शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

जित देखूं तित चड्डियाँ...



चड्डियों को इतनी महत्ता पहले कभी नहीं मिली होगी. आपके पैंट सूट साड़ी सलवार के नीचे यह अदना सा, मगर महत्वपूर्ण वस्त्र पहले कभी भी इतनी चर्चा में नहीं रहा था. अचानक हर तरफ चड्डियाँ ही चड्डियाँ दिखाई देने लगी हैं. लोग-बाग एक दूसरे की चड्डियों के रंग, रूप, आकार प्रकार और कीमत को लेकर वार-प्रहार और आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं. लोग एक दूसरे को देख कर कयास लगा रहे हैं कि सामने वाले ने कौन सी, किस रंग की, किस किस्म की चड्डी पहन रखी है. उसने गुलाबी चड्डी पहनी है कि काली या फिर खाकी. किसी ने थोड़ा सा मुंह खोला नहीं कि लोग उसकी सोच की चड्डी के चीथड़े करने भिड़ जा रहे हैं. लोग खुले में अपनी चड्डियाँ धो रहे हैं, और न सिर्फ धो रहे हैं, सामने वाले की चड्डियों के पैबंदों, उसमें लगे दागों की चर्चा भी पोंगा लेकर कर रहे हैं. बे-रौनक खाकी चड्डी वालों को चटकीले गुलाबी चड्डियाँ भेंट की जा रही हैं.

वैसे, एक आम भारतीय को आज के समय में उसकी चड्डी की औकात दिखाना जरूरी सा हो गया है. कभी कभी तो लगता है कि सूटेड-बूटेड वो आम भारतीय हो या भगवा-करिया रंग वस्त्र धारी वो इंडियन, जब धर्म और संस्कृति पर बोलता है तो लगता है कि उसने शायद चड्डी नहीं पहनी है.

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व्यंज़ल
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चाहते तो थे खाकी चड्डियाँ
तकदीर में थी पिंक चड्डियाँ

शहर में निकला है वो नंगा
पहनाने को सबको चड्डियाँ

सूट तो सबने सिलवाए कई
न मिल पाईं उन्हें चड्डियाँ

ये कैसा वक्त है या खुदा
टाई के विकल्प हैं चड्डियाँ

बातें करते हो नंगई की रवि
पहनलो पहले खुद चड्डियाँ

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15 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. Sirji,kripaya vishay ko ignore list me daal dijiye...sunkar ubkaiyan aane lagi hain.

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  2. बेनामी4:45 pm

    चड्ढी के नीचे क्या है?
    चड्ढी के नीचे क्या है?
    जल्द ही इस हैडिंग से भी एक पोस्ट लिख मारो.

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  3. कितना मजा आ रहा है न आपको ?हिन्दी ब्लॉग है ही कविता ओर फिल्मी गानों के लिए, क्या करूँ बहुत खूब कह कर निकल जाऊं ?

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  4. बड़ी चड्ढीमय पोस्ट है :-)

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  5. रवि भाई, चड्डी पर लिखने का सब से सही तरीका यही है। बेहतरीन रचना। इस से अधिक की जरूरत कतई नहीं थी। चड्डी भेजने का मंतव्य भी यही रहा होगा कि पहले खुद को तो ढक लो।

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  6. ख़ूब चुटकि ली है।

    आगम य निर्गम स्थल हो,
    दोनो के ही निकट चडडिया।

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  7. चड्ढा की चड्ढी पर भी कुछ व्यंजल हो जाए -वैसे चड्ढी खींचना कोई मुहाबरा भी है शायद !

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  8. आपने तो सबकी चड्डियां उतार दीं-पहनानेवालों की भी और उतारनेवालों की भी।
    अपनेवालों का ध्‍यानद रखिएगा।
    जय गुरुदेव।

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  9. यह तो सभी जानते ही हैं,
    कैसे उतरे किसकी चड्ढी!

    ऊपर चाहे कुछ भी पहनो,
    नीचे मगर ज़रूरी चड्ढी!

    चलना थोड़ा सँभल-सँभलकर,
    वरना फट जाएगी चड्ढी!

    कभी नहीं सोचा था रवि ने,
    कविता लिखवाएगी चड्ढी!

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