके ज्ञान में वृद्धि करें.
6 संक्षिप्तता में समग्रता के नियम का पालन करें. पाठक के समय का लिहाज करें. सादा, सरल लिखें.

कॉपीराइट नियम

1 इंटरनेट पर कोई भी किसी भी तरह की वस्तु डिफ़ॉल्ट से कॉपीराइट होती है – वे सामग्री भी जिनमें कॉपीराइट नोटिस नहीं हैं
2 किसी अन्य के पोस्ट को बिना अनुमति के पूरा का पूरा न उतारें. संदर्भ देते हुए मूल सामग्री की कड़ी अवश्य दें.
3 उद्धरण देना अच्छी बात है, मगर कड़ियाँ अवश्य दें.
4 अपने ब्लॉग सामग्री के लिए कॉपीराइट नोटिस अवश्य लगाएँ. चाहे वो क्रिएटिव कामन्स हो या ग्नू – जीपीएल जैसा मुक्त स्रोत का ही क्यों न हो.”

ये सलाहें अमित वर्मा की थीं जिनके चिट्ठे को 9500 से अधिक लोग नियमित सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं. अर्नाब के चिट्ठे रेंडम थॉट्स ऑफ डिमेंटेड माइंड को 4575 से अधिक लोग नियमित सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं. अर्नाब ने जब ब्लॉग लिखना शुरू किया तो इनके चिट्ठे को शुरू में कोई पढ़ता ही नहीं था. कोई पढ़ता भी होगा तो कोई टिप्पणी ही नहीं करता था. कई महीनों तक ये स्थिति बनी रही. तो एक दिन इन्होंने लिखा कि मैं किस लिए और किसके लिए लिखता हूं. मगर ये लगातार लिखते रहे. और आज चंद प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी चिट्ठाकारों में इनका नाम शामिल है.

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अर्नाब ब्लॉग लेखन के लिए 5 बिनमांगी सलाहें कुछ इस तरह से दे रहे हैं –

1. कभी हार नहीं मानें – बस लिखते रहें. ईमानदारी से लिखते रहें, नियमित लिखते रहें. आज नहीं तो कल – दुनिया आपका, आपके लेखन का नोटिस तो लेगी ही. मैंने जब लिखना चालू किया तो कोई माई का लाल मेरे लिखे को पढ़ता ही नहीं था. टिप्पणी देना तो दूर की बात. मैं दिन पर दिन निराश और हताश होता जा रहा था. पर मैंने कभी भी हार नहीं मानी. मैं बस लिखता गया. और आज मेरे 600 पोस्ट पर 36 हजार जेनुइन टिप्पणियाँ मेरी सफलता की कहानी बयान करती हैं.

2. गलत कारण से चिट्ठाकारी न करें – यदि आपको लगता है कि अपनी चिट्ठाकारी से आप आजीविका चला सकते हैं, या कोई दुकानदारी चला सकते हैं या फिर समाज में क्रांति ला सकते हैं तो बेहतर है आप चिट्ठाकारी का विचार छोड़ दें. भारत में चिट्ठाकारी से आजीविका चंद अपवादों को छोड़कर संभव नहीं है. (हिन्दी में तो ख़ैर बिलकुल ही नहीं है - रवि) इसीलिए, ब्लॉग को ब्लॉग के रूप में ही रहने दें और ब्लॉगिंग के लिए ही ब्लॉग लिखें. हो सकता है कि आपके परिपक्व लेखन (हिन्दी ब्लॉगिंग में भी कई हैं ब्लॉग से प्रिंट मीडिया में आ चुके हैं- रवि) को प्रिंट मीडिया में जगह मिलने लगे और इस तरह कुछ मानदेय पारिश्रमिक मिलने लगे.

