एक व्यक्ति, छ: महीने और साठ हजार रुपल्ली में क्या-क्या मिल सकता है?

वैसे तो बहुत कुछ मिल सकता है, और काफी कुछ नहीं भी. मगर, इतने संसाधन में एक पूरा का पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम, सैकड़ों अनुप्रयोगों के साथ एक छोटी सी भाषा-बोली में तैयार करने के ख्वाब को पूरा कर लिया जाए तो? अविश्वसनीय? असंभव?

 

मगर यह संभव है. ओपनसोर्स की महिमा है यह. मैथिली (उबुन्टु मैथिली केडीई 4.2 पैकेज डाउनलोड) से शुरूआत हो चुकी है. छत्तीसगढ़ी का नंबर भी आ ही गया है – छत्तीसगढ़ी केडीई 4.2 एसेंशियल फ़ाइलों को चेक-इन किया जा चुका है, और यह भी शीघ्र ही सबके मुक्त व मुफ्त डाउनलोड व उपयोग हेतु जारी हो जाएगा. यह संभव हुआ है सराय द्वारा प्रायोजित मुक्त स्रोत परियोजनाओं के पोषण से. मैथिली और छत्तीसगढ़ी जैसे हिन्दी के डेरिवेटिव भाषाओं के कम्प्यूटर अनुप्रयोगों का अनुवाद हिन्दी अनुवाद के डाटाबेस को लेकर किया जा रहा है जिससे अनुवाद कार्य बहुत कुछ सरल हो गया है. छत्तीसगढ़ी केडीई 4.2 का कार्य लगभग 80प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है और महीने-दो-महीने के भीतर छत्तीसगढ़ी भाषाई वातावरण में लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का आनंद आप ले सकेंगे. और, खुशी की बात ये है कि छत्तीसगढ़ी भाषा में तमाम अनुप्रयोग विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए भी उपलब्ध होंगे क्योंकि केडीई 4.2 के आमतौर पर सभी अनुप्रयोग अपने पूरे भाषाई वातावरण के साथ विंडोज 2000 से ऊपर के तमाम संस्करणों में भी मजे से चलाए जा सकते हैं.

साठ हजार रुपए और छः महीने में एक पूरी दुनिया मिल सकती है – अपनी मातृ-भाषाई के संपूर्ण वातावरण में एक पूरी की पूरी कम्प्यूटिंग दुनिया. आपकी भाषा चाहे कोई भी, कितनी भी अजनबी हो...

 

छत्तीसगढ़ी भाषा में लिनक्स केडीई 4.2 के कुछ स्क्रीनशॉट -

(बड़े आकार में देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें)

 

डाल्फिन:

dolphin cg

 

केएटीई:

chhattisgarhi operating system kate

 

केडीई डेस्कटॉप:

chhattisgarhi desktop

विषय:

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अपनी मातृभाषा की समृधि और प्रसार के प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम ही है | आपका यह प्रयास सराहनीय है |

मातृभाषा को गौरवान्वित करने का प्रयास प्रंशसनीय है। आपका आभार।

जानकारी के लिए आभार।

जानकारी के लिए आभार।

रवि जी
हार्दिक बधाई हो। मातृभाषा को सही तरीके से मुक्त एवं मुफ्त बनाया जा रहा है। आपके प्रयास सराहनीय है।

यह बहुत ही खुशी की बात है. 60 हजार में! असमान्य! ईश्वर करे कि यह क्राति ऐसे ही फैलती रहे!!

सस्नेह -- शास्त्री

-- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

badhai ho. aapne bahut bahut bahut bahut achchha kaam kiya hai.

छत्तीसगढ़ी ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करने की आपकी यह धुन सराहनीय है। आपने यह साबित कर दिया कि आदमी अगर ठान ले तो वह अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए रास्ते खुद ही ढूंढ सकता है। वह भी बिना किसी सरकारी मदद के।

सलाम आपको, साथ ही बतौर छत्तीसगढ़िया आपका शुक्रिया भी।

Badhiya jaankari aur sarahniya pryas.

अरे वाह, बढ़िया खबर है।

आज गम पाये हन खबर ल पढके जी ह ठंडा गे हावे जुग जुग जिये हमर छत्‍तीसगढ के लाल http://chor-bazar.blogspot.com

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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