3. तकनॉलाजी में न घुसें – अपनी चिट्ठाकारी को शुद्ध रहने दें. माइक्रोब्लॉगिंग, मोब्लॉगिंग, पॉडकास्टिंग, वीडियोकास्टिंग, सर्च इंजिन ऑप्टीमाइजेशन इत्यादि इत्यादि अनाप शनाप आंकड़े बाजी से दूर रहें. जब तक आप ओबामा गर्ल नहीं हैं, आपके लिए शुद्ध ब्लॉगिंग ही सर्वोत्तम है.

4. नकारात्मक, प्रतिकूल टिप्पणियों से निराश और हताश न हों. ये ध्यान रखें कि दुनिया में आप हर किसी को प्रसन्न नहीं रख सकते. आप किसी खास वर्ग के लिए कुछ लिखते हैं तो दूसरा वर्ग आपके पीछे डंडा बल्लम लेकर तो पड़ेगा ही. आप अपने पाठकों का फीडबैक लें, और इससे अपना लेखन सुधारें, मगर ये याद रखें कि आप अपने ब्लॉग के सर्वश्रेष्ठ प्रशंसक और टीकाकार आप स्वयं हैं, और आपको पता है कि आपको क्या लिखना है.

5. यदि आप अब तक ब्लॉगिंग में नहीं कूदे हैं, तो यही सर्वश्रेष्ठ समय है ब्लॉगिंग में अपने आप को झोंकने का. (हिन्दी के लिए तो खैर, ये स्वर्णकाल है – मात्र दस-पंद्रह हजार सक्रिय हिन्दी ब्लॉग में एक्सपोजर और निगाह में चढ़ने का इससे बेहतर समय और हो ही नहीं सकता - रवि) और, आखिरी बात – चिट्ठाकारी में सब जायज है, पर मौलिकता का ध्यान रखते हुए जी भर कर उन विषयों पर लिखें जिसमें आपको अनुराग है – भले ही वो माचिस के डिब्बों के अपने संग्रह के बारे में क्यों न हो - आप पाएंगे कि आपके भीतर की सृजनात्मकता अपने पूर्ण स्वरूप में स्वयंमेव बाहर आ रही है.

 

बहुत उपदेश झेल लिया? उपदेशों को मानें या सिरे से खारिज करें, समय एक ठो ब्लॉग पोस्ट ठेलने का तो हो ही गया है. है ना?

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

ब्लॉगिंग हेतु क्या सही और क्या गलत को इतनी अच्छी तरह बताने के लिए हम हिंदी भाषी पाठकों को बताने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद. आपका नियमित पाठक हूं पर शायद पहली बार साहस बटोरकर टिप्पणी कर रहा हूं. इतने उम्दा ब्लॉगर को मेरी तरफ से पुनश्च धन्यवाद....

बहुत ही काम की जानकारी मिली...वो भी सारी की सारी..कोई यूं तो थका नहीं होगा...अजी थकेला बनने के लिये ..पहले दिग्गज होना भी तो जरूरी है न.....

दो-चार नई बातें मालूम हुईं

आभार आपका ऐसी अनूठी जानकारी के लिए

बड़े काम की बातें बताई ब्लागरद्वय ने! शुक्रिया। आपने इसमें व्यंजल नहीं ठेला! :)

अमूल्य जानकारी, खासकर मेरे जैसे औघड़ बाबा टाइप लिक्खाड़ के लिये…

आज मिला है सम्पूर्ण ज्ञान । किन शब्दों मे धन्यवाद दू ।

'थकेला ब्‍लागर्स मन' उर्जावान हो गया. बहुत काम की बातें शेयर की है आपने.

थकेले दिग्गजों की टिप्स बहुत ही जोरदार हैं वाकई अगर इन पर अमल किया गया तो सब टॉप के ब्लॉगर बन जायेंगे।

बिलकुल "हमदर्द का टानिक सिंकारा" टाईप पोस्ट है :)

वीनस केसरी

असहमति मात्र एक जगह वह यह कि हिन्दी ब्लॉग का पाठक ब्लॉग पर विचरण करते समय एक साथ सारे काम नहीं करता ,वह केवल ब्लॉग पढ़ता है जी हाँ ब्लॉग पढ़ता है महज़ देखता नहीं । इसलिये यह सारे सुझाव भी वह ध्यान से पढ़ेगा । यह अच्छी बात है कि लगभग 90 प्रतिशत ब्लॉगर इन सुझावों का पहले से ही पालन कर रहे हैं। मै इन सुझावों में एक सुझाव और जोड़ना चाहता हूँ कि ब्लॉग्स को वैचारिक युद्ध का रणक्षेत्र न बनायें । अन्यथा एक दूसरे के प्रति ज़हर उगलने के अलावा कुछ नहीं हासिल होगा । साथ ही हिन्दी ब्लॉगर्स के लिये एक विशेष सुझाव यह कि इन दिनों प्रिंट मीडिया पत्रकारिता और साहित्य जगत के लोगों का ध्यान हिन्दी ब्लॉग्स की ओर आकर्षित हो रहा है अत: ब्लॉगर्स अपना सर्वश्रेष्ठ यहाँ प्रस्तुत करें ( बाद में कुछ भी दें ऐसा मेरा आशय नहीं है ) बहरहाल अमित वर्मा जी और अर्नाब जी के साथ साथ रवि रतलामी जी को भी बहुत बहुत धन्यवाद । -शरद कोकास ,दुर्ग छ.ग.

रवि जी आपने बहुत अच्छा किया जो इन दोनो ब्लागरों की अंग्रेजी में दी गई जानकारी को हिंदी में प्रकाशित किया. आभार!
जानकारी बहुत उपयोगी है.
"आप चिट्ठाकारी का विचार छोड़ दें. भारत में चिट्ठाकारी से आजीविका चंद अपवादों को छोड़कर संभव नहीं है. (हिन्दी में तो ख़ैर बिलकुल ही नहीं है - रवि)"
ये सच बहुत कड़वा लग रहा है.

बहुत बढ़िया जानकारी..हमारे जैसे ब्लोग्गेर्स को ऎसी टिप्स की बहुत आवश्यकता थी..बहुत सी बाते समझाई गयी है इस पोस्ट में बिना किसीको तकलीफ पंहुचाये..बहुत बहुत आभार..!!

बहुत बढ़िया जानकारी |

हद है रतलामी जी इतनी सीखें आपने सजोई और विडम्बना यह की एक ही पोस्ट में आप सभी को ठेल दिए -नतीजा सुबह की तैयारियों के चलते पूरा नहीं पढ़ पाया !
हम दूसरों को तो बहुत उद्धृत करते हैं -आप मेरी समझ से हिन्दी ब्लागिंग पर ज्यादा व्यावहारिक दृष्टि दे सकते हैं !
श्री अमित क्या हिन्दी ब्लागिंग शास्त्र के उद्भट विद्वान् हैं ? हम बन्दर नक़ल क्या नहीं छोड़ सकते ?
और हां मैं इस ट्रेंड को समझ पा रहा हूँ की ब्लागिंग अब केवल चूतियापा (क्षमा इस स्लैंग के लिए ) ही नहीं रहने वाली है मतलब की जिसे जो भाये वैसे ही यहाँ हगे मूते -यह सशक्त अभिवयक्ति बिना सोदेश्यता के कब तक जिंदा रह पायेगी ?
फिर शाम को आगे पढ़ते हैं ! वही टिकेगा जो समाज को कुछ देगा -बाकी को काल कवलित होना ही है !

वर्तमान समय की जरूरत को समझ कर खूब ले आए. सुन्दर विषय-वस्तु.

वर्तनी जाँचक है तो सही, उपयोग में लेते नहीं या पूछते नहीं इसका कोई क्या करे. क्या फर्क पड़ता है इस को ईस लिख दिया तो... :)

बहुत ही बढ़िया लिखा है जो कि बहुत ही उपयेगी है। चिठ्ठाकारी पर ये शानदार जानकारी आप के इतने वर्षों की चिठ्ठाकारी का अनुभव है।

मेरे इसी विषय से संबंधित लेख ब्लॉगिंग में आने वाली रुकावटें तथा ब्लॉगिंग से परेशानियां और खतरे वाले लेख भी देखें

मनीषा
www.hindibaat.com

शुक्रिया काम की जानकारियां बांटने का।

महत्वपूर्ण जानकारी अनुभवी लोगों द्वारा

इसे भी देखिये http://www.gingerchai.com/2009/08/29/how-to-dress-up-a-blog/

rviji
dhnywad blog ki jankari dene ke liye

उपयोगी जानकारियां हैं। लेकिन ब्‍लॉगिंग के मूल स्‍वभाव को ही चुनौती दे रही हैं। लॉजिक की भाषा में इसे आत्‍मव्‍याघाती कहते हैं। सबसे पहले बताया जाता है कि ब्‍लॉग ऐसा माध्‍यम है जिसमें लिखने वाले के शब्‍दों, उनके गठन, लेख की लम्‍बाई, विषय और संपादन पर किसी और का नहीं बल्कि खुद लेखक का ही नियंत्रण है। इसके बाद कुछ भी सलाह देने का मतलब है कि एक सफल हुए लेखक की कॉपी करके दूसरे वैसे ही लेखक तैयार करना। मेरे हिसाब से यह आत्‍मव्‍याघात है।

ब्‍लॉगिंग खुद ही खुद को धोखा दे रही है। रवि जी आप भी सोचिएगा।

आखिर में
डेढ साल पहले भी मैं इंडिया अनकट के बारे में जानता था लेकिन तब से आज तक केवल दो बार वहां गया हूं। पिछली बार भी शायद आपके ब्‍लॉग सही कड़ी मिली होगी। इस दौरान आपके ब्‍लॉग की लगभग हर पोस्‍ट पढ़ी है :)

ham to ye dono post pahle hi padh chuke hain aur unhe google reader me share bhi kar chuke hain.. lekin aapke dvara hindi me kiya gaya anuwad anukarniy hai.. aapke is post ko bhi share me dal diye.. :)

Thanks

बहुत बढ़िया लगा यह लेख, रवि जी।

ek se ek nayab vichar hain rvi vermajine jo kha sch hai apne hisab ke jo jitni bat ho apne sarko jyada bda chda ke nhi aam aadmi smjh ske kho likho glti hr insan se hoto hain sbk le aage bdo htasha bebsi jidgi me mile to kya sfr jari rkho kisi ko jyada bor kroge koi aapko itna bor krega ki aap?

hr vyati apne aap me pripurn nhi hota hr aadmi buddhiman hai apne apne vichar hain koi kisike dimag me nhi jhank skta aapne jo tips diye behd achchhe hain jo aadmi ke lekhan me sudhar layenge/ dhayvad

esa mene kya kiya jo sdsyta rdd krdi?apne aapko smjhte kya ho jo tum likhoge vo sahiyt hoga jnta ko aam boli me smjh aata hai hindi ka nash aap jeson ne hi kiya hai men khud esi ghiya ki sdsyta nhi lena chahta dhnybad bnde matram men hindi ka ajnm sevak hun 107 sahiyik snthaon se chhp chuka hun 60 se adhik smman vibhinnsahitiyk snsthao se mil chuke hain tum log kya likhte ho kya srkulet krte ho isse pta chlta hai ki log kitna pdhte hain hindi ko bdnam tum jese chmchon ne hi kiya jo stta ke bhat hain?

माने अंग्रेजी के लेखक हिन्दी वालों को सलाह दे रहे हैं…

बिन मांगी सलाह अच्छी लगी, सुस्त पड़ी ब्लोगिंग के लिए नई उर्जा का संचार करना होगा.

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